पुलिस ने उपवास करने आए शिल्पी शिवान समेत अध्यापक नेताओं को खदेड़ा

Tuesday, October 3, 2017

भोपाल। गांधी जयंती पर मिंटो हाल परिसर में उनकी प्रतिमा के सामने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अध्यापकों को पुलिस ने पहले तो खदेड़ा। जब अध्यापक नहीं माने तो उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर शाहजहांनी पार्क लेकर गई। शाम 5 से 7 बजे तक उन्हें पुलिस सुरक्षा में रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया। महिला अध्यापकों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए हैं। अध्यापक संघर्ष समिति के मनोहर दुबे ने बताया कि प्रदेश भर के ढाई लाख से अधिक अध्यापकों के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। छठवां वेतनमान तो दे दिया है, लेकिन विसंगतियों को दूर नहीं किया। 

शिक्षक को छठवें वेतनमान के बाद 60 से 70 हजार रुपए वेतन मिल रहा है, जबकि अध्यापकों को 30 हजार रुपए भी नहीं दिए जा रहे हैं। अनुकंपा नियुक्ति, पेंशन की कोई सुविधा नहीं है। शिक्षा विभाग में संविलियन की सालों पुरानी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। इन्हीं मांगों को लेकर भोजपुर शिव मंदिर से अध्यापकों ने रैली निकाली थी। 

सोमवार को गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद सामूहिक उपवास शुरू करने वाले थे। लेकिन पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ दिया। समिति की शिल्पी शिवान, कीर्ति झा, मुक्ति राय, हीरानंद नरवरिया, भारत भार्गव ने बताया कि सरकार अध्यापकों के साथ भेदभाव कर रही है। इसी का नतीजा है कि गांधी जयंती पर शांतिपूर्वक उपवास के दौरान पुलिस ने धक्का-मुक्की की और आरोपियों की तरह दो घंटे पुलिस सुरक्षा में रखा।

सरकार के खिलाफ संभाग स्तर पर खोलेंगे मोर्चा
अध्यापक संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि लंबित मांगों का निराकरण कराने और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ अब संभाग स्तर पर मोर्चा खोला जाएगा। उसके बाद प्रदेश स्तर पर बड़ी रैली करेंगे। सरकार नहीं मानी तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पुलिस ने धक्का-मुक्की की
मेरे साथ पुलिस के जवानों ने धक्का-मुक्की की। सभी महिलाओं के साथ यह व्यवहार किया गया। हमें अपराधियों की तरह पुलिस के वाहनों में ठूंसा गया। जबकि हम शांतिपूर्वक उपवास करना चाहते थे।
फातिमा बानो, अध्यापक

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सरकार परेशान कर रही
हम तो शांतिपूर्वक उपवास करना चाहते थे। हमें सरकार परेशान कर रही है। छठवां वेतनमान दिया, वह भी विसंगतिपूर्ण। सातवें वेतनमान का पता नहीं है। कई अध्यापक बिना सुविधाओं के रिटायर हो गए।
मनोहर दुबे, सदस्य अध्यापक संघर्ष समिति

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