PROPERTY के दाम और घटेंगे, नीति आयोग ने मोदी सरकार को दिए टिप्स

Saturday, September 2, 2017

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबको आवास का वादा किया है। सरकार 'हाउजिंग फॉर ऑल' योजना चला रही है परंतु नीति आयोग ने इसके अलावा भी कुछ सुझाव दिए हैं। नीति आयोग का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में कुछ इस तरह के बदलाव किए जाने चाहिए ताकि प्रॉपर्टी के दाम घटें और कम सामान्य घर मिडिल क्लास की रेंज में आ जाए। नीति आयोग ने रियल एस्टेट सेक्टर में ब्लैकमनी पर कड़ा हमला करने का सुझाव भी दिया है। साथ ही स्टेंप ड्यूटी कम करने को कहा है। 

पत्रकार महेन्द्र के सिंह की रिपोर्ट के अनुसार 'हाउजिंग फॉर ऑल' यानी सबके लिए घर को संभव बनाने के लिए नीति आयोग ने केंद्र सरकार को नया प्लान बताया है। घर को किफायती बनाने के लिए सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग ने सुझाया है कि केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिल स्टैंप ड्यूटी को कम करने के अलावा लैंड सीलिंग ऐक्ट में फंसी जमीन को भी रिलीज कराना चाहिए। 

नीति आयोग का कहना है कि स्टैंप ड्यूटी कम करने से राज्यों को होने वाले घाटे के लिए केंद्र सरकार उन्हें कॉम्पेंसेट करे। आयोग ने अपने तीन साल के ऐक्शन प्लान में बताया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में ब्लैक मनी के लगने से ही जमीन के रेट काफी बढ़े रहते हैं। आयोग ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में ब्लैक मनी लगे होने का एक कारण स्टैंप ड्यूटी का ज्यादा होना भी है। आयोग ने कहा, 'जमीन की कीमतें गिराने के लिए ब्लैक मनी पर हमला जरूरी है जिससे हाउजिंग को कम कमाने वाले परिवारों के लिए भी किफायती बनाया जा सके।' 

आयोग के प्लान में कहा गया है कि स्टैंप ड्यूटी कम करने से मजबूत प्रॉपर्टी मार्केट बन पाएगा साथ ही ब्लैक मनी का फ्लो भी कम हो जाएगा। आयोग का कहना है कि ऐसे राज्य जहां स्टैंप ड्यूटी ज्यादा है वहां रेवन्यू के बढ़ने की काफी उम्मीद है क्योंकि ड्यूटी घटाने से ज्यादा लोग कानूनी तरीके से ट्रांजैक्शंस करेंगे। गुजरात ने स्टैंप ड्यूटी को 5 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत कर लिया और नुकसान को पूरा करने के दूसरे तरीके खोज लिए। 

स्टैंप ड्यूटी के अलावा आयोग ने अर्बन सीलिंग ऐक्ट को भी जमीन का रेट हाई होने का एक कारण बताया। आयोग ने कहा कि अर्बन सीलिंग ऐक्ट की वजह से प्रॉपर्टी के रेट हाई रहते हैं क्योंकि खाली जमीन का काफी हिस्सा प्रॉपर्टी मार्केट से गायब होता है। हालांकि कई राज्यों ने इस कानून को खत्म कर दिया है, लेकिन कई राज्यों में जमीन का काफी हिस्सा कानूनी पेचों में फंसा हुआ है। ऐसे लैंड को खाली करा कमर्शल यूज में लाने प्राथमिकता होनी चाहिए। 

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