DEO को हाईकोर्ट का नोटिस, 3 माह में सहायक शिक्षक का प्रकरण खत्म करो नहीं तो..

Sunday, September 24, 2017

नीमच। माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में सेवानिवृत सहायक शिक्षक श्रीमती रूक्मण वर्मा के नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान हेतु दायर याचिका क्रमांक 8234/15 पर पारित निर्णय दिनांक 08/12/2015 का पालन न करने पर तात्कालिक प्रमुख सचिव म.प्र. शासन  स्कूल  शिक्षा विभाग श्री एसआर मोहंती, श्री आरती शर्मा संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन उज्जैन,  जिलाकोषालय एवं शिक्षा  अधिकारी द्वय श्रीपद्मकुमार प्रजापति व बीएस पटेल के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में पुनः अवमानना प्रकरण क्रमांक 540/16 दर्ज किया गया जिसकी पैरवी अधिवक्ता श्री एसआर पोरवाल ने की।

मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि शिक्षा विभाग में माननीय न्यायालय की अवमानना से मुश्किलें खड़ी हो गई है। हाल ही में अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण में एक जिला शिक्षा अधिकारी को निलंबित किया गया है। श्रीमती वर्मा के प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी मंदसौर ने न्यायालयीन आदेश के विपरीत श्रीमती वर्मा का अभ्यावेदन निरस्त करने पर अवमानना दायर की गई थी जिस पर माननीय न्यायालय ने दिनांक 09/09/2017 को अपने आदेश से जिला शिक्षा अधिकारी मंदसौर को फटकार लगाते हुए कहा कि तीन महीने में नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान दिया जावे नहीं तो 5000/- क्लेम भी देना होगा। 

अपने आदेश में माननीय न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर 930/2008 म.प्र. शासन विरुद्ध पंकज सक्सेना पर पारित आदेश दिनांक 19/02/2015 के प्रकाश में आयुक्त म.प्र. लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक श्री एके दीक्षित ने दिनांक 13/05/2016 को  1973-74 से 1981-82 एवं 1995-96 से 1997-98 के बीच नियुक्त उप शाला शिक्षक/उप शिक्षक/सहायक शिक्षक को नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान देने के आदेश जारी किए है । 1982-83 से 1994-95 वालों को पूर्व में नियमित वेतनमान के आदेश दिए गए थे। आदेशों के आलोक में नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान दिया जाए नहीं तो 5000/-क्लेम भी देना होगा। 

कर्मचारी नेता कन्हैयालाल लक्षकार ने कहा कि प्रदेश भर में ऐसे समस्त सहायक शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से नियमित वेतनमान की पात्रता है जिनकी नियुक्ति 1973-74 से 1997-98(25 वर्षो की अवधि) अर्थात शिक्षाकर्मी भर्ती होने तक हुई थी। चाहे उन्होंने ने सीधे विद्यालय में या प्रशिक्षण संस्था में उपस्थिति दी हो। बशर्ते इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया हो।

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