भोपाल नगर निगम में 3 महीने से छटपटा रहीं थीं कमिश्नर छवि भारद्वाज

Tuesday, September 5, 2017

भोपाल। नगरनिगम से ट्रांसफर हुईं कमिश्नर छवि भारद्वाज पिछले 3 माह से छटपटा रहीं थीं। कुछ ऐसा था जो नहीं होना चाहिए था परंतु वो उसे रोक नहीं पा रहीं थीं। वो खुद को भी उसमें एडजस्ट नहीं कर पा रहीं थीं। ईद की छुट्टी पर देर रात जब उनका तबादला आदेश जारी हुआ तो सोमवार को उन्होंने दोपहर तक पेंडिंग काम निपटाया और बिना औपचारिकता के चार्ज देकर चली गईं। यहां उनकी फेयरवेल के लिए 2 गुलदस्ते भी नहीं थे। बता दें कि महापौर आलोक शर्मा से उनकी पटरी नहीं बैठ रही थी। इसी बीच उन्होंने डीजल घोटाले का खुलासा कर दिया। इसमें कुछ ऐसा हुआ कि रातों रात छवि भारद्वाज का तबादला कर दिया गया। आप समझ सकते हैं कि यह कितना तीखा था कि तबादले के बाद महापौर ने कमिश्नर से एक औपचारिक मुलाकात तक नहीं की। 

निवृत्तमान नगर निगम आयुक्त छवि भारद्वाज सोमवार को सुबह रोजाना की तरह करीब 10 बजे नगर निगम मुख्यालय पहुंचीं। दोपहर डेढ़ बजे तक नियमित कामकाज निपटाया। अधिकारियों और कुछ पार्षदों ने उनसे सौजन्य भेंट की। दोपहर करीब डेढ़ बजे उन्होंने अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी को प्रभार दिया और सीधे पर्यटन विकास निगम पहुंच कर एमडी का पदभार ग्रहण कर लिया। निगमायुक्त की विदाई के समय महापौर आलोक शर्मा और उनके एमआईसी सदस्यों सहित भाजपा का कोई भी पार्षद मौजूद नहीं था। कांग्रेस पार्षद अमित शर्मा, गुड्डू चौहान और सीमा सक्सेना जरूर उनसे औपचारिक मुलाकात के लिए पहुंचे। 

फिर भी दब नहीं पाएगा वर्कशाॅप घोटाले 
एमपी सिंह को नोटिस कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने वर्कशाॅप घोटाले में अपर आयुक्त एमपी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके साथ ही तत्कालीन ट्रांसपोर्ट अधिकारी आरके परमार को निलंबित करने की अनुशंसा का पत्र पीएचई के प्रमुख सचिव को भेज दिया गया। अब प्रशासनिक मुखिया के बदले जाने के बाद भी वर्कशाॅप घोटाले को दबाना आसान नहीं होगा। डीजल चोरी मामले में निलंबित पंप प्रभारी मधुसूदन तिवारी ने भी उनसे मुलाकात की। छवि भारद्वाज ने उन्हें नोटिस का जवाब देने की सलाह दी।

जाते जाते किया इशारा
विदाई से पहले बातचीत में छवि भारद्वाज ने माना कि नगर निगम में भ्रष्टाचार रोकना एक बड़ा चैलेंज है। इसके साथ ही निगम के फाइनेंशियल मैनेजमेंट को भी ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने छुट्टी के दिन देर रात जारी हुए तबादला आदेश जारी होने को सामान्य प्रक्रिया बताया। इस बारे में बार- बार पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में ज्यादातर तबादला आदेश इसी तरह रात में ही जारी हुए हैं। तीन महीने पहले वे यहां से तबादले की इच्छा जाहिर कर चुकी थीं।

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

Trending

Popular News This Week