तो ये है 4 साल से फरार IAS MOHANTY के सरेंडर का सच | BUREAUCRATS

Wednesday, November 22, 2017

नई दिल्ली। राजस्थान कैडर का फरार आईएएस अफसर बीबी मोहंती आत्मसमर्पण कर चुका है। वो 4 साल से फरार था। कोर्ट ने उसे 2 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। आरोप है कि पुलिस शुरू से अब तक मोहंती की ही मदद कर रही है। रिमांड पर भी कुछ खास सवाल नहीं पूछे जा रहे। बड़ा सवाल यह गूंज रहा है कि सफलतापूर्वक 4 साल तक फरार रहने के बाद ऐसा क्या हुआ कि मोहंती ने सरेंडर कर दिया। क्या अचानक उसे भारत के कानून पर विश्वास हो उठा या बात कुछ और है। आइए जानते हैं: 

क्यों किया सरेंडर
मोहंती काे गिरफ्तार नहीं करने पर कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को फटकार लगाई थी। उनकी संपत्तियों को कुर्क करने के लिए सूची भी मांगी थी। जैसे ही यह सूचना मोहंती के पास पहुंची वो एक्टिव हो गए। जब सारे रास्ते बंद हो गए तो प्रॉपर्टी को कुर्क होने से बचाने के लिए सरेंडर कर दिया। कहा जा रहा है कि उनके संपर्कों ने उन्हे जल्द ही जमानत दिलाने का वादा किया है। 

ताकि रिटायरमेंट के लाभ मिलने लगें
भगोड़ा होने के कारण सरकार से मोहंती को रिटायरमेंट के बाद जो लाभ मिल सकता था, वह नहीं मिल पा रहा था। आत्मसमर्पण के बाद अब राज्य सरकार ग्रेच्युटी, पीएफ सहित अन्य लाभों का भुगतान कर सकती है। 

क्या है आरोप
पुलिस ने बताया कि 25 जनवरी 2014 को यूपी निवासी 23 वर्षीया एमबीए छात्रा ने महेश नगर थाने में इस्तगासे से मोहंती पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया। आरोप था कि वह स्वेज फार्म में किराये के फ्लैट पर रहती थी। जहां आईरिस अपार्टमेंट में मोहंती का भी फ्लैट था। मोहंती ने आईएएस की पढ़ाई कराने व शादी का झांसा देकर फरवरी 2013 में दुष्कर्म किया। मोहंती ने एक साल तक शोषण किया।

जनवरी 2014 में रिपोर्ट दर्ज होते ही वे फरार हो गए थे। उस समय वे सिविल सर्विस अपील ट्रिब्यूनल में कार्यरत थे। फरारी के दौरान ही रिटायर हो गए। पुलिस ने जुलाई 2014 में उन पर 5 हजार रु. का इनाम घोषित किया था। बाद में कोर्ट से भगोड़ा घोषित कराकर स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी करवा लिया था।

पुलिस की भूमिका संदिग्ध
मामले में बरामद साक्ष्यों को डीएनए सैंपलिंग के लिए एफएसएल भेजने के बजाय पुलिस 4 साल से मालखाने में रखे है। अब एफएसएल जांच सवालों के घेरे में आ सकती है। एफएसएल के डायरेक्टर बीबी अरोड़ा ने कहा कि वारदात के बाद पुलिस को तत्काल मौके से साक्ष्य एफएसएल को भेज देने चाहिए। साक्ष्य काफी समय तक पड़े रहने से मिलान मुश्किल होता है। हमने तो कई दफा पत्र भी लिखे हैं।

पुलिस की सफाई
सोडाला एसीपी नेम सिंह ने कहा कि डीएनए व सीमन एफएसएल को सैंपल भेजेंगे। पीड़िता के अंडर गारमेंट्स के अलावा अन्य साक्ष्यों का मिलान कराएंगे। चार साल बाद भी मिलान संभव है। बता दें कि पुलिस ने मोहंती के फ्लैट से एफएसएल टीम बुलाकर बेडशीट, बाल व अन्य साक्ष्य जुटाए थे। पीड़िता ने पुलिस को अंडर गारमेंट्स भी उपलब्ध कराए थे। ये 4 साल से पुलिस मालखाने में हैं।

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