केरल में 121वें आरएसएस स्वयंसेवक की हत्या | NATIONAL POLITICAL NEWS

Sunday, November 12, 2017

गुरुवायूर/केरल। केरल में मंदिरों का शहर कहे जाने वाले गुरुवायूर में रविवार दोपहर 23 साल के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी सीपीआईएम के वर्कर्स पर लगा है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, RSS वर्कर आनंदन घटना के वक्त अपनी बाइक से घर की तरफ जा रहे थे। तभी एक कार ने उसे टक्कर मार दी। इसके बाद कार से कुछ लोग बाहर आए और उन्होंने आनंद पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

घटना रविवार दोपहर की है। आनंदन अपनी बाइक से घर जा रहे थे। तभी कार में कुछ लोग उनके करीब आए और आनंदन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से जख्मी आनंदन को करीब के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, घटना के पीछे सीपीआई-एम के वर्कर्स का हाथ है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हत्यारों की तलाश की जा रही है।

आनंदन पर था हत्या का आरोप
23 साल के आनंदन ब्रम्हाकुलम के रहने वाले थे। 2013 में उन पर सीपीआई-एम के एक वर्कर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगा था। बीजेपी का आरोप है कि 2001 से अब तक केरल में 120 RSS वर्कर की हत्या की जा चुकी है। इनमें से 84 तो सिर्फ कन्नूर में मारे गए। पार्टी का यह भी आरोप है कि पिनरई विजयन के सीएम बनने के बाद 14 RSS कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। 

दूसरी तरफ, सीपीआई-एम का आरोप है कि राज्य में हिंसा की वजह RSS और बीजेपी हैं। उनके वर्कर्स सीपीआई-एम के कार्यकर्ताओं पर हमले करते हैं। केरल में सीपीआई-एम की सरकार है। बीजेपी सीएम पिनरई विजयन सरकार पर लाल आतंक का आरोप लगाती रही है। यहां आरएसएस और लेफ्ट पार्टियों के वर्कर्स के बीच कई बार हिंसा हो चुकी है।

शाह ने लगाया था सीएम पर आरोप
अमित शाह अक्टूबर में केरल दौरे पर आए थे। शाह ने यहां कहा था- विजयन राज्य में हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं। बीजेपी वर्कर्स को पॉलिटिकल वॉयलेंस का शिकार बनाया गया है। सीपीआई-एम लीडर्स और विजयन सियासी हत्याओं के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। शाह ने कहा था, "केरल में लेफ्ट के कार्यकर्ताओं ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। गोली मारकर हत्या की जाती है, लेकिन हमारे कार्यकर्ताओं की तो बोटी-बोटी काट दी गई। इससे ज्यादा बेरहमी और क्या हो सकती है, लेकिन फिर भी हम डरेंगे नहीं, हम बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगे।

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