आधा सत्र बीता, अब तक नहीं हो पाई अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां

Wednesday, October 4, 2017

सीधी। सरकारी स्कूलों के लिए बेहतर शिक्षा नीति बनाने और गुणवत्ता सुधारने में नाकाम स्कूल शिक्षा विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति में लगा है। जमीनी हकीकत यह है कि शिक्षा सत्र के तीन महीने बीत गए हैं, लेकिन अभी तक रिक्त पदों के एवज में जिले मे 4 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। हर हफ्ते नए आदेश-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय ने अतिथि शिक्षकों से आवेदनों के सत्यापन की तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 10 अक्टूबर कर दी है। स्कूलों में शिक्षक नहीं होने की वजह से शैक्षणिक काम पूरी तरह से ठप है। 

जिलाध्यक्ष रविकांत गुप्ता ने बताया कि आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय नीरज दुबे ने पिछले हफ्ते जारी निर्देश पत्र में कहा है कि अतिथि शिक्षकों के लिए 2.11 लाख से ज्यादा ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। जबकि शेष आवेदनों का 10 अक्टूबर तक सत्यापन किया जाएगा। लाखों आवेदनों में से 65 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षकों को प्रदेश भर के स्कूलों में रखा जाएगा। खास बात यह है कि शिक्षण सत्र के जुलाई, अगस्त एवं सितंबर महीने बीत चुका है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कब तक होगी। जबकि फरवरी के बाद परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं और शिक्षण कार्य बंद हो जाता है। तब अतिथि शिक्षकों को बाहर कर दिया जाता है। स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के चलते दो साल पहले बंद की गई ज्ञान पुंज योजना फिर शुरू कर दी है। जिसके तहत 9 शिक्षक मॉनीटरिंग के लिए जिले में तैनात रहते हैं। 

उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2013 के बाद  कई नए स्कूल खोले गए, लेकिन एक भी शिक्षक की भर्ती नही हुई। अधिकांश स्कूल अतिथियों के भरोसे हैं। अतिथि शिक्षकों को प्राथमिक स्कूल में 100  रुपए, माध्यमिक शाला में 150 रुपए एवं हायर सेकंडरी स्कूल में 180 रुपए रोजाना का मानदेय मिलता है। 

भर्ती प्रक्रिया कोई अता-पता नहीं
अतिथि शिक्षकों की भर्ती का कोई अता-पता नहीं है। पहली बार ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई है, लेकिन 3 महीने बीतने के बाद भी नियुक्ति नहीं हो पाई। कब नियुक्ति नहीं हो पाई। कब नियुक्त होंगे, क्या नियम हैं। कैसे कोर्स पूरा होगा। कुछ पता नहीं है।  अभी तक अतिथि शिक्षक गांव या घर के नजदीक के स्कूल में पढ़ाने जाते थे। अब नई नीति से कैसे पोस्टिंग होगी। कोईअता-पता नहीं है। यदि किसी को दूर भेजा तो पढ़ाने जाएगा या नहीं। 

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