शनिदेव की शरण में पहुंचे नरोत्तम मिश्रा, नियमों का उल्लंघन कर आए

Sunday, September 10, 2017

भोपाल। चुनाव आयोग द्वारा अयोग्य करार दे दिए गए दतिया विधायक एवं मप्र के ताकतवर मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है। मंत्री मिश्रा ने दावा किया है कि चुनाव आयोग का फैसला गलत है परंतु वो मामले से बाहर निकलने के लिए दूसरे सभी प्रयास कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले एक तांत्रिक आयोजन की चर्चा भी सामने आई थी। बीते रोज नरोत्तम मुरैना स्थित विश्व प्रसिद्ध शनिश्चरा मंदिर पहुंचे। अजीब बात यह है कि शनिदेव से कृपा की मांग लेकर पहुंचे नरोत्तम मिश्रा ने यहां भी वीआईपी पॉवर का प्रदर्शन किया। प्रतिबंधित होने के बावजूद उन्होंने ना केवल शनिदेव की प्रतिमा का तेल से अभिषेक किया बल्कि हाथों से रगड़-रगड़ कर मालिश की। बता दें कि शनिदेव की इस दुर्लभ प्रतिमा का क्षरण हो रहा है अत: सरकार ने प्रतिमा पर सीधे तेल चढ़ाना या हाथ लगाना प्रतिबंधित कर दिया है। यहां तेल का दान किया जाता है जिससे शनिदेव की प्रतिमा का अभिषेक होता है। 

इसलिए लगाया गया था प्रतिबंध
प्रशासन ने शनि प्रतिमा तक श्रद्घालुओं के पहुंचने व सीधे तेल चढ़ाने पर प्रतिबंध इसलिए लगाया था कि क्योंकि उसका मानना था कि प्रतिमा पर हाथ लगने से उसका क्षरण हो रहा है। प्रतिमा घिस रही है। इसलिए मंदिर में शनि प्रतिमा पर तेल चढ़ाने के लिए ऐसी व्यवस्था की गई है कि दूर से ही श्रद्घालु एक निश्चित जगह पर तेल पात्र में डालते हैं तो तेल पाइप के द्वारा शनि प्रतिमा पर पहुंचता है। श्रद्घालु दूर से ही शनि के दर्शन करते हैं।

अभी यह है व्यवस्था
वर्तमान में शनि मंदिर में प्रतिमा बीच में है। दीवारों की तरफ रेलिंग लगाई है। श्रद्घालु रेलिंग के अंदर जाते हैं, लेकिन प्रतिमा से करीब पांच फीट से अधिक दूर रहते हैं। उनका चढ़ावा पुजारी लेते हैं। सरसों के तेल को प्रतिमा पर चढ़ाने के लिए रेलिंग के अंतिम छोर के पास दीवार में पात्र बनाया गया है। पात्र में श्रद्घालु तेल चढ़ाते हैं और वह तेल पाइप से शनि प्रतिमा तक पहुंचता है।

यह भी किया मंत्रीजी ने
शनि की प्रतिमा मंदिर में जिस चबूतरे पर है, उस पर मत्था तो टेका जा सकता है, लेकिन पैर नहीं रखे जा सकते। इसके बावजूद मंत्री मिश्रा चबूतरे पर ही बैठ गए और शनि प्रतिमा की मालिश करने लगे।

कर्मफलदाता हैं शनिदेव
बता दें कि शनिदेव को तारा मंडल में न्यायाधीश की पदवी प्राप्त है। वो मनुष्यों के कर्मफल दाता हैं। जो जैसा कर्म करता है, शनिदेव वैसा ही फल देते हैं। यदि मनुष्य से कोई भूल हो गई है या पाप हो गया है और वो सच्चे मन से शनिदेव के सामने उस भूल या पाप को स्वीकार करता है। उसका प्रायश्चित्त करता है तो माना जाता है कि शनिदेव के दंड प्रकोप से बच जाता है। 

शनिश्चर मंदिर का महत्व
कहा जाता है कि यहां स्थापित भगवान शनिदेव की प्रतिमा रामायण काल, त्रेतायुग की है। लंका पर चढ़ाई से पूर्व हनुमानजी ने शनिदेव को रावण से बंधन से मुक्त कराया और मध्य प्रदेश में ग्वालियर के नजदीक मुरैना जिले में आने वाले एंती गांव के पर्वत पर स्थापित किया। आकाश मार्ग से हनुमानजी शनिदेव को लेकर इस पर्वत पर जहां उतरे, वहां निशान आज भी दिखाई देते हैं। कहा जाता है कि यह प्रतिमा पत्थर की नहीं है और ना ही किसी धातु से बनी हुई है। आज तक पता नहीं लगाया जा सका कि प्रतिमा किस पदार्थ से निर्मित है। धरती पर शनिदेव का यह सबसे पहला मंदिर है। यह भी बताया जाता है कि महाराष्ट्र के श्री शनि शिगणापुर में जो शनिशिला स्थापित है वो इसी पर्वत का भाग है। 

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