BHOPAL: जबरन खाली कराया गया डबास का बंगला, कंवर और उमराव को भी नोटिस

Friday, September 22, 2017

भोपाल। शासन ने रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास का सरकारी बंगाल खाली करा लिया है। रिटायर होने के बाद उन्हे 6 माह तक इस बंगले में रहने की अनुमति दी गई थी परंतु उन्होंने इसे खाली नहीं किया। डबास का कहना है कि बहुत सारे बंगले नियम विरुद्ध दिए गए हैं लेकिन मुझे ही निशाना बनाया गया। अब मैं इसके खिलाफ जनहित याचिका लगाउंगा। बता दें कि डाबास कई बार शासन के खिलाफ कड़े तेवर दिखा चुके हैं, हालांकि अभी तक उन्होंने ऐसा कुछ उल्लेखनीय किया नहीं। 

डबास करीब डेढ़ माह से नियम विरुद्ध शिवाजी नगर स्थित इस बंगल में रह रहे थे। डबास के साथ-साथ गृह विभाग की संपदा शाखा ने मप्र मानव अधिकार आयोग के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र मोहन कंवर और आईएएस अधिकारी एवं होशंगाबाद कमिश्नर उमाकांत उमराव को भी बंगला खाली करने का नोटिस दे दिया है। कंवर को दिए नोटिस में स्पष्ट कर दिया गया है कि बंगला खाली नहीं किया जाता है तो सितंबर माह से 30 हजार रुपए प्रतिमाह किराया वसूला जा सकता है। 

इस बीच डबास ने लिंक रोड नंबर एक के किनारे शिवाजी नगर नगर के मकान को खाली करने के बाद कहा है कि मैंने सरकार से छह माह का और समय मांगा था, क्योंकि मेरे निजी मकान का काम पूरा नहीं हुआ था। सुनवाई नहीं हुई, इसी कारण मानव अधिकार आयोग में आवेदन दिया था। बावजूद इसके बंगला खाली किया है। यह पक्षपातपूर्ण है। कई संस्थाओं को अनधिकृत तौर पर मकान दिए गए हैं। मैं इस बारे में अदालत में जनहित याचिका लगाऊंगा। 

डबास ने सरकारी बंगले का फिर से मांगा था आंवटन 
बताया जा रहा है कि डबास जनवरी 2017 में रिटायर हो चुके हैं। वे सिस्टम परिवर्तन नाम से संस्था भी चलाते हैं, जिसके नाम पर ही फिर से सरकारी बंगले का आवंटन मांगा गया था। आयोग में डबास ने आवेदन दिया था कि 66 से अधिक राजनेताओं, अधिकारियों और संस्थाओं को पात्रता न होने के बाद भी आवास आवंटित है। 

पति-पत्नी के नाम से दो आवास 
कंवर के पास चार ईमली में बी-16 बंगला है। आयोग में उनका कार्यकाल 31 अगस्त को पूरा हो गया। जबकि इसके पहले ही फरवरी 2017 को उनकी पत्नी ने प्रोफेसर के नाम से चार ईमली में ही डीएक्ससी-5 बंगले का आधिपत्य ले लिया। इसके बाद भी पति-पत्नी के नाम से दो आवास रहे। 

बाजार दर से दें किराया 
उमाकांत उमराव के पास भी चार ईमली में ही स्थित शासकीय बंगला है। यह एक साल से उनके पास अनधिकृत रूप से है। गृह विभाग ने उन्हें भी साफ कर दिया है कि बंगला खाली करें या बाजार दर से किराया दें। 

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