राजस्थान में किसान आंदोलन भड़का, 150 जगह चक्काजाम

Monday, September 11, 2017

जयपुर। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और किसानों के कर्ज माफी की मांग को लेकर किसान आंदोलन ​भड़क रहा है। महापड़ाव के 11वें दिन किसान सभा की ओर से चक्का जाम कर दिया गया। सोमवार को सीकर जिले में करीब 150 स्थानों पर चक्का जाम किया गया, जिससे लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों के इस चक्का जाम का आलम ये था कि गांव की सड़कों के अलावा सीकर से गुजरने वाले सभी हाइवे पर भी सन्नाटा पसरा रहा। मंगलवार को पूरे राजस्थान में चक्काजाम का आह्वान किया गया है। 

चक्का जाम के बाद दोपहर को जिला कलेक्टर द्वारा किसान सभा को जयपुर में मंत्री समूह से वार्ता करने का प्रस्ताव भेजा गया, जिस पर चर्चा करके पूर्व विधायक और महापड़ाव की अगुवाई कर रहे कामरेड अमराराम ने जयपुर जाकर मंत्री समूह से वार्ता करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर मंत्री समूह को सोमवार को ही चर्चा करनी है तो वे सीकर आ जाएं बाद में किसान सभा और मंत्री समूह के बीच मंगलवार को वार्ता होने पर सहमति बनी। 

अब किसान सभा के 11 सदस्यों के प्रतिनिधी मंडल के साथ चार मंत्रियों का समूह किसानों की मांगों को लेकर वार्ता करेगा। वहीं किसान नेता और पूर्व विधायक अमराराम ने साफ कर दिया कि अगर सरकार ने उनकी स्वामीनाथन आयोग की शिफारिशों सहित किसानों के कर्ज माफी की मांग नहीं मानी तो उनका महापड़ाव जारी रहेगा। यही नहीं सोमवार के चक्का जाम के बाद किसान नेता अमराराम ने मंगलवार को पूरे राजस्थान में चक्का जाम का आह्वान किया है।

वहीं इस मामले पर अब राजनीतिक रंग भी चढ़ने लगा लगा। सीकर में जहां राजपा प्रमुख डॉ. किरोड़ीलाल मीणा और निर्दयलीय विधायक हनुमान बेनीवाल किसानों आंदोलन के समर्थन में पहुंचे हैं, वहीं कांग्रेस भी राजनीति करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। राजस्व मंत्री अमराराम चौधरी ने कहा की मैं खुद भी किसान हूं, हमारी सरकार ने जितना काम किसानों के लिए किया है किसी पूर्ववर्ती सरकार ने नहीं किया है। 

प्रदेश के 14 जिले प्रभावित
आंदोलन के कारण प्रदेश के 14 जिले  सीकर, नागौर, बीकानेर, उदयपुर, भरतपुर, झुंझुनूं, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा, बारां सहित अन्य जिले सीधे तौर पर प्रभावित हैं। महापड़ाव को लेकर जिले के 50 से ज्यादा संगठनों ने समर्थन अब तक दे दिया है। 35 से ज्यादा संगठन रैली के रूप में पहुंचे। पिछले आठ दिनों से शहर में हर समय जाम की स्थिति बनी हुई। रविवार को महापड़ाव स्थल पर खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल और राजपा के विधायक किरोड़ी लाल मीणा पहुंचे। सरकार ने राजकुमार रिणवां को भेजा। आंदोलनकारी किसान नेताओं से वार्ता के लिए सरकार की ओर से देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां एवं सीएमडी श्रीमत पांडे को भेजा गया। सर्किट हाउस में पूर्व विधायक पेमाराम सहित किसानों से वार्ता की जो वार्ता बेनतीजा रही। 

मंत्री रिणवां ने सरकार की ओर से कमेटी निर्धारण कर कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन पहले दौर की वार्ता में बात नहीं बना पाई। इसके बाद पूर्व विधायक पेमाराम के नेतृत्व में सभी किसान महापड़ाव में शामिल होने के लिए वापस मंडी लौट आए। मंत्री रिणवां ने बताया कि सरकार किसानों की मांगों का हल निकाल लेगी। इधर, सरकार ने किसान सभा को मंत्री मंडल समूह से वार्ता के लिए आमंत्रण भेजा है। इस संबंध में किसानसभा के अध्यक्ष अमराराम का कहना है कि जिला कलेक्टर ने मंत्री मंडल समूह से वार्ता के लिए पत्र दिया है। इस पर किसान सभा ने प्रतिनिधि मंडल के नाम भेज दिए हैं।

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