ममता का नया अड़ंगा: मूर्ति विसर्जन से पहले अनुमति अनिवार्य

Friday, September 22, 2017

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर कोलकाता हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब नया अड़ंगा लगा दिया है। कहा है कि दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए प्रोसेशन निकालने से पहले अनुमति लेनी होगी जबकि मोहर्रम हमेशा की तरह मनाया जाएगा। इससे पहले ममता सरकार ने दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने ममता सरकार को फटकारते हुए उसके यह आदेश खारिज कर दिया था। माना जा रहा था कि ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगी परंतु ऐसा नहीं हुआ। देर शाम फैसला किया गया कि दुर्गा मूर्ति विसर्जन में अनुमति की शर्त लगा दी जाए। 

वरिष्ठ अधिवक्ता तथा तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा है कि एक तरह से यह फैसला सरकार के पक्ष में गया है तथा सरकार इस फैसले को चुनौती नहीं देगी। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से विचार विमर्श किया है। उसके बाद ही यह निर्णय लिया गया है। अब दुर्गा मूर्ति विसर्जन के लिए निकलने वाले प्रोसेशन के लिए आयोजकों को पहले अनुमति लेनी होगी और बना अनुमति वो प्रोसेशन नहीं निकाल सकेंगे।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने हिंदू पंचांग के अनुसार दुर्गा प्रतिमा विसर्जन करने का निर्देश दिया है। बता दें कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने ममता सरकार का फैसला पलटते हुए साफ कर दिया कि मोहर्रम के दिन यानी एक अक्टूबर को भी दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन होगा। कोर्ट ने इसके लिए पुलिस को भी सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने के लिए कहा था।

जानिए क्या कहा हाईकोर्ट ने
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता से कहा कि न तो यहां लोगों की भीड़ है और न ही हिंसा हुई, लेकिन सरकार ने पहले ही फायरिंग शुरू करा दी। विसर्जन मामले में सरकारी निर्देश का कोई आधार नहीं है। राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि कोई अप्रिय घटना न हो, इस कारण विसर्जन पर प्रतिबंध लगाया था।

महाधिवक्ता ने अंतरिम निर्देश पर स्थगन की मांग की, लेकिन खंडपीठ ने खारिज कर दी। राज्य सरकार द्वारा हाई कोर्ट के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प खुला है। इसके लिए शुक्रवार तक का समय दिया गया है। साथ ही राज्य सरकार को तीन सप्ताह के अंदर हलफनामा देने का निर्देश दिया है। याची पक्ष को भी दो सप्ताह में हलफनामा देने को कहा है। पांच सप्ताह बाद फिर मामले की सुनवाई होगी।

कोर्ट ने कहा कि अप्रिय घटना होने का स्वप्न आने मात्र से विसर्जन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। किसी नागरिक के धार्मिक अधिकारों का हनन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि इससे कानून व्यवस्था के लिए संकट पैदा हो जाएगा। हिंदुओं व मुसलमानों को मिल-जुलकर रहने दीजिए। उनके बीच बंटवारे की कोई लकीर मत खींचिए। लोगों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों पर अमल करने का पूरा हक है,चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।

यह है मामला
पश्चिम बंगाल सरकार ने नोटिस जारी कर मोहर्रम की वजह से विजयादशमी को शाम छह बजे तक ही दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन का आदेश दिया था। एक अक्टूबर (एकादशी) को विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद दो से चार अक्टूबर तक विसर्जन की अनुमति दी गई थी। सरकार के इस निर्देश के खिलाफ हाई कोर्ट में तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं। 

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