राधाअष्टमी विशेष: श्रीकृष्ण की विशेष कृपा के लिए कथा एवं पूजा विधि

Sunday, August 27, 2017

भगवान कृष्ण की प्राणेश्वरी, उनकी मूल शक्ति श्री राधा जी का जन्म दिवस इस बार 29 अगस्त को मनाया जायेगा। सभी भक्तों खासकर वैष्णव भक्तों के लिये यह महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि बिना राधा पूजन स्मरण के कृष्ण कृपा असम्भव है। राधाजी का जन्म भाद्रपद अष्टमी को दोपहर मॆ हुआ वृषभान पूरी मॆ महान कृष्ण भक्त वृषभान तथा कीर्तीदा के यहां हुआ था। ये भगवान कृष्ण की आदिशक्ति है। भगवान कृष्ण की परम सखी श्री राधाजी है।

श्री राधाजी जन्म कथा
एक बार नारद जी ने भगवान शिव से यह प्रश्न किया की राधाजी कौन है क्या वे लक्ष्मी है या कोई देवकन्या, ऋषिकन्या या कोई वैष्णवशक्ति। इसके जवान मॆ भगवान भोलेनाथ बोले की कोटि कोटि लक्ष्मी देवशक्ति परम माया उनकी किसी भी तुलना मॆ नही। मै भी उनकी शक्ति का वर्णन नही कर सकता। परम अवतार विश्वमोहन भगवान श्री कृष्ण जिससे मोहित है उनकी आराध्या है राधाजी। एक बार रुकमनी जी ने कृष्ण को गरम ढूध पीने को दिया असावधानी वश वह गरम दूध भगवान कृष्ण की छाती मॆ लगा। गरम होने के कारण भगवान श्रीकृष्ण के मुँह से निकला हे राधे। तब रुकमनी जी उनसे राधा प्रेम के विषय मॆ पूछने लगी कृष्ण ने उन्हे इस सम्बन्ध मॆ स्वयं राधा जी मिलने को कहा। जब रुकमनी जी राधाजी के महल मॆ पहुँची द्वार मॆ परम सुंदर स्त्री को प्रणाम करने लगी उस स्त्री ने कहा में तो उनकी दासी हूँ वे तो मुख्य महल में मिलेगी। मुख्य महल में जब वे परम तेजस्वी कृष्ण ध्यान में मगन राधा से मिली तथा उनके पूरे शरीर में छाले थे रुकमनी के पूछने पर उन्होने बताया की कृष्ण पर गरम दूध गिरने से उन्हे ये छाले पड़ गये है। ऐसा है राधाकृष्ण का आपसी सम्बंध और प्रेम।

राधा अष्टमी के दिन क्या करे
इस दिन राधाकृष्ण युगल विग्रह का स्नान ध्यान षोडशोपचार पूजन श्रॄंगार आदि करें। माखन मिस्री का भोग लगाये। राधा माधव युगल का गान करे। राधाकृष्ण का भजन कीर्तन करें। ध्यान रहे जैसे हम मध्य रात्रि में कृष्ण जन्म उत्सव मनाते है वैसे ही मध्य दोपहर को ठीक 12 बजे उत्सव सम्पन्न करें। घर के बाल गोपालों को मनपसंद खानपान दें इस दिन स्वच्छ वस्त्र स्वच्छता का विशेष ध्यान दें।

राधा माधव युगल गान
हेमेन्दीवरकान्तिमंजुलतरं श्रीमज्जगन्मोहनं नित्याभिर्ललितादिभिः परिवृतं सन्नीलपीताम्बरम्।
नानाभूषणभूषणांगमधुरं कैशोररूपं युगंगान्धर्वाजनमव्ययं सुललितं नित्यं शरण्यं भजे।
इस स्त्रोत का पाठ करें। शुद्ध हृदय से राधा जी की भक्ति धन धान्य सर्व सुख तथा पवित्र प्रेम की पूर्ति कराती है। जय श्री राधे जय श्री कृष्ण।
प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"
9893280184,7000460931

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