NARENDRA MODI का अड़ियल रवैया, भारत को बर्बादी की ओर ले जाएगा: चीन के अखबार ने कहा

Saturday, August 5, 2017

नई दिल्ली। डोकलाम तनाव पर चीन सरकार की ओर से कम चीन के सरकारी अखबार की ओर से ज्यादा बयान आ रहे हैं। अभी तक वो भारत को धमकी दे रहा था लेकिन आज उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट किया है। चीन के सरकारी न्यूज पेपर ग्लोबल टाइम्स ने अपने एडिटोरियल में लिखा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का अड़ियल रवैया भारत को बर्बादी की ओर ले जाएगा। मोदी हमारे लिए हार्ड लाइन स्टैंड अपनाकर अपनी अवाम की किस्मत के साथ जुआ खेल रहे हैं और भारत को जंग की ओर धकेल रहे हैं। मोदी को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की जबरदस्त ताकत का अंदाजा होना चाहिए, जो डोकलाम में भारतीय सेनाओं को कुचलने में का माद्दा रखती है।

एडिटोरियल में कहा गया, "भारत ने ऐसे देश को चैलेंज किया है, जो उससे ताकत में कहीं ज्यादा आगे है। ये एक ऐसी जंग होगी, जिसका नतीजा सभी को मालूम है। भारत की इस लापरवाही ने चीन को चौंका दिया है। नरेंद्र मोदी सरकार को PLA की जबरदस्त ताकत का अंदाजा होना चाहिए। भारतीय बॉर्डर सेनाओं का चीन की फील्ड फोर्सेस से कोई मुकाबला नहीं है। अगर जंग छिड़ी तो PLA बॉर्डर इलाके से भारतीय सेनाओं को खदेड़ने की ताकत रखती हैं।"

चीन को धमका नहीं सकता है भारत
मोदी सरकार का ये सख्त रवैया ना ही कानून पर टिका है और ना ही उनकी ताकत पर। ये सरकार लापरवाही से इंटरनेशनल लॉ को तोड़ रहा है और भारत के राष्ट्रीय गौरव और शांतिपूर्ण विकास को मुश्किल में डाल रहा है। ये रीजनल सिक्युरिटी के लिए बेहद गैरजिम्मेदाराना कदम है। वे भारत की किस्मत और अवाम की बेहतरी से जुआ खेल रहे हैं। अगर मोदी सरकार रुकती नहीं है तो ये देश को ऐसी जंग में धकेल देगी, जो उसके कंट्रोल में नहीं होगी। भारत साउथ एशिया में चीन को उस तरह से नहीं धमका सकता है, जैसे दूसरों को धमकाता है।

जंग के लिए तैयार है PLA
PLA जंग के लिए तैयार थी, लेकिन वो शांति चाहती है इसलिए खुद पर कंट्रोल रखा। हम शांति को एक मौका देना चाहते हैं और ये भी चाहते हैं कि भारत इन गंभीर परिस्थितियों को पहचान ले। PLA ने पिछले महीने तब हमला नहीं बोला, जब भारतीय सेनाओं ने चीन के इलाके में घुसपैठ की। मोदी सरकार चीन की भलमनसाहत को उसकी कमजोरी के तौर पर देख रही है, उसकी ये लापरवाही उसे बर्बादी की ओर ले जाएगी।

2 हफ्ते में भारतीय सेना को खदेड़ देंगे
सिक्किम के डोकलाम एरिया पर भारत से जारी विवाद के बीच चीन के एक एक्सपर्ट ने बीजिंग की तरफ से छोटे पैमाने पर मिलिट्री ऑपरेशन की आशंका जताई है। एक्सपर्ट ने कहा है, "चीन डोकलाम में लंबे वक्त तक गतिरोध बने रहने की इजाजत नहीं दे सकता, इसलिए वहां से भारतीय सैनिकों को हटाने के लिए 2 हफ्तों के भीतर छोटे पैमाने पर मिलिट्री ऑपरेशन किया जा सकता है।

मौजूदा विवाद क्या है?
चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा है। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं। भारत भूटान का साथ देता है। भारत में यह इलाका डोकलाम और चीन में डोंगलाेंग कहलाता है। चीन ने जून की शुरुआत में यह सड़क बनाना शुरू किया। भारत ने विरोध जताया तो चीन ने घुसपैठ कर दी। चीन ने भारत के दो बंकर तोड़ दिए। तभी से तनाव है। 

दरअसल, सिक्किम का मई 1975 में भारत में विलय हुआ था। चीन पहले तो सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता था लेकिन 2003 में उसने सिक्किम को भारत के राज्य का दर्जा दे दिया। हालांकि, सिक्किम के कई इलाकों को वह अपना बताता रहा है।

किस समझौते की वजह से है विवाद?
विवाद की वजह 1890 का वह समझौता है, जो ब्रिटिश शासन ने चीन के चिंग राजवंश के साथ किया था। उसमें अलग-अलग जगहों पर बॉर्डर दिखाई गई थीं। उसके मुताबिक, एक बड़े हिस्से पर भूटान का कंट्रोल है, जहां भारत का उसे सपोर्ट और मिलिट्री कोऑपरेशन हासिल है। इसी समझौते के हिस्से में आने वाले डोकलाम के पठार पर भारत और चीन के जवान शून्य डिग्री से नीचे के तापमान में तैनात हैं। ये तैनाती नॉर्मल नहीं है। दोनों देश सैनिकों की वापसी पर अड़ गए हैं।

चीन को रोकना क्यों जरूरी है?
चीन जहां सड़क बना रहा है, उसी इलाके में 20 किमी हिस्सा सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह ‘चिकेन नेक’ भी कहलाता है। चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा तो भारत की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे।
अगर चीन ने सड़क को बढ़ाया तो वह न सिर्फ भूटान के इलाके में घुस जाएगा, बल्कि वह भारत के सिलीगुड़ी काॅरिडोर के सामने भी खतरा पैदा कर देगा। दरअसल, 200 किमी लंबा और 60 किमी चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी राज्यों से जोड़ता है। इसलिए भारत नहीं चाहेगा कि यह चीन की जद में आए।

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