चीन ने फोटो जारी कर कहा: बुलडोजर लेेकर आ गए थे भारतीय सैनिक

Wednesday, August 2, 2017

नई दिल्ली। चीन की तमाम धमकियां बेअसर हो गईं। भारत की सेना डोकलाम में अंगद के पांव की तरह डटी है और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर विवादित स्थल से अपना एक भी सैनिक कम करने के लिए तैयार नहीं है। सिक्किम के ट्राइजंक्शन में अब भी दोनों देशों के 400-400 सैनिक तैनात हैं। इधर चीन ने 2500 शब्दों का बयान और कुछ फोटो जारी करते हुए बताया है कि भारत के सैनिक बुलडोजर लेकर घुस आए थे।  चीन ने भारत पर आरोप लगाया है कि जून में भारत के 400 जवान उसके इलाके में रोड कंस्ट्रक्शन रोकने के लिए घुस आए थे। भारतीय जवानों ने वहां तंबू गाड़ दिए थे। चीन का दावा है कि अभी भारत के 40 सैनिक और एक बुलडोजर उसके इलाके में मौजूद है। चीन ने भारत से कहा है कि भूटान तो बहाना है। उसके बहाने भारत दखल दे रहा है। उसे तुरंत और बिना शर्त वहां से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए। 

चीन सरकार ने मीडिया को जारी किए गए एक स्टेटमेंट में दावा किया था कि 400 भारतीय सैनिकों ने 16 जून को घुसपैठ की थी। उनके पास दो बुल्डोजर भी थे लेकिन अब वहां एक बुल्डोजर और 40 सैनिक ही मौजूद हैं। चीन के इस दावे को भारतीय अफसरों ने फौरन नकार दिया। न्यूज एजेंसी के मुताबिक- पहले दिन से जितने भारतीय सैनिक वहां हैं, अब भी उतनी है तैनाती है। किसी सैनिक को हटाया नहीं गया है। पिछले महीने भी फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा था कि डोकलाम में चीन की सेना को भी पीछे हटना होगा। तभी भारतीय फौज हटेगी।

चीन ने जारी किया बयान
इस बयान में चीन ने कहा है कि 16 जून 2017 को चीन ने डोंगलांग इलाके में सड़क बनाना शुरू की। 18 जून को 270 से ज्यादा भारतीय सैनिक हथियार और दो बुलडोजर लेकर वहां आ गए। उन्होंने सिक्किम सेक्टर में डोका ला दर्रा पार कर बॉर्डर क्रॉस की। भारतीय सैनिक चीन के बॉर्डर में 100 मीटर अंदर तक घुस आए और रोड कंस्ट्रक्शन में खलल पैदा किया। इसी से इलाके में तनाव बढ़ा। भारतीय जवानों ने बुलडोजर्स के साथ घुसपैठ की। एक बार भारतीय जवानों की संख्या 400 तक हो गई। वे 180 मीटर अंदर तक आ गए और तीन टेंट लगा दिए। जुलाई के आखिर तक हमारे इलाके में 40 से ज्यादा भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर गैरकानूनी तरीके से मौजूद था।

डोकलाम चीन का हिस्सा
चीन ने कहा, “1890 में चीन और यूके (तब भारत में ब्रिटिश हुकूमत थी) के बीच एक करार हुआ था। इसके मुताबिक, डोकलाम एरिया बिना किसी विवाद के चीन का हिस्सा माना गया था। चीन में पीपुल्स रिपब्लिक और भारत की आजादी के बाद दोनों देशों के बीच इसी करार के जारी रहने पर सहमति बनी। जवाहर लाल नेहरू ने इस बारे में चीन के प्रीमियर चाउ एन लाई को लेटर भी लिखा था। इंडियन एम्बेसी द्वारा चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री को भेजे गए डिप्लोमैटिक नोट्स में इनका जिक्र है। सीमा विवाद पर दोनों देशों के रिप्रेजेंटेटिव्स के बीच बातचीत में भी यह मुद्दा उठता आया है।

भारत घुसपैठ के लिए जिम्मेदार
चीन ने बयान में कहा, “18 जून को भारत ने सिक्किम सेक्टर से चीन के इलाके में घुसपैठ की। यहां बॉर्डर बिल्कुल तय हैं। इंडियन ट्रूप्स का बॉर्डर क्रॉस करके हमारे इलाके में आना बहुत सीरियस मामला है। ये चीन की सोवरिनिटी (संप्रभुता) और उसकी अखंडता से छेड़छाड़ है। 1890 का कन्वेंशन सिटीजन चार्टर और इंटरनेशनल लॉ के बेसिक प्रिंसिपल्स पर बेस्ड है।

रोड बनाना चीन का हक
एक महीने से ज्यादा वक्त से जारी डोकलाम विवाद के बीच चीन ने कहा, “अपने इलाके मे रोड बनाना हमारा हक है। इससे लोकल ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर किया जा सकता है। चीन ने सड़क बनाने के लिए कोई बॉर्डर क्रॉस नहीं की है। इसके बारे में भारत को पहले ही बता दिया गया था। इस तरह की हरकत (घुसपैठ) को सहन नहीं किया जा सकता। दोनों देशों को नॉर्मल तरीके से इस मामले का हल खोजना चाहिए। भारत को भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों और अपने नागरिकों के बारे में सोचना चाहिए।

भारत की हरकतों से चीन को खतरा
चीन ने दावा किया, “बीते कई साल से भारत डोकलाम के अपने हिस्से और दूसरे करीबी इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। यहां उसने मिलिट्री इन्सटॉलेशन्स भी बनाए हैं। भारत ने कई बार चीन की नॉर्मल पेट्रोलिंग में रुकावट डालने की कोशिश की है। इस बारे में हमारे ट्रूप्स ने विरोध भी दर्ज कराया है। हकीकत ये है कि भारत इस इलाके की बॉर्डर से छेड़छाड़ की कोशिश कर रहा है। खास तौर से सिक्किम के इलाके में भारत की हरकतों से चीन की सिक्युरिटी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

मामला चीन-भूटान का, भारत दूर रहे
चीन का कहना है, “चीन और भूटान के बीच बॉर्डर इश्यू है लेकिन, भारत का इससे कोई ताल्लुक नहीं है। थर्ड पार्टी के तौर पर भारत को कोई हक नहीं कि वो चीन और भूटान के बीच किसी विवाद में दखल दे। भारत भूटान की तरफ से बात क्यों कर रहा है? भूटान की तरफ से भारत का इस मामले में दखल सिर्फ चीन की सोवरिनिटी का वॉयलेशन नहीं है। ये भूटान की संप्रभुता और आजादी में भी दखलंदाजी है। चीन और भूटान के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं।

चीन को रोकना क्यों जरूरी है?
चीन जहां सड़क बना रहा है, उसी इलाके में 20 किमी हिस्सा सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ता है। यह ‘चिकेन नेक’ भी कहलाता है। चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा तो भारत की कनेक्टिविटी पर असर पड़ेगा। भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे।
अगर चीन ने सड़क को बढ़ाया तो वह न सिर्फ भूटान के इलाके में घुस जाएगा, बल्कि वह भारत के सिलीगुड़ी काॅरिडोर के सामने भी खतरा पैदा कर देगा। 
दरअसल, 200 किमी लंबा और 60 किमी चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर ही पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी राज्यों से जोड़ता है। इसलिए भारत नहीं चाहेगा कि यह चीन की जद में आए।

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