कब करें दीपदान की हर मनोरथ पूरा हो जाए

Tuesday, October 10, 2017

प्राचीन काल से वर्षा ऋतु में संत साधु गांव या नगर मे चातुर्मास के लिये रुकते थे जिससे उनके ज्ञान, तप तथा आद्यात्म का लाभ सभी लोगों को मिलता था। जिससे वे अपना आत्मिक विकास करते थे। हिंदु मास में कार्तिक मास को चतुर्मास का अंतिम मास माना जाता है। इस माह मे भजन पूजन तथा दान का विशेष महत्व माना जाता है। पूरे संसार का व्यापार व्यवहार लक्ष्मी नारायण की कृपा पर ही चलता है। बिना लक्ष्मी के संसार की कल्पना रेगिस्तान मे जहाज चलाने के समान है। एक तरह से यह मायावी जगत महालक्ष्मी के अनुसार ही गति करता है। महालक्ष्मी भगवान विष्णु को चरण सेविका है। जिनपर लक्ष्मी नारायण की कृपा है वे ही इस संसार मे सम्माननीय है। कार्तिक मास मे विष्णु लक्ष्मी का शास्त्रौक्त पूजन करने से दरिद्रता नष्ट होती है तथा समृद्धि आती है।

दीपदान का विशेष महत्व
कार्तिक मास मे दीपक का विशेष महत्व है। कार्तिक मास मे आकाशमंडल का सबसे बड़ा प्रकाशक ग्रह सूर्य अपनी नीच राशि तुला की ओर गमन करता है। जिससे जीवन मे जड़ता तथा अंधकार की वृद्धि होती है। इसीलिये इस पूरे मास दीपक के प्रकाश, जप, दान तथा स्नान का विशेष महत्व रहता है, ये सब करने से जातक पर लक्ष्मी नारायण की कृपा होती है।

शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा मे दीपदान का महत्व
कहते है दीपक प्रज्वलित करने से लक्ष्मी मां तथा सभी देवी देवताओं प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। जब सूर्य ग्रह अपनी नीच राशि पर जाते है उस समयावधि मे जल, शयन कक्ष, तुलसी तथा मंदिर मे दीपक लगाना सौभाग्य तथा लक्ष्मी की वृद्धि मे परम सहायक होता है। कहते है शाम और सुबह सूर्य के अभाव मे जहां दीपक का प्रकाश होता है वहां देवताओं का वास होता है।

तुलसी माहात्म्य
तुलसी भगवान विष्णु को परम प्रिय है तुलसी पवित्रता तथा भगवान विष्णु की कृपा की परम कारक है। कार्तिक मास की एकादशी के दिन भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं। इस दिन तुलसी विवाह भी सम्पन्न किया जाता है। इसलिये कार्तिक मास मे तुलसी सेवा विष्णु कृपा प्राप्ति के लिये सर्वश्रेष्ठकार्य है। इसके अलावा दीपदान से महालक्ष्मी तथा सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

इन चीजो का रखे ध्यान
कार्तिक मास मे वर्षा ऋतु के पश्चात नदियों का जल स्थिर हो जाता है। इस समयावधि मे पृथ्वी के जल मे दिव्यता का वास रहता है। इस समय नदी सरोवर मे दीपदान स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस पूरे मास मे ब्रम्हा मुहूर्त मे नदियों मे स्नान जप तप दान अनंत गुना फल देता है।
इस मास ब्रह्मचर्यव्रत का पालन करना चाहिये।
मांस मदिरा का खानपान तो दूर उसका चिंतन भी नही करना चाहिये।
इस माह मे दाल का सेवन नही करना चाहिये।
कार्तिक मास विष्णुलक्ष्मी कृपा प्राप्ति के लिये श्रेष्ठ मास है अपनी दरिद्रता, दुर्भाग्य तथा दुर्दिनों से छुटकारा पाना है तो कार्तिक मास ब्रम्हामुहूर्त मे स्नान, नदी मे दीपदान तथा तुलसी मे दीपक अवश्य लगाये।
*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*
9893280184,7000460931

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