RGPV: एडमिशन के समय क्रेडिट सिस्टम था, डिग्री से पहले ग्रेडिंग सिस्टम क्यों कर दिया

Thursday, September 14, 2017

भोपाल। राजीव गांधी प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय भोपाल में बदले गए सिस्टम को लेकर आपत्ति जताई गई है। स्टूडेंट्स का कहना है कि जिनका एडमिशन क्रेडिट सिस्टम के तहत किया गया था उन पर ग्रेडिंग सिस्टम क्यों थोप दिया गया। यदि सिस्टम बदलना था तो नए एडमिशन के साथ बदलना जाना चाहिए था। जिन्होंने क्रेडिट सिस्टम में एडमिशन लिया है उनकी परीक्षाएं ग्रेडिंग सिस्टम के अनुसार करवाना अनुचित एवं अन्यायपूर्ण है। 

स्टूडेंट पंकज भट्ट ने भोपाल समाचार डॉट कॉम को ईमेल पर अपनी परेशानी लिखी है। वो लिखते हैं: 
नम्र निवेदन है कि में राजीव गांधी प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय भोपाल का छात्र हूं। तथा मैने वर्ष 2015 में इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था। उस समय मुझे choise based credit system के अंतर्गत एडमिशन हुआ था तथा उस समय सब क्रेडिट सिस्टम के ऊपर आधारित था। अतः उस समय प्रथम सेमेस्टर के बेकलॉग विषय की परीक्षा तृतीय सेमेस्टर में होनी थी। इसी प्रकार द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा चतुर्थ सेमेस्टर में देनी थी लेकिन प्रथम द्वितीय ओर तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा भी चतुर्थ सेमेस्टर में ली गई और चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा के बाद choies based credit system समाप्त करके choies based grading system लागू कर दिया गया। 

अब इसमें नया नियम लागू दिया गया कि जिस विद्यार्थी के प्रथम वर्ष में 5,0 से कम cgpa या अनुत्तीर्ण होने पर उसे तृतीय वर्ष में प्रवेश नही दिया जाएगा। यह नियम छात्रों के हित में नही था। पहले भी जब हमारे द्वितीय सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम आया सभी छात्रों के 3-4 विषयों में अनूतीर्ण कर दिया गया और कुछ दिन पश्चात वापिस रिजल्ट में कुछ संशोधन किया गया। जिससे आधे विद्यार्थी को उतीर्ण कर दिया गया। अतः यह बहुत गलत है विश्वविद्यालय में इस प्रकार की गलतियों का होना शोभा नही देता। 

मुझे इससे भी कोई परेशानी नही है लेकिन अगर यह बहुत ही गलत हुआ कि अगर cbgs सिस्टम अगर लगाना ही था। तो पहले ही लगा देते। यह बात बहुत दुर्भाग्य पूर्ण है कि अगर आज मेरे द्वितीय सेमेस्टर में बैक आयी है लेकिन उससे भी ज्यादा दुख मुझे इस बात का है कि मुझे द्वितीय सेमेस्टर बेकलॉग विषय की परीक्षा में फिजिक्स में 6 नंबर और इलेक्टिकल में 0 नंबर दिए गए। अब आप खुद ही सोचे कि कोई अनपढ़ गवार तो नही होगा जो प्रथम तृतीय ओर चतुर्थ समेस्टर में उतीर्ण हुआ हो और द्वितीय सेमेस्टर की परिक्षा में कुछ भी लिख कर नही आया हो। ओर मुझे इन दो विषयों में फैल करके सेमेस्टर बेक कर दिया गया। 

मुझे इस बात का दुख भी है कि हमे द्वितीय सेमेस्टर की अनुतीर्ण विषयों की परीक्षा देने का  देने का एक ही मौका मिला। यह संभवत गलत है क्योंकि पहले अगर प्रथम वर्ष में उतीर्ण नही होने पर तृतीय वर्ष में प्रवेश नही हो पाता था लेकिन उन विद्याथियों को अपने बेक लोग विषय निकलने के लिए तीन मोके अवश्य मिलते थे। जैसे कि प्रथम सेमेस्टर में अनुतीर्ण होने पर उसे द्वितीय तथा तृतीय सेमेस्टर में भी उसकी परीक्षा दे सकते थे लेकिन आज विश्वविद्यालय की गलतियों के कारण हमारा भविष्य खराब हो रहा है अतः मेरी आपसे बस एक निवेदन है कि हमे एक मौका ओर दे हमारे बेकलॉग विषय की परीक्षा देने का। क्योंकि विश्व विद्यालय की गलतियों के कारण विद्याथियों का भविष्य खराब होता है। अतः जल्द ही cbgs सिस्टम में कुछ बदलाव करने चाहिए।
धन्यवाद

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