संविदा नीति 2017 योग्य बेरोजगारों की नौकरियां छीनकर नेताओं देने का षडयंत्र: कर्मचारी कांग्रेस

Sunday, October 8, 2017

भोपाल। मप्र कर्मचारी कांग्रेस ने शासन द्धारा मप्र के विभिन्न विभागों में संविदा नियुक्ति के संबंध मे दिनांक 28 सितंबर 2017 को बनाए गये नियमों को प्रदेश मे बेरोजगारी बढाने वाला तथा युवा बेरोजगार युवकों के हितों के विपरीत लिया गया निर्णय बताते हुऐ इस पर पुनर्विचार कर युवा बेरोजगारों के लिऐ रोजगार मूलक नीति बनाने की मांग राज्य शासन से की है। आज विंध्याचल भवन के प्रांतीय कार्यालय मे संगठन के अध्यक्ष वीरेंद्र खोंगल की अध्यक्षता मे पदाधिकारियों की बैठक हुई। 

मीटिंग में शासन द्धारा संविदा नियुक्त नियम 2017 के सभी बिन्दुओं पल गुणदोष के आधार पर विचार विमर्श किया गया। इस बैठक मे सुनिल ठाकरे, हीरालाल चोकसै, शोऐब सिद्धिकी, शशिकाले, राजेंद्र चोबे सहित विभागीय समितियों के अध्यक्षों ने अपने विचार व्यक्त किऐ। अपने संबोधन मे श्री खोंगल ने कहा कि ये नियम शासन द्धारा विभागों मे रिक्त पदों पर सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों एवं मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों के स्टाफ हेतु भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को नियुक्त देने के उद्देश्य से बनाऐ गऐ है। इससे युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने की संभावना और कम हो जाऐगी। 

एक ओर सरकार ने 35-40 वर्षों तक शासन की सेवा मे कार्य करते हुऐ भारी भरकम वेतन और सुविधाएं लेने वाले सेवानिवृत्त बुर्जुगों को संविदा पर पुनः पांच वर्षों के लिऐ नियुक्तियां देने निर्णय लिया है। वहीं दूसरी और प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवक रोजगार के अभाव मे भूखे रहने को विवश हैं। शासन के सभी विभागों मे विगत 30 वर्षों से नई नियुक्तिया प्रतिबंध है। सभी विभागों मे घटता अमला बढते काम की स्थिति बनी हुई है। 

उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 मे सरकारी की सिर्फ 17 योजनाएं क्रियान्वित थी जिनकी संख्या 2017 मे बढकर 86 हो गई है। ऐसी स्थिति मे सरकार को संविदा नियुक्ति की नीति को समाप्त कर प्रदेश के युवा बेरोजगारों को रोजगार देने की रोजगार मूलक नीति बनानी चाहिऐ।

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