भारत-चीन युद्ध कराकर रहेंगे चीनी अखबार: एक नई अफवाह उड़ाई

Thursday, August 10, 2017

नई दिल्ली। सारी दुनिया भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव को कम करने की कोशिश कर रही है लेकिन चीन के अखबार लगातार भड़काऊ लेख और समाचार छाप रहे हैं। चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स भारत समेत अमेरिका को भी धमकी दे रहा है। आए दिन वो किसी ना किसी देश को धमकाने वाली संपादकीय छाप रहा है। अब दूसरे सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने एक नई अफवाह उड़ा दी है। उसने लिखा है कि भारत की सेना युद्ध की तैयारी कर रही है। उसने डोकलाम के आसपास के कई गांव खाली करा लिए है।

चाइना डेली ने गुरुवार को एक आर्टिकल में कई उदाहरणों के जरिए भारत पर अहसान जताने की कोशिश की। कहा- हम कई सेक्टर्स में भारत की मदद कर रहे हैं। कई चीनी कंपनियां भारत में इन्वेस्टमेंट कर रही हैं। शी जिनपिंग खुद भारत को सहयोगी बताते हुए कह चुके है कि दोनों देेशों की बीच करीबी रिश्ते और सहयोग होना बहुत जरूरी है। आर्टिकल के मुताबिक- इन सबके बावजूद अगर भारत डोकलाम से सेना नहीं हटाता तो यही समझा जाएगा कि वो आग से खेल रहा है और जल जाएगा। चीन की फॉरेन और डिफेंस मिनिस्ट्री साफ कर चुकी है कि चीन के सब्र की भी सीमा है।

जंग की तैयारी कर रहा भारत
आर्टिकल से पहले पीपुल्स डेली ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक फोटो ट्वीट करते हुए लिखा- इंडियन आर्मी जंग की तैयारी कर रही है। उसने नथांग गांव खाली करा लिया है। अखबार ने आर्टिकल में भी भारतीय सेना की तैयारियों के बारे में लिखा। कहा- भारत ने अपनी तरफ के कई गांव खाली करा लिए हैं। यहां के लोगों को फौरन दूसरी और सेफ जगहों पर जाने के लिए कहा गया है।

अमेरिकी सांसद ने कहा- भड़का रहा है चीन
इलिनोइस से सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भारत और चीन के बीच जारी डोकलाम विवाद पर रिएक्शन दिया। राजा ने कहा- डोकलाम में जो कुछ हो रहा है, उसकी वजह ये है कि चीन वहां भड़काउ कदम उठा रहा है। राजा हाल ही में भारत आए थे और उन्होंने यहां नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। राजा ने कहा- इस मुद्दे का डिप्लोमैटिक सॉल्यूशन निकाला जा सकता है।

भूटान बोला- डोकलाम हमारा एरिया
डोकलाम विवाद पर अब तक चुप रहने वाले भूटान ने भी भारत का साथ दिया है। न्यूज एजेंसी से बातचीत में भूटान सरकार के एक आॅफिशियल सोर्स ने कहा- हमने चीन को ये मैसेज भेज दिया है कि आप हमारे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच 1988 और 1998 में समझौते हो चुके हैं। और सड़क बनाने की ये कोशिश उन एग्रीमेंट्स का वॉयलेशन है।

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