अशोकनगर जिला पंचायत में जुलानिया की हैट्रिक, लगातार तीसरा CEO सस्पेंड

Monday, November 6, 2017

भोपाल। पंचायत विभाग के सबसे ताकतवर आईएएस अफसर राधेश्याम जुलानिया ने यूं तो प्रदेश भर में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाईयां की हैं परंतु अशोकनगर जिला पंचायत की बात करें तो यहां उन्होंने हैट्रिक लगा दी। एक के बाद एक लगातार तीसरा सीईओ जिला पंचायत सस्पेंड किया गया है। मजेदार तो यह है कि जुलानिया के डर से यहां पदस्थ किए गए आईएएस सुरेश शर्मा ने तो ज्वाइन ही नहीं किया। उन्हे कार्रवाई मंजूर थी लेकिन जुलानिया के नीचे काम करना मंजूर नहीं था। 

जिला पंचायत अशोकनगर की बात करें तो गुना जिले का विभाजन वर्ष 2003 में हुआ था। इस विभाजन के बाद 2005 तक अशोकनगर जिला गुना जिला पंचायत के अधीन चलता रहा। वर्ष 2005 में अशोकनगर में नवीन जिला पंचायत का गठन किया गया। तभी से कोई अधिकारी यहां आने के तैयार नहीं है। इस जिला पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर अभी तक या तो राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी या फिर ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी पदस्थ होते रहे है। 

आज से 6 माह पहले यहां के सीईओ एमएल वर्मा को प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया ने लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया था। इसके बाद सीईओ की कुर्सी पर केके श्रीवास्तव आए लेकिन वो भी टिक नहीं पाए और जुलानिया के आदेश पर सस्पेंड हो गए। तब से जिला पंचायत बिना सीईओ के चल रही थी। प्रभारी सीईओ के रूप में अपर कलेक्टर अनिल चांदिल जिला पंचायत के सीईओ का काम देख रहे थे। 

इसी बीच शासन की ओर से राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत होकर आईएएस अवार्ड मिलने के बाद ग्वालियर विकास प्राधिकरण के सीईओ सुरेश शर्मा को अशोकनगर में जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाकर शासन के द्वारा भेजा गया था। उनकी नियुक्ति के बाद यह लगा था कि अब जिला पंचायत के हालात सुधरेंगे क्योंकि एक आईएएस अफसर आ रहा है परंतु एक के बाद एक कई दिन गुजर गए। डेढ़ माह तक जब सुरेश शर्मा सीईओ का चार्ज लेने अशोकनगर नहीं आये तब कार्रवाई की शुरूआत हुई। 

मामला कुछ दिन और टल जाता परंतु अशोकनगर में मुंगावली उपचुनाव आ रहे हैं। भाजपा का प्रत्याशी जिताने के लिए सीईओ की कुर्सी पर एक काम के अधिकारी की जरूरत है। सुरेश शर्मा इसके लिए तैयार नहीं हुए तो पिछले दिनों उनका भी निलंबन कर दिया गया। अब सवाल यह है कि क्या एक के बाद एक लगातार तीन सीईओ के सस्पेंड हो जाने के बाद इस कुर्सी पर कभी कोई अच्छा अधिकारी आएगा या फिर यह कुर्सी भी अशोकनगर की तरह श्रापित हो जाएगी। जहां कभी कोई सीएम नहीं आता। 

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