100 युवा छोड़कर भाग गए मप्र पुलिस की नौकरी

Saturday, October 21, 2017

भोपाल। पुलिस में सिपाही के लिए भर्ती हुए 34 प्रतिशत युवा इंजीनियरिंग और पोस्टग्रेजुएट हैं। नौकरी की जरूरत के चलते ग्रेजुएट एवं पोस्टग्रेजुएट युवा पुलिस में बतौर सिपाही भर्ती हो रहे हैं। यह ट्रेनिंग तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बीच में ही नौकरी छोड़कर गायब हो जाते हैं। अच्छी नौकरी मिलने के कारण 100 सिपाही इस साल ट्रेनिंग बीच में छोड़कर चले गए। दरअसल, मप्र पुलिस की नौकरी उनकी प्राथमिकता थी ही नहीं। विकल्प मिलते ही वो भाग गए। 

मध्यप्रदेश पुलिस में सिपाही के लिए 2016 में 5800 पदों की भर्ती हुई थी। इसमें बतौर सिपाही भर्ती हुए 4575 लोगों ने ट्रेनिंग ज्वाइन की थी। प्रदेश के पीटीएस (पुलिस ट्रेनिंग स्कूल) में अप्रैल 2017 से सिपाहियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। जून तक तो ट्रेनिंग में सभी लोग शामिल थे। इसके बाद अचानक पुलिस की ट्रेनिंग से सिपाही जाने लगे। अब तक 90 सिपाही ट्रेनिंग छोड़ चुके हैं। इनमें से 13 महिला आरक्षक भी शामिल हैं।

वर्ष 2016 में सिपाही के लिए भर्ती हुए करीब 34 फीसदी युवा स्नातकोत्तर हैं। इनमें से कई युवा प्राइवेट कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर तो कई अन्य प्राइवेट नौकरी में चयनित हो गए। इसके चलते इतने लोगों ने पुलिस की नौकरी से तौबा कर ली।

इन सिपाहियों को उमरिया, रीवा, सागर, उज्जैन, तिगरा, पचमढ़ी और इंदौर पीटीएस में ट्रेनिंग दी जा रही थी। इन सभी ट्रेनिंग सेंटरों पर इस वक्त 4485 ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनमें से 704 महिलाएं ट्रेनिंग ले रही है। उनकी ट्रेनिंग इंदौर पीटीसी में चल रही है। जबकि 3871 युवक यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनमें से कुछ और छोड़कर जा सकते हैं।

नहीं करते फील्ड में ड्यूटी
अधिक पढ़े लिखे होने के कारण यह फील्ड के बजाए थाना या आफिस में ड्यूटी करना ज्यादा पसंद करते हैं। आफिस ड्यूटी के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और अच्छी नौकरी लगते ही पुलिस को पल्ला झाड़कर चले जाते हैं।
अधिक पढ़े लिखे होने से इनका वरिष्ठ अफसरों से तालमेल नहीं बैठ पाता है। ज्यादातर सीनियर ग्रेजुएट होते हैं। उच्च स्तर पर प्रमोशन कम होने से निचले स्तर पर प्रमोशन देरी से होते हैं।

युवाओं को पुलिस कठिन नौकरी लग रही है
सिपाही के लिए 34% युवा बीई या पोस्टग्रेजुएट भर्ती हो रहे हैं। कुछ युवा ट्रेनिंग छोड़कर चले गए हैं। इनमें से कई दूसरी नौकरी में चयनित हुए, इसलिए चले गए। जबकि कुछ को पुलिस की नौकरी कठिन लग रही थी। इस साल अब तक 100 नव आरक्षक नौकरी छोड़ चुके हैं। 
अशोक अवस्थी, एडीजी प्रशिक्षण

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