संविदा नीति 2017 के खिलाफ काले गुब्बारे उड़ाएंगे संविदा कर्मचारी

Monday, September 18, 2017

भोपाल। मप्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के लिए संविदा नीति 2017 बनाई जा रही है। इस नीति में संविदा कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर बनाने के प्रावधान किये गये हैं। संविदा नीति 2017 के विरोध में मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ एवं प्रदेश के ढाई लाख संविदा कर्मचारी अधिकारी बुधवार 20 सितम्बर 2017 को भोपाल सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर लंच ब्रेक के समय काले गुब्बारे छोड़कर संविदा नीति 2017 का विरोध करेंगें तथा सरकार से मांग करेंगे कि 22 जून 2013 को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के ढाई लाख संविदा कर्मचारियों को नियमित करने क लिए जो नीति बनाई थी उस नीति को लागू करे ना कि संविदा नीति 2017 को। 

मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि प्रदेश में नियमित पदो के डेढ़ लाख पद खाली पड़े हैं। मप्र सरकार उन पदों पर संविदा कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर नियमित करें तथा समान कार्य समान वेतन दे। भोपाल में प्रदर्शन राज्य षिक्षा केन्द्र पुस्तक भवन अरेरा हिल्स के सामने दोपहर डेढ़ बजे किया जायेगा। जिसमें भोपाल के सभी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारी अधिकारी भाग लेंगें।

मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर का यह भी कहना है कि प्रदेश सरकार और उसमें बैठे हुये अधिकारी संविदा कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। अतिथि शिक्षक जो कि स्कूलों में पीरियेड के हिसाब से पढ़ाते हैं उनको प्रति पीरियेड के हिसाब से पैसे दिये जाते हैं ऐसे अतिथि शिक्षकों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिक्षक दिवस पर घोषणा करते हैं कि उनके लिए नियमित पदों के 25 प्रतिषत् पद आरक्षित किये जायेंगें। पंचायत कर्मी, गुरूजी, शिक्षाकर्मी जिनकी नियुक्ति संरपचों ने की थी बिना किसी योग्यता के उनको मप्र सरकार ने सीधे नियमित कर दिया। 

वहीं दूसरी तरफ समाचार पत्रों में निकले विज्ञापन के माध्यम से चयनित होकर आए पन्द्रह बीस वर्षो से संविदा पर कार्यरत संविदा कर्मचारियों क लिए सरकार संविदा नीति 2017 बना रही है वो भी बंधुआ मजदूर बनाने के लिए। मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ इस संविदा नीति का विरोध करते हुये 2013 में बनाई गई संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की नीति लागू किये जाने की मांग करेगा।

सरकार द्वारा बनाई जा रही 2017 संविदा नीति में बंधुआ मजदूर बनाये जाने के लिए ये हैं प्रावधान -
(1)संविदा कर्मचारियों को बिना सूचना दिये सेवा से कभी भी हटाया जा सकता है। उसको हटाने पर सूचना देने की भी कोई आवश्यकता नहीं होगी।
(2) संविदा कर्मचारियों को किसी प्रकार का अर्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश की पात्रता नहीं होगी। यहां तक शासकीय अवकाश रविवार और शनिवार के अवकाश का भी उसमें उल्लेख नहीं किया गया है।
(3) संविदा कर्मचारियों को दिये जाने वाले वेतन का उल्लेख भी उसमें नहीं किया गया है उसमें लिखा गया है कि जो वित्त विभाग निर्धारित करेगा वो दिया जायेगा और उसमें किसी प्रकार के वेतन वृद्धि की पात्रता नहीं होगी।
(4) संविदा कर्मचारियों को किसी प्रकार के भत्ते जैसे मंहगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, चिकित्सा भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति की पात्रता नहीं होगी।
(5) संविदा कर्मचारी की संविदा अवधि उसके कार्य परफारमेंस के आधार पर एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाई जायेगी वह अधिकतम तीन वर्ष से ज्यादा नहीं होगी। तीन वर्ष बाद संविदा अविध स्वमेव समाप्त मानी जायेगी। जिसकी सूचना भी उसको नहीं दी जायेगी।

स्ंविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा है कि यदि संविदा नीति 2017 निरस्त कर संविदा नियमितीकरण नीति 2013 लागू नहीं की गई तो प्रदेश व्यापी उग्र आंदोलन होगा। जिसके जिम्मेदार सरकार में बैठे अधिकारी होगें।

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