जय अमित शाह मामले में बावरिया ने जांच के 6 प्रमुख बिन्दु प्रस्तुत किए, चौहान बोले मानहानि ठोकुंगा

Tuesday, October 10, 2017

भोपाल। अभा कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं मध्यप्रदेश के प्रभारी दीपक बावरिया ने आज भोपाल में मीडिया को संबोधित करते हुए अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने 6 प्रमुख प्रश्न प्रस्तुत किए हैं एवं उन्होंने प्रस्तुत किए गए बिन्दुओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इसके जवाब में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए बावरिया के खिलाफ भी मानहानि का मामला ठोकने का ऐलान किया है। ​पढ़िए बावरिया ने जय अमित शाह पर क्या क्या आरोप लगाए। 

जादू की वो कौन सी छड़ी थी
टेंपल इंटरप्राईज प्रा. लि. जो कि श्री अमित शाह की धर्मपत्नी, पुत्रवधू व पुत्र- श्री जय शाह की कंपनी है, ऐसा क्या व्यापार करती थी जो साल के भीतर भीतर 16000 गुना कारोबार बढ़ा रही थी? इसमें क्या संपत्तियां थीं, कितने कर्मचारी थे, क्या देनदारी थी व इन सबका पैसा कहां से आ जा रहा था? और जादू की वो कौन सी छड़ी थी, जिससे साल 2012-13 व 2013-14 में नुकसान कमाने वाली कंपनी ने भाजपा सरकार बनने के एक साल के भीतर 16000 गुना कारोबार बढ़ा लिया?

1 कमरे के आॅफिस का किराया 80 लाख रुपए कैसे
ऐसा क्या कारण था कि 16000 गुना बढ़े कारोबार वाली इस कंपनी, यानि टेंपल इंटरप्राईज प्रा. लि., को अक्टूबर, 2016 में नुकसान दिखा बंद करने की नौबत आ गई? क्या आयकर विभाग की जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वो ऐसी संदिग्ध स्थिति में बंद होने वाली कंपनी की नोटिस दे जांच करते? जनता यह भी जानना चाहती है कि इस उक्त कंपनी के एक कमरे के कार्यालय में ऐसी क्या विलासितापूर्ण वस्तुऐं व सुविधाएं थीं कि उसका किराया 80 लाख रु. दिखाया गया ?

विदेशों से 51 करोड़ रुपए क्यों आए 
श्री अमित शाह के पुत्र, श्री जय शाह की कंपनी, टेंपल इंटरप्राईज़ प्रा. लि. के खातों में यह भी दर्शाया गया है, कि 51 करोड़ रु. की राशि विदेशों से आई है। जनता जानना चाहती है कि ऐसी कौन सी खरीद फरोख्त या व्यवसाय किन-किन देशों में किया गया, जिससे करोड़ों रुपया विदेश से कंपनी के खाते में आया? क्या करोड़ों की राशि विदेश से कंपनी के खाते में आने पर किसी सरकारी एजेंसी के कान नहीं खड़े हुए व कभी कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई? 

जय शाह की कंपनी को लोन देने वाली कंपनी का अंबानी कनेक्शन
ऐसे क्या कारण थे कि श्री अमित शाह के पुत्र, श्री जय शाह की कंपनी, टेंपल इंटरप्राईज प्रा. लि. को केआईएसएफ फाईनेंशियल सर्विसेस द्वारा 15.78 करोड़ रु. का ‘अनसिक्योर्ड लोन’ दिया गया। स्मरण रहे के केआईएफएस फाईनेंशियल सर्विसेस के मालिक, श्री राजेश खंडवाला हैं, जो अंबानी समूह के गुजरात के कर्ता-धर्ता, श्री परिमल नथवानी के समधी हैं। संयोग से श्री परिमल नथवानी को राज्य सभा में भाजपा की मदद से, वो भी झारखंड से, दूसरी बार चुना गया है। सार्वजनिक पटल पर यह जानकारी भी है कि केआईएफएस फाईनेंशियल सर्विसेस को शेयर व्यापार में ‘सेबी’ द्वारा चेतावनी भी दी गई और व्यापार करने पर भी रोक लगाई गई। जनता का प्रश्न यह है कि क्या श्री राजेश खंडवाला को इस अनसिक्योर्ड लोन के एवज में कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष राहत या फायदा प्राप्त हुआ या फिर यह सारा कर्जा, सिर्फ एक प्रेमभरी समाजसेवा थी? प्रश्न यह भी उठता है कि क्या श्री अमित शाह के पुत्र की कंपनी के अलावा भी ऐसे अनसिक्योर्ड लोन केआईएफएस फाईनेंशियल सर्विसेस द्वारा किसी और कंपनी को भी दिए गए, क्योंकि उनकी बैलेंस शीट में ऐसी कोई जानकारी नहीं दिखती? तो यह उपकार श्री जय शाह की कंपनी पर ही क्यों ?

