यूपी में हुए व्यापमं जैसे घोटाले की जांच भी CBI करेगी

Thursday, August 3, 2017

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के खूनी व्यापमं घोटाले को कौन नहीं जानता। योग्य बेरोजगारों की जगह अयोग्य आवेदकों को नौकरियां दी गईं। मेडिकल सीटों की खुली नीलामी हुई। हजारों करोड़ गप हो गए। जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी संदिग्धों की मौत होती गई। सिलसिला अभी भी जारी है। पहले जांच एसआईटी कर रही थी, अब सीबीआई कर रही है। कुछ इसी तरह का घोटाला अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) में सामने आया है। सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच के लिए योगी सरकार ने केंद्र सरकार को संस्तुति भेज दी है।

मंगलवार को शासन ने केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को प्रोफार्मा भेजा। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने बताया कि एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच हुई भर्तियों की सीबीआइ जांच की सरकार ने सिफारिश की है। योगी सरकार ने संकल्प पत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ किए गए वादे को निभाने की पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जुलाई को विधानसभा में यह जांच कराने की घोषणा की थी। तब उन्होंने विपक्ष को सीधे निशाने पर लिया था। दो टूक कहा था कि भर्तियों में धांधली की सारी जांचें होगी और कोई दोषी बचेगा नहीं। भर्ती को लेकर सीबीआइ जांच के मुख्यमंत्री के एलान के बाद ही विपक्ष के तेवर तीखे हो गए थे।

जिस दिन मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की उसी दिन से विपक्ष ने सदन का बहिष्कार भी कर दिया। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार में हुई हर भर्ती पर सवाल उठाए थे। पिछली सरकार में लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें हटाया गया। अब उन पर शिकंजा कसना तय है। उनके कार्यकाल के दौरान लोअर सबआर्डिनेट की चार भर्ती परीक्षाएं संपन्न हुईं।

इनमें प्रशासनिक पद की सूबे की सबसे बड़ी पीसीएस की पांच परीक्षाएं भी शामिल हैं। पीसीएस जे, समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी और सहायक अभियोजन अधिकारी की तीन-तीन भर्तियों के परिणाम इस दौरान घोषित किए गए। उनके कार्यकाल में 236 सीधी भर्तियां भी हुईं। अब सीबीआइ की जांच में इन भर्तियों का सच उजागर होगा।

गौरतलब है कि अनिल यादव के कार्यकाल में ही एसडीएम पद पर एक ही जाति के अभ्यर्थियों का चयन किए जाने के आरोप लगे थे। सपा शासनकाल में पीसीएस के लगभग ढाई हजार पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। इसी तरह लोअर सबार्डिनेट के 4138 पदों पर भर्तियां हुई हैं। आयोग ने सबसे बड़ी भर्ती कृषि तकनीकी सहायकों की थी। इसमें 6628 पद भरे गए। इस भर्ती में ओबीसी के लिए आरक्षित पदों में बड़े पैमाने पर हेरफेर की शिकायत मिली थी। राजस्व निरीक्षक के 617, खाद्य सुरक्षा के 430 पद भी सपा शासनकाल में भरे गए। इनके अलावा और भी कई महत्वपूर्ण भर्तियां हैं जिनमें हेराफेरी के आरोप हैं। 

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