मुसलमानों की वापसी रोकने लैंडमाइंस बिछा रही है म्यांमार सरकार

Thursday, September 21, 2017

ढाका/न्यूयॉर्क। म्यांमार की सरकार ने विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाएं देकर करीब 6 लाख मुसलमानों को म्यांमार से निकाल दिया है। इसमें से 4.20 लाख मुसलमान बांग्लादेश में हैं। पीएम शेख हसीना का कहना है कि म्यामांर ने अपने मुसलमानों की वापसी को रोकने के लिए सीमा पर लैंडमाइंस बिछा दिए हैं। पीएम हसीना संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में हैं। उन्होंने बांग्लादेशी कार्यकर्ताओं से कहा, 'म्यांमार सरकार से हम बार-बार कह रहे हैं कि वह बांग्लादेश आए अपने 4,20,000 रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस बुलाए लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही। उलटा म्यांमार सेना बॉर्डर पर लैंडमाइंस बिछा रही है, ताकि देश से पलायन कर गए रोहिंग्या कभी वापस न आ सकें।' हसीना ने कहा, 'रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार के नागरिक हैं। इन्हें वापस लेना ही होगा। उनको सुरक्षा और शरण देनी होगी। उनका उत्पीड़न रोकना होगा।

वो मुस्लिम हैं, उन्हें एक अलग नाम देने की क्या जरूरत
मंगलवार को म्यांमार की नेता आंग सान सू की ने कहा था कि वह वेरिफिकेशन के बाद रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस लेने को तैयार हैं। हालांकि उनके इस बयान को शक की नजर से देखा जा रहा है। क्योंकि उन्होंने यह भी कहा था, 'मैं रोहिंग्या मसले पर किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव से नहीं डरती। अपनी स्थिति के लिए रोहिंग्या खुद जिम्मेदार हैं।' दूसरी ओर सू की द्वारा अपने भाषण में रोहिंग्या शब्द का इस्तेमाल न किए जाने पर भी सोशल मीडिया में सवाल उठ रहे हैं। इसके जवाब में सू की ने बुधवार को कहा, 'मैं मुसीबत के ऐसे दौर में किसी भावनात्मक शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहती थी। इसलिए उन्हें मुस्लिम ही कहना ठीक है। वे मुस्लिम ही हैं जो रखाइन राज्य में रहते हैं। तो उन्हें एक अलग नाम देने की क्या जरूरत है।

दूसरी ओर म्यांमार से बांग्लादेश के सीमाई इलाकों में गए 4,20,000 रोहिंग्या शरणार्थियों को भारी बारिश का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मदद करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने ज्यादा सैनिकों को उन इलाके में तैनात किया है। बांग्लादेश सरकार ने कहा, 'सैनिक शरणार्थियों के लिए टेंट लगाने और टॉयलेट बनाने में मदद करेंगे। क्योंकि हजारों शरणार्थी भारी बारिश में भी खुले में रह रहे हैं।'

तस्लीमा ने कहा: भारत को भी शरण देनी चाहिए
इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियों के बाद 20 साल से देश बाहर रह रही हैं लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा है कि सभी रोहिंग्या मुस्लिम आतंकी नहीं हैं। अगर बांग्लादेश उन्हें रख सकता है तो भारत को भी उन्हें शरण देनी चाहिए। एक इंटरव्यू में तस्लीमा ने एआईएमआईएम के नेता व हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को कट्टरपंथी बताया। मालूम हो कि ओवैसी ने कहा था कि अगर तस्लीमा भारत में रह सकती हैं तो रोहिंग्या मुस्लिम भी रह सकते हैं।

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