6.20 करोड़ की संपत्ति गिरवी के बदले 25 करोड़ का लोन कैसे
अब दूसरी कंपनी-कुसुम फिनसर्व प्रा.लि. की बात करें, जिसे बाद में एलएलपी में बदला गया। यह भी श्री अमित शाह के पुत्र, श्री जय शाह की कंपनी है। उक्त कंपनी को कालूपुर कमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक द्वारा 25 करोड़ का ऋण महज 6.20 करोड़ की दो संपत्तियों को गिरवी रख दिया गया। एक संपत्ति श्री अमित शाह की मल्कियत है और दूसरी, श्री यशपाल चुदासमा की। 

कौन है यशपाल चुदासमा
यह वही यशपाल चुदासमा हैं जिन्हें सीबीआई द्वारा सोहराबुद्दीन व कौसर बी. फर्जी एनकाउंटर केस में आरोपित किया गया था, व साल 2015 में सीबीआई कोर्ट ने इन्हें व श्री अमित शाह को बरी कर दिया। देश की जनता रिज़र्व आरबीआई से पूछना चाहती है कि क्या आरबीआई व बैंक के नियम इस बात की अनुमति देते हैं कि मात्र 6.20 करोड़ की संपत्ति पर 25 करोड़ का ऋण दिया जा सके? क्या इन्हीं उदार शर्तों पर कालूपुर बैंक द्वारा ऐसा ऋण अन्य किसानों व छोटे व्यवसायियों को भी दिया गया है या फिर मापदंड अलग अलग हैं ? 

मंत्री पीयूष गोयल ने क्यों दिलाया सस्ता लोन
श्री अमित शाह के बेटे श्री जय शाह की कंपनी, कुसुम फिनसर्व की अनोखी दास्तां यहीं समाप्त नहीं होती। इस कंपनी का प्राथमिक धंधा तो शेयर व्यापार व आयात-निर्यात का है। 2014 में मोदी सरकार बनने व श्री पीयूष गोयल के केंद्रीय बिजली मंत्री बनने के बाद, इस कंपनी ने 2016 में पवन चक्की (विंडमिल) द्वारा 2.1 मेगावॉट बिजली उत्पादन का प्लांट भाजपा शासित मध्यप्रदेश के रतलाम में लगाने का निर्णय लिया। बिजली मंत्रालय के रिन्यूएबल एनर्जी के तहत मिनी रत्न संस्था (IREDA) द्वारा 10.35 करोड़ का ऋण भी जय शाह की कंपनी को दे दिया गया। देश जानना चाहता है कि वो ऐसे कौन से मापदंड हैं, जिनके तहत शेयर व आयात निर्यात का धंधा करने वाली कंपनी, जिसे बिजली उत्पादन का रत्ती भर भी अनुभव नहीं था, भारत सरकार द्वारा सस्ते ऋण के योग्य पाया गया ? 
देश यह भी जानना चाहता है कि रतलाम में लगाए जाने वाले पवन ऊर्जा प्लांट की मौके पर वस्तुस्थिति क्या है? देश तो यह भी पूछ रहा है कि मौके पर ऐसा कोई पवन ऊर्जा प्लांट है भी या नहीं? क्या श्री पीयूष गोयल यह भी बताएंगे कि उनके मंत्रालय द्वारा बगैर तजुर्बे की कितनी कंपनियों को इस प्रकार सस्ते ऋण की सहायता दे, भाजपा शासित प्रदेशों में प्लांट लगावाए गए? क्या बेरोजगारी दूर करने का न्यू इंडिया में यह न्यू मॉडल है ?

जय शाह मामले में पीयूष गोयल क्यों भड़के
सबसे विचित्र घटना तो तब घटी तब भारत सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री, श्री पीयूष गोयल एक औचक प्रेस वार्ता में श्री जय शाह का बचाव करते दिखे। वो भी तब जब उनके खुद के मंत्रीकाल में ही उनके मंत्रालय द्वारा श्री जय शाह की कंपनी को करोड़ों रु. का सस्ता ऋण उपलब्ध करवाया गया था। सवाल यह उठता है कि क्या श्री जय शाह, मोदी मंत्रीमंडल में मंत्री हैं या फिर भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारी? यदि नहीं तो फिर क्यों भारत सरकार के मंत्री एक निजी व्यक्ति के बचाव में अकारण खड़े हैं? भाजपा के मंत्रियों ने कितने और लाभकर्ताओं व ऋण लेने वालों की ऐसी वकालत सार्वजनिक तौर पर की है ?

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