श्राद्ध पक्ष: निरोगी, कर्जमुक्त और तेजस्वी बनने के लिए 16 दिन सिर्फ इतना सा कर लें

Tuesday, September 5, 2017

श्राद्धपक्ष को पितृपक्ष भी कहते है इसका एक नाम आश्विन भी है। आश्विन नाम भगवान सूर्य के पुत्र अश्विनीकुमार से लिया गया है जो की देवताओं के वैध है। ये सभी प्रकार के रोगों का हरण करते है। हम सभी ये जानते है कि हमारे सौरमंडल के मुखिया भगवान सूर्य है। उनकी ऊर्जा से ही हमारा जीवन है। उनके कारण ही दिन रात तथा ऋतु है। उनके कारण ही फसलों का उत्पादन है। इस तरह से हम भगवान सूर्य के ऋणी है। आश्विन मास में भगवान सूर्य ऋण की राशि कन्या में जाते हैं। इस समय किया गय़ा दान पुण्य आपके पापों को हरता है। आपका शारीरिक, आर्थिक और मानसिक ऋण ख़त्म होता है। फलस्वरूप आप निरोगी, कर्जमुक्त तथा तेजस्वि बनते है।

आश्विन मास में सूर्य की प्रखरता
इसे हम सनातन संस्कृति का चमत्कार ही कहेंगे की आश्विन (क्वार) मास में सूर्य की किरणें अत्यंत प्रखर होती हैं। इसका कारण होता है सूर्य किरणो के माध्यम से पितरों का इस पक्ष में आगमन। पितृ पूरे 15 दिन धरती में अपने परिवार के सम्पर्क में रहते हैं। उनके परिवार द्वारा दिया गया जल, तर्पण तथा अन्न ग्रहण करते हैं। परिवारों के द्वारा किये गये तर्पण को सूर्य किरणें शोषित कर अपने अपने पितरों तक पहुंचातीं है। यदि परिवार द्वारा तर्पण नही किया जाता है तो पितृ अपने परिवारों से निराश होकर चले जाते हैं। फलस्वरूप भयंकर कष्ट बीमारी तथा अवनति का कारण बनते है। इसीलिए हर व्यक्ति को इस पक्ष में तर्पण गौ, कुत्ते और कौओं को भोजन अवश्य देना चाहिये। यदि आपको अपने पितरों की तिथि याद है तो विधि विधान से ब्राह्मणों को बुलाकर पितृ तर्पण का कार्य करवाये यदि ब्राह्मण न मिले तो पितरों का पूजनपाठ कर उनके मनपसंद भोजन का भोग लगाकर सूर्य को जल चढ़ाये फ़िर गौ, कुत्ते और कौओं को भोजन दें। श्रद्धापूर्वक उन्हे नमन करें इससे ही आपको उनकी कृपा प्राप्त हो जायेगी।

परिवार कुटुम्ब के लिये आवश्यक
हर व्यक्ति चाहे वो किसी भी समाज में जन्मा हो वह अपने पिता का बीज ही होता है तथा उसके भाई बहन उस परिवार रूपी पेड़ की अलग अलग शाखायें होती है। परिवार में सभी की रगों में एक जैसा खून बहता है जिसे हमे रक्तसम्बंध कहते है। परिवारों में आपसी मनमुटाव के कारण अबोलापन तथा वैमनस्य हो जाता है। जिसके कारण लोग अपने भाई वधुओं को हानि पहुचाने से नही चूकता लेकिन उसे ये नही मालूम की ऐसा करके वो खुद को नुकसान पहुंचा रहा है। इसीलिये भले ही कितने भी मतभेद हो अपने मूल का न भूलें मन में अपने संबंधियों के लिये अच्छा ही सोचें तथा पितृतर्पण भोजन पूजन करें इस पक्ष में अपने परिवारों में ही खानपान करें ये बात घर की स्त्रियों को भी समझना चाहिये की वंश पिता द्वारा ही बढ़ता है। इसीलिये अपने पति के परिवारों को मान देती रहे। जिससे उसके खुद के बच्चे भी शारीरिक, आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।

गया तीर्थ पितृ शांति और शंका समाधान
हिंदू धर्म में गय़ा जी को पितरों का मोक्ष स्थान कहा गया है। गय़ा में प्रेतशिला में अपने पितरों का तर्पणपूजन करने से पितरों का मोक्ष मिलता है। इस सम्बंध में एक भ्रांति यह फैली है की जो लोग गय़ाजी में अपने पितरों का श्राद्ध कर आयें है। उन्होंने पितृपक्ष में श्राद्ध आदि नही करना चाहिये ऐसा बिलकुल नही है। गयाजी किया गया श्राद्ध पितरों की कृपा दिलाता है साथ ही पितृपक्ष में किया गया तर्पण आपको भगवान सूर्य की कृपा राज्यपक्ष की कृपा तथा प्रतिष्ठा दिलाता है इसीलिये हर व्यक्ति जो नीरोगी काया, मानसिक सुख तथा प्रतिष्ठा राज्यपद चाहता है उसे पितृपक्ष में तर्पण पूजन अवश्य करना चाहिये।
प.चंद्रशेखर नेमा "हिमांशु"
9893280184,7000460931

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