साध्वी प्रज्ञा को गंदी फिल्में और फोटो दिखाए थे: सुधाकर चतुर्वेदी का दावा

Tuesday, October 24, 2017

वाराणसी। मालेगांव ब्लास्ट में कांग्रेस सरकार ने कई दिग्गजों को फंसाने की साजिश रची थी। जांच के दौरान आरएसएस चीफ मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ का नाम लेने के लिए भी कहा गया था। यह खुलासा ब्लास्ट के आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने किया है। उसने यह भी बताया कि साध्वी प्रज्ञा को जांच अधिकारियों ने लैपटॉप पर पॉर्न मूवी और अश्लील फोटो दिखाकर टॉर्चर किया। सुधाकर ने बताया कि उसे भी नंगा करके पीटा गया।

कांग्रेस के बड़े नेताओं ने रची साजिश
चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जांच अधिकारियों से मिलकर ये साजिश की थी। मालेगांव ब्लास्ट में गिरफ्तारी के 9 साल बाद जमानत पर जेल से रिहा हुए सुधाकर चतुर्वेदी सोमवार को मीडिया के सामने आए। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, शरद पवार और दिग्विजय सिंह सोची समझी साजिश के तहत जांच अधिकारी हेमंत करकरे के साथ मिलकर मालेगांव ब्लास्ट को भगवा आतंकवाद साबित करने में लगे थे। हिन्दू आतंकवाद की थिअरी साबित करने के लिए बड़े चेहरे के रूप में योगी और मोहन भागवत को फंसाने का पूरा प्रयास रहा। 

सबूतों के अभाव में नहीं हो पाई योगी की गिरफ्तारी
सुधाकर ने बताया कि एनआईए और एटीएस ने उन्हें गिरफ्तार करने के बाद तीन दिनों तक केवल योगी आदित्यनाथ और उनके संगठन, मठ और ठिकानों और कामकाज के बारे में ही पूछताछ की। सुधाकार ने बताया कि योगी के खिलाफ वारंट भी जारी किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई।

साध्वी को पॉर्न मूवी दिखा टॉर्चर किया
सुधाकर चतुर्वेदी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को जांच अधिकारियों ने लैपटॉप पर पॉर्न मूवी और अश्लील फोटो दिखाकर टॉर्चर किया। अपने बारे में बताया कि तीन दिनों तक खाना नहीं दिया गया। बाथरूम में करंट लगाकर रखा और पूरा नंगा कर पैरों के तालू पर लाठी से मारते थे।

मैं बेदाग, अब सामने लाऊंगा असलियत
मीर्जापुर जिले के रहने वाले सुधाकर चतुर्वेदी ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद मेरे परिवार को बहुत डराया गया। मेरी बहुत बदनामी हुई। सुधाकर ने कहा कि अब खुद को बेदाग साबित करने के लिए पूर्वांचल के हर जिले में जाकर मीडिया के जरिए असलियत सामने लाएंगे। 

2008 में गिरफ्तार किया गया सुधाकर को
बता दें कि सुधाकर चतुर्वेदी अभिनव भारत संस्था से जुड़े हैं। मालेगांव ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को सुधाकर को नासिक से गिरफ्तार कर मुंबई ले जाया गया था। ब्लास्ट में 7 लोग मारे गए थे, जबकि 79 जख्मी हुए थे। 

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