फिक्स था चित्रकूट चुनाव: शिवराज सिंह और अजय सिंह की गोलबंदी सुर्खियों में | MP ELECTION NEWS

Sunday, November 12, 2017

शैलेन्द्र गुप्ता/भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चित्रकूट उपचुनाव का परिणाम वही आया जिसकी उम्मीद राजनीति के पंडितों और सरकारी जासूसों को थी। कांग्रेस ने यहां शानदार जीत हासिल की है। 14,333 वोटों के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा प्रत्याशी शंकरदयाल त्रिपाठी को पराजित किया है। वोटिंग के एक सप्ताह पहले ही यह खबर लीक हो गई थी चित्रकूट चुनाव फिक्स है और इसमें कांग्रेस की जीत होने जा रही है। 

फिक्सिंग का संदेह क्यों जताया गया
राजनीति के पंडितों और खुफिया ऐजेंसियों की रिपोर्ट में मतदान के पहले ही कांग्रेस की जीत की संभावनाएं व्यक्त कर दी गईं थीं। यहां तक कि सीएम शिवराज सिंह तक पहुंचने वाली खुफिया जानकारी में भी बताया जा चुका था कि भाजपा चित्रकूट हारने की स्थिति में है। संदेह इसलिए जताया गया क्योंकि यहां सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरह की मेहनत आचार संहिता लागू होने के पहले की थी, वैसा कुछ जौहर प्रत्याशी के चयन और पर्चा दाखिले के बाद नहीं दिखाया। इससे पहले एक खबर आई थी कि लोकायुक्त एनके गुप्ता की नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष ने कुछ इसी तरह की अनदेखी करके सीएम शिवराज सिंह को सहयोग कर दिया था। यह बताने की जरूरत नहीं कि प्रत्याशी के चयर में भाजपा ने भारी भूल की लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह भूल नहीं रणनीति थी। 

शर्मनाक हार से शिवराज को क्या फायदा होगा
दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने दूर की कौड़ी खेली है। चित्रकूट का चुनाव अजय सिंह के लिए प्रतिष्ठिा का प्रश्न था। शिवराज सिंह ने यहां दनादन दौरे किए और चुनाव के बहुत पहले ही चुनावी माहौल बना दिया। अफवाह है कि इस तरह से शिवराज सिंह ने अजय सिंह पर दवाब बनाया कि वो उस बात के लिए राजी हो जाएं जो शिवराज चाहते हैं। माना जा रहा है कि शिवराज सिंह ने अजय सिंह को चित्रकूट गिफ्ट करके बड़ी बाजी अपने हाथ कर ली है। अब यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस का चेहरा बनाकर आते हैं, जैसा कि भाजपा मान चुकी है तो अजय सिंह रिटर्न गिफ्ट देंगे। चित्रकूट की जीत के बाद अजय सिंह कांग्रेस के हीरो बन जाएंगे और कमलनाथ व सिंधिया के विवाद के बीच अवसर का लाभ उठाने का प्रयास करेंगे। अजय सिंह पहले भी पूछ चुके हैं कि उनके चेहरे में क्या बुराई है। यदि 2017 में 1 सीट हारकर 2018 में 8 सीटें ​जीतने को मिल जाएं तो इस सौदे को कौन बुरा कहेगा भाई। 

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