सिपाही को चांटा मारने वाली महिला जज के खिलाफ FIR दर्ज

Saturday, September 23, 2017

देहरादून। पुलिस थाने में आकर हंगामा करने एवं एक सिपाही को चांटा मारने वाली महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। महिला उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) है अत: प्रकरण दर्ज करने से पहले हाईकोर्ट से इसकी अनुमति ली गई। मामला देहरादून के प्रेमनगर थाने में दर्ज किया है। उत्तराखंड पुलिस इसे एतिहासिक कार्रवाई मान रही है। इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले में किसी भी प्रकार के दवाब को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि जया पाठक उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में फेमिली कोर्ट में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) के पद पर नियुक्त हैं। बीते 12 सितंबर को महिला जज अपने बेटे के विवाद के सिलसिले में प्रेमनगर थाने पहुंची थीं जो देहरादून के एक प्राइवेट संस्थान में पढ़ाई कर रहा है। उसका अपने कॉलेज के साथियों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। जिसके लिए महिला जज दूसरे पक्ष की गिरफ्तारी के लिए जबरदस्ती कर रही थी। पुलिस की मानें तो बिना बात को समझे जज ने थाने पहुंचकर पहले तो जमकर हंगामा किया और फिर पुलिसकर्मियों से मारपीट भी की।

आरोप है कि इसी दौरान महिला ने प्रेमनगर थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों को गाली गलोच कर धमकी दे डाली। इस दौरान जब थाने के एक सिपाही द्वारा महिला जज का वीडियो बनाया जा रहा था तो उसने कांस्टेबल को थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही नहीं इस घटना के बाद जब एसएचओ प्रेमनगर नरेश सिंह राठौड़ ने महिला को रोकने की कोशिश की तो महिला ने थानेदार के साथ भी गाली गलोच शुरू कर दी। मामले को बढ़ता देख मौके पर सभी बड़े अधिकारी पहुंच गए।

क्या कहती है पुलिस
फिलहाल महिला जज पर सरकारी कार्य मे बाधा पहुंचाना, गाली गलौच करना और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज हुआ है। इस मामले की जांच के लिए किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। जिससे किसी भी दवाब में आये बिना जांच को आगे बढ़ाया जाए। एसएचओ नरेश सिंह राठौड़ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पहले महिला को बहुत समझाने की कोशिश की गई लेकिन बिना अपना परिचय दिए ही उक्त महिला ने गाली के साथ ही सिपाही से मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने पर उनपर भी हाथ उठाने की कोशिश की। उनका कहा है कि मुकदमा दर्ज करने को लेकर हाईकोर्ट की परमिशन के बाद कहीं न कहीं पुलिस का मनोबल और कानून के प्रति सम्मान बढ़ा है।

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