क्या अब POLICE मुस्तैद हो पायेगी ?

Monday, October 2, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। आखिर केंद्र सरकार ने यह मान ही लिया देश में पुलिस सुधार की जरूरत है। पुलिस सुधार जैसा विषय राज्य और केंद्र द्वारा अब एक दूसरे के पाले में ठेला जाता रहा है। इस बार केंद्र सरकार द्वारा पुलिस सुधार सहित आंतरिक सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की स्थिति को दुरुस्त करने के लिए 25 हजार 60 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्णय लिया है। देश में आंतरिक सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए कई मांगें लंबे समय से लम्बित थीं। इनमें पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण औचित्यपूर्ण और एकबड़े समय लम्बित मांग है। कहने को तो पुलिस और कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और केंद्र जो भी योजना बनाए, उसको क्रियान्वित करने का दारोमदार राज्यों पर ही है, पर केंद्र की एकीकृत दिशा वाली योजना और इसके लिए आवश्यक राशि के अभाव में यह संभव नहीं था।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति ने इस स्थिति को समझा और इसे अंतिम रूप देकर लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करने का काम किया। अब जब केंद्र ने यह साफ कर दिया है कि इस योजना में 80 प्रतिशत राशि यानी 18 हजार 636 करोड़ रुपये उसके द्वारा वहन की जाएगी और राज्यों के हिस्से में केवल 6 हजार 424 करोड़ रुपये आएंगे तो फिर राज्यों को इसे तत्काल आगे बढ़ाने एवं तय समय सीमा में संकल्पबद्ध होकर पूरा करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

सच तो यह है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय राजस्व में से राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से 42 प्रतिशत करने के बाद पुलिस सुधारों के लिए केंद्रीय सहायता बंद हो गई थी। इसका परिणाम हुआ कि ज्यादातर राज्यों ने इस ओर ध्यान देना ही छोड़ दिया था।वर्तमान में जब आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ रही हैं। पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण न किया जाना आत्मघाती व्यवहारसा नजर आता था। उदाहरण में कहा जा सकता है कि किस तरह नक्सलियों व आतंकवादियों के सामने हमारी पुलिस सुविधाओं के अभाव में कई बार कमजोर पड़ी है।

पुलिस बल को आधुनिक हथियारों से लैस करना, उन्हें आधुनिक वाहन प्रदान करना, आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेशन के लिए हेलिकॉप्टर उपलब्ध कराना, नये वायरलेस सेट प्रदान करना..आदि आवश्यकताएं लंबे समय से महसूस की जा रहीं थी और केंद्र ने इसे स्वीकार कर आंतरिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी है। वास्तव में यह पुलिस आधुनिकीकरण की एक समग्र योजना है और उम्मीद करनी चाहिए कि अगले तीन सालों में हमें आधुनिक सुविधाओं से लैस और प्रशिक्षित पुलिस बल मिलेंगे।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें


Popular News This Week

खबरें जो आज भी सुर्खियों में हैं