3 कलेक्टरों ने चिटफंड के जरिए करोड़ों की ठगी करवाई : NAIDUNIA

Sunday, November 19, 2017

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के 3 कलेक्टरों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दर्जन भर ऐसी कंपनियों को अपने इलाकों में ठगी करने की खुली छूट दे दी थी जो फर्जी निवेश योजनाएं चला रहीं थीं और सेबी ने उनके कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिए थे। यह दावा प्रतिष्ठित हिंदी अखबार नई दुनिया ने किया है। आरोपी कलेक्टरों में बस्तर के तत्कालीन कलेक्टर अन्बलगन पी, बिलासपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी एवं कोरबा की तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती रीनाबाबा साहेब कंगाले का नाम लिया गया है। 

नई दुनिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार सेबी ने 54 चिटफंड कंपनियों को फर्जी बताते हुए देश भर में व्यवसाय करने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों के कलेक्टरों ने इन कंपनियों को लोगों की गाढ़ी कमाई को लूटने खुली छूट दे दी थी। बिलासपुर, कोरबा और बस्तर के कलेक्टरों ने इन कंपनियों को क्लीनचिट देते हुए सीलबंद कार्यालयों को खोलने का आदेश भी जारी कर दिया था। इससे निवेशकों में भ्रम की स्थिति भी बनी और अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बचत के रूप में जमा भी कर दिया।

वर्ष 2009 से 2015 के बीच प्रदेश के सभी जिलों में 110 चिटफंड कंपनियों ने जमकर व्यवसाय किया। धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा की शिकायत के बाद सेबी ने इन सभी कंपनियों को व्यवसाय करने प्रतिबंधित कर दिया था। सेबी के निर्देश की जानकारी देशभर के राज्य सरकारों को भेज दी गई थी। शुरुआती दौर में राज्य शासन के निर्देश पर कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में चिटफंड कंपनियों के कार्यालयों में सीलबंद की कार्रवाई की थी। कंपनियों के स्थानीय अधिरियों से दस्तावेज जमा करने कहा गया था। आश्चर्यजनक ढंग से चिटफंड कंपनियों के सीलबंद कार्यालयों को कलेक्टर के आदेश पर खोल दिया गया।

नईदुनिया ने दावा किया है कि उसके पास उपलब्ध दस्तावेजों पर गौर करें तो बिलासपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने रोजवेली, बीएन गोल्ड, साईं प्रसाद सहित आधा दर्जन कंपनियों को सेबी के निर्देश के बाद भी क्लीनचिट देते हुए सीलंबद कार्यालयों को खोलने का निर्देश जारी कर दिया था।

इसी तरह बस्तर के तत्कालीन कलेक्टर अन्बलगन पी ने रोजवेली, कोलकाता वायर, विनायक होम्स सहित अन्य कंपनियों को बस्तर सहित आसपास के इलाकों में निवेश के बहाने लोगों को लूटने की खुली छूट दे दी थी। कलेक्टर के निर्देश पर सीलबंद कार्यालयों के खुलने के बाद इनके व्यवसाय में तेजी के साथ बढ़ोतरी भी हुई।

कंपनी के स्थानीय अधिकारियों ने कार्यक्रम में जरिए खुले मंच से सार्वजनिक रूप से यह प्रचारित भी करते रहे कि कलेक्टर के निर्देश पर हम कंपनी को चला रहे हैं। मंच पर मंत्री, दिग्गज नेताओं और आला अधिकारियों को बैठकर एजेंटों व ग्रामीण निवेशकों के बीच भ्रम भी फैलाते रहे।

कोरबा की तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती रीनाबाबा साहेब कंगाले ने सबसे ज्यादा 14 चिटफंड कंपनियों को सेबी के बैन के बाद भी क्लीन चिट दी थी। इसमें रोजवेली, बीएन गोल्ड, कोलकाता वायर, विनायक होम्स, अनमोल इंडिया, पी कैशिया, साईं प्रसाद, केएनआईएल कोलकाता वायर, गुस्र्कृपा, याल्को व रोजवेली जैसी प्रमुख चिटफंड कंपनियां शामिल थीं।

फैक्ट फाइल
छत्तीसगढ़ में कार्यरत चिटफंड कंपिनयों की संख्या- 110
बिना रजिस्ट्रेशन के चलने वाली कंपनियों की संख्या- 50
सेबी द्वारा बैन कंपनियों की संख्या-110
छग में निवेशकों की संख्या- 20 लाख
एजेंटों की संख्या- एक लाख 5 हजार
चिटफंड कंपनियों ने छग से लूटे-50 हजार करोड़ स्र्पए

इनका कहना है
सेबी से बैन के बाद चिटफंड कंपनियों को प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों के कलेक्टरों ने नियम विरुद्ध तरीके से क्लीनचिट दे दी थी। इसके बाद स्थिति और भी बिगड़ी। फर्जीवाड़ा कर स्र्पए बटोरने वाली कंपनियों ने लोगों के बीच तेजी के साथ यह विश्वास जगाया कि कलेक्टर के निर्देश के बाद कंपनियां चल रही है। हमारे पास उपलब्ध दस्तावेजों से यह प्रमाणित होता है 
जुगल किशोर पांडेय वकील,याचिकाकर्ता

सेबी के स्पष्ट निर्देश के बाद चिटफंड कंपनियों को किस आधार पर क्लीनचिट दी गई है। इसकी उच्च स्तरीय पड़ताल के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाएंगे। कंपनियों के कार्यक्रम में मंच शेयर करने वाले नेताओं, मंत्री व आला अधिकारियों की भी पोल खोली जाएगी। दस्तावेज जुटाने के अलावा हलफनामा तैयार करने का काम किया जा रहा है 
बसंत शर्मा-संयोजक, अभिकर्ता संघ चिटफंड कंपनी

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