ये GST नहीं गब्बर सिंह टैक्स है: राहुल गांधी

Monday, October 23, 2017

अहमदाबाद। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को एक महीने में तीसरी बार गुजरात दौरे पर पहुंचे। यहां वे ओबीसी सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर कई मुद्दों पर तंज कसे। जीएसटी का जिक्र करते हुए कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट ने कहा, “इनका जो GST है, ये GST नहीं, ये है गब्बर सिंह टैक्स है।” राहुल ने कहा- गुजरात में आज एक भी ऐसा शख्स नहीं है, जो किसी ना किसी आंदोलन में शामिल ना हो। पूरा प्रदेश आंदोलन में लगा हुआ है। क्यों हो रहा ये? इसलिए, क्योंकि 22 साल में गुजरात में जनता की नहीं, कुछ कारोबारियों की सरकार चली है। इसलिए गुजरात का समाज सड़कों पर है। अपनी लड़ाई लड़ रहा है।

आपकी सेल्फी से चीन में रोजगार
राहुल ने कहा, "सरकार का काम रोजगार देने का है। हिंदुस्तान का मुकाबला चीन से है। या तो रोजगार यहां आएगा या फिर वहां जाएगा। मीडिया के कैमरामैन बताएं कि उनके कैमरे के पीछे मेड इन गुजरात लिखा है या मेड इन चाइना। सेल्फी के लिए जब बटन दबाते हो तो चीन के किसी युवा को रोजगार मिलता है। मोदी जी मेड इन इंडिया की बात करते हैं। 30 लाख बेरोजगार रोज निकलते हैं यहां। इनमें से 450 को ही रोजगार मिल पाता है।"

राज्य के ज्यादातर काॅलेज या यूनिवर्सिटी पांच या दस कारोबारियों की हैं। जब युवा यहां एडमिशन लेते हैं, तो उनसे 10 या 15 लाख रुपए मांगते हैं। बाद में उन्हें गुजरात में रोजगार नहीं मिलता। उनके माता-पिता बीमार होते हैं तो गुजरात के अस्पतालों में इलाज नहीं मिलता। कह दिया जाता है कि ये प्राइवेट हॉस्पिटल है। यहां सिर्फ अमीरों का इलाज होता है। पिछले साल इस सरकार ने 1 लाख 30 हजार करोड़ का कर्जा उद्योगपतियों का माफ कर दिया।"

मोदीजी बताएं कितनी नैनो बनीं?
राहुल गांधी ने कहा, " जब यहां छोटे कारोबारी कर्जा माफी की बात करते हैं, तो कहा जाता है कि यहां सिर्फ करोड़पतियों का कर्जा माफ किया जा सकता है। आपने नैनो के लिए टाटा को पैसा दिया। किसानों की बिजली और पानी दिया। मोदी जी मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आपने टाटा को 35 हजार करोड़ करोड़ रुपए दिया। कितनी नैनो बनीं।"

मेक इन इंडिया और स्टाटअर्प इंडिया फेल हो गया
कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा, "मोदी जी ने कहा- ना खाउंगा और ना खाने दूंगा। अब देखिए, यहां हमारे मित्र हैं। उनकी दुकानें होंगी। पूरे हिंदुस्तान में मेक इन इंडिया और स्टाटअर्प इंडिया फेल हो गया। कितनी कंपनियां बंद हो गईं। जय शाह की कंपनी की 50 हजार से शुरू हुई। 16 हजार गुना ज्यादा कमा लिया। मोदी जी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। जय - शाह ज्यादा खा गया। पूरी दुनिया और गुजरात की जनता जानना चाहती है। एक लाइन उनके बारे में भी बोल दीजिए।"

कांग्रेस में शामिल हुए अल्पेश ठाकोर
इसी सम्मेलन में ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हो गए। ठाकोर ने कांग्रेस वाइस प्रेसिडेंट के साथ स्टेज शेयर किया। कहा- कांग्रेस की सरकार बनने पर उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाएगा, इसकी वो उम्मीद कर रहे हैं।

हार्दिक पटेल से मुलाकात अगले महीने
दूसरी तरफ, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के सहयोगी दिनेश पटेल ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में राहुल और हार्दिक की मुलाकात से इनकार कर दिया। दिनेश ने कहा- "हार्दिक और राहुल की अभी मुलाकात नहीं हुई है। राहुल एक से तीन नवंबर के बीच फिर गुजरात आएंगे। तब दोनों नेता मिल सकते हैं।"

सवानी से मिले राहुल
सिर्फ 15 दिन में बीजेपी छोड़ने वाले पाटीदार नेता निखिल सवानी ने हालांकि सोमवार को राहुल से अहमदाबाद के ही एक होटल में मुलाकात की। सवानी ने बाद में कहा- मैंने राहुल से पाटीदारों को इंसाफ दिलाने की मांग की। बता दें कि चुनाव आयोग अब किसी भी दिन गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक गुजरात कांग्रेस के प्रेसिडेंट भारत सिंह सोलंकी ने बताया, "हमने हार्दिक और पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के दूसरे नेताओं को भी इनवाइट किया है। उन्होंने हमें एक मेमोरेंडम दिया था। उनकी मांगों को लेकर हमारा सकारात्मक रुख है।"

कौन हैं अल्पेश ठाकोर?
ठाकोर ओबीसी, एससी-एसटी एकता मंच और ठाकोर क्षत्रिय सेना के फाउंडर हैं। अल्पेश ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन का विरोध किया था। जब हार्दिक पटेल ने 2015 में पाटीदारों को सरकारी नौकरियों और एजुकेशन में OBC के तय कोटे के तहत रिजर्वेशन देने के लिए आंदोलन शुरू किया तो ठाकोर ने भी उनके जवाब में ओबीसी, एससी और एसटी कम्युनिटी के लिए आंदोलन शुरू कर दिया।

इसी साल जुलाई में ठाकोर की अगुआई में गुजरात के किसानों ने कर्ज माफी की मांग करते हुए हाईवेज पर कई लीटर दूध बहा दिया था। एक साल पहले ठाकोर की अगुआई में भी अवैध शराब कारोबार के खिलाफ आंदोलन चला था। ठाकोर राज्य में बाबा साहेब अंबेडकर की भव्य प्रतिमा लगवाने के लिए भी आंदोलन कर चुके हैं।

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