पंचायत सचिव: जुलानिया के जुल्म पर HIGH COURT का स्टे

Tuesday, September 19, 2017

भोपाल। पंचायत सचिवों पर ढहाए जा रहे जुलानिया के जुल्म पर हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है। जी हां, मामला पंचायत सचिवों के वेतन का है जो ना केवल 5300 रुपए प्रतिमाह कम कर दिया गया है बल्कि उनके खातों से 53000 रुपए की वसूली प्रक्रिया भी शुरू हो गई है परंतु अब इस मामले में याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट से स्टे मिल गया है। अब हाईकोर्ट फैसला करेगा कि जुलानिया का आदेश सही है या इससे पहले हुआ फैसला सही था। 

पंचायत सचिवों को 2013 विधानसभा चुनाव के पूर्व पंचायत सचिवों को रिझाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा एवम केबिनेट के निर्णय के परिपालन में तत्कालीन एसीएस अरुणा शर्मा ने म.प्र.शासन पंचायत एवम ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय, भोपाल के आदेश क्र. एफ-2।9।2013/22।P-1 भोपाल,दिनांक 24/07/2013 में स्पस्ट आदेशित किया था 10 वर्ष से कम सेवा वाले पंचायत सचिवों को वेतनमान 3500-10,000+ग्रेड पे-1100 एवम 10 वर्ष से अधिक सेवा पूर्ण कर चुके पंचायत सचिवो को वेतनमान 3500-10,000+ग्रेड पे-1200 देय होगा। आदेश में 18 साल का चार्ट देकर वेतन की गणना कैसे किया जाए समझाया गया था।

चूंकि 1995 में सर्वप्रथम पंचायत सचिवों की नियुक्ति हुई यही इसलिए आदेश दिनांक को 2013 में 18 साल ही अधिकतम हो सकते थे, शायद इसीलिए 18 साल का चार्ट दिया गया था। कुछ जिलो में 10 वर्ष से अधिक सेवा पूर्ण कर चुके पंचायत सचिवों के वेतन निर्धारण में भ्रांतियां हो रही थीं इसलिए तत्कालीन पंचायत आयुक्त रघुवीर श्रीवास्तव ने जनपद पंचायतों के मुख्यकार्यपालन अधिकारियों को पत्र क्र./प.रा./बजट/2015-16/9533 भोपाल, दिनांक 19.06.2015 जारी करके 10,12,14 एवम 16 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके पंचायत सचिवों को कितना वेतन मिलेगा।

किन्तु ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस राधेश्याम जुलानिया द्वारा 03 अगस्त 2017 को आदेश जारी करके पंचायत सचिवों की वेतन की गणना 01/04/2017 से करने के निर्देश दिए गए है, जिससे किसी भी सचिव भी सेवा 10 वर्ष भी पूरी नही हो रही है, यानि पूर्व के सारे आदेशों को दरकिनार करके 1995 से 2008 तक कि सेवा शून्य कर दी गई। साथ ही वेतन का निर्धारण स्थानीय निधि संपरीक्षा से कराए जाने के निर्देश भी दिए गए है, जिसके साथ पंचायत सचिवों से वचनपत्र (UNDERTAKING) भी भरवाये जा रहे हैं, जो पंचायत सचिव वचनपत्र में हस्ताक्षर नही कर रहे है, उन्हें वेतन रोकने का रॉब दिखाकर जबरन हस्ताक्षर करने हेतु दबाब बनाया जा रहा है।

विभाग के आदेश से परेशान होकर पंचायत सचिव संगठन के जबलपुर संभाग अध्यक्ष मनीष मिश्रा एवम अन्य 07 पदाधिकारियो ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका लगाई। जिस पर 18 सितंबर 2017 को जस्टिस मिस वंदना कासरेकर ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं वेतन कटौती में स्थगन आदेश जारी कर दिया। साथ ही सुनवाई पूरी होने तक पूर्वानुसार वेतन भुगतान करने आदेश शासन को दिए गए एवम प्रकरण में 04 सप्ताह के भीतर जबाब देने हेतु शासन को नोटिस जारी किया गया। पंचायत सचिवों की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पैरवी की।

पंचायत सचिव संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा का कहना है- " पंचायत सचिव संगठन ने एसीएस राधेश्याम जुलानिया को हटाने सहित अपनी 08 सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए हड़ताल की थी, जिससे व्यथित होकर बदले की भावना से एसीएस द्वारा लगातार ऊल जुलुल आदेश जारी करके 23 हज़ार पंचायत सचिवों के परिवारों को आर्थिक एवम मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है, हमारे भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

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