गुजरात कांग्रेस: वाघेला पिता पुत्र समेत 8 विधायकों बर्खास्त

Wednesday, August 9, 2017

नई दिल्ली। सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के गुजरात से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद अब कांग्रेस हाईकमान ने अपने 8 विधायकों को बर्खास्त कर दिया है। इसमें कांग्रेस से मौखिक इस्तीफा दे चुके शंकर सिंह वाघेला एवं उनके एमएलए पुत्र महेन्द्र सिंह वाघेला भी शामिल हैं। शंकर सिंह पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं लेकिन विधायक होने के चलते असेंबली में वे तकनीकी तौर पर कांग्रेस सदस्य थे। कांग्रेस ने कहा