इस कांग्रेसी नेता के डर से मोदी सीट छोड़कर भाग गए थे

Saturday, October 28, 2017

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से आज कई चुनाव जीत लिए जाते हैं। उनकी डिजिटल सभाएं प्रचंड बहुमत दिला देंती हैं लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब मोदी चुनावी राजनीति से घबराकर अपनी सीट छोड़कर भाग गए थे। कांग्रेस में एक जमीनी नेता ऐसा था जिससे मोदी भी घबराते थे। हालांकि वो उसे हरा चुके थे फिर भी डरते थे। अब वो नेता इस दुनिया में नहीं है लेकिन इतिहास में वो कहानी दर्ज है जो सदियों तक सुनाई जाएगी। 

कच्छ में भूकंप के बाद केशुभाई पटेल की सरकार के कामकाज पर प्रश्न चिह्न लग गए थे। तब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात की बागडोर संभालने के लिए नरेंद्र मोदी को भेजा। हमेशा भाजपा के रणनीतिकार के रूप में अपनी भूमिका निभाने वाले और जीवन में कोई चुनाव न लड़ने वाले नरेंद्र मोदी सीधे गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। 

नियम के अनुसार उन्हें 6 महीने के अंदर विधानसभा चुनाव जीतना था। इसके लिए उन्होंने सबसे सुरक्षित सीट राजकोट 2 से लड़ने का इरादा जताया। इससे वहां के विधायक वजुभाई वाला ने इस्तीफा दिया। मोदी के लिए चुनाव लड़ने का यह पहला अनुभव था। राजकोट उपचुनाव से मोदी के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ।

मोदी के तमाम चुनाव में किसके सामने हुई कांटे की टक्कर
1998 में आयोजित विधानसभा चुनाव में राजकोट 2 की सीट पर वज़ुभाई वाला ने अपने प्रतिस्पर्धी आरजेपी के कश्मीराबेन नथवाणी को 28 हजार से भी अधिक वोट के मार्जिन से हराया था। इस सीट के लिए जब 2002 में उपचुनाव हुए, मोदी के सामने कांग्रेस के अश्विन मेहता प्रत्याशी थे। मोदी के जीवन में यह चुनाव सच्चे अर्थों में एक चुनौती थी। 1198 के चुनाव की तुलना में मोदी केवल 14,728 वोट से अश्विन मेहता को हराने में सफल रहे। इसके बाद दिसम्बर 2012 में आयोजित विधानसभा चुनाव में मोदी ने राजकोट 2 के बदले अहमदाबाद की मणिनगर सीट को अधिक सुरक्षित माना। इस तरह से मोदी ने 2002, 2007, 2012 के विधानसभा चुनाव में मणिनगर से ही अपना भाग्य आजमाया। परंतु इस तीनों चुनाव में कोई भी प्रत्याशी मोदी को अश्विन मेहता जैसी चुनौती देने में नाकाम साबित हुए।

सिटीजन बैंक सुप्रीमो अश्विन मेहता थे प्रखर कांग्रेसी
नरेंद्र मोदी के खिलाफ राजकोट में चुनाव लड़ने वाले अश्विन मेहता कांग्रेस के प्रखर हिमायती थे। कुछ समय पहले ही उनका निधन हो गया। वे सिटीजन बैंक के सुप्रिमो थे। स्वभाव से शांत, सरल और सौम्य थे। बैंकिंग क्षेत्र का उन्हें अच्छा-खासा अनुभव था। लोग उनका सम्मान भी करते थे। 21 फरवरी को 2002 को हुए उपचुनाव का परिणाम 24 फरवरी को आया। इसमें मोदी 14,725 मतों से जीते और बाकी के 19 प्रत्याशियों की जमानत ही जब्त हो गई।

मोदी के खिलाफ दूसरे दिग्गज हारे
गोधरा के दंगों के बाद आयोजित 2002 के विधानसभा चुनाव में मणिनगर सीट पर मोदी के खिलाफ कांग्रेस के यतीन ओझा को उतारा गया। 2007 के चुनाव में मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने सीनियर नेता दिनशा पटेल की बाजी खेली और 2012 के चुनाव में मोदी सरकार के खिलाफ आए आईपीएस संजीव भट्ट की पत्नी को कांग्रेस की टिकट दी गई। परंतु तीनों चुनाव में मोदी के विजयरथ को रोकने के लिए कांग्रेस प्रत्याशी लगातार विफल साबित हुए।

लोकसभा चुनाव में केजरीवाल और मधुसूदन मिस्त्री को बड़े मार्जिन से हराया
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री के रूप में घोषित करने के बाद मोदी ने दो सीटों गुजरात की वडोदरा और उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से चुनाव लड़ा। वडोदरा सीट से उनके खिलाफ कांग्रेस के थिंक टैंक माने जाने वाले धुरंधर नेता मधुसूदन मिस्त्री थे। उधर वाराणसी में मोदी को ओपन चैलेंज देने वाले आप आदमी के अरविंद केजरीवाल थे परंतु मोदी की ज्वाला इतनी प्रचंड थी कि मिस्त्री और केजरीवाल उनके सामने टिक नहीं पाए।

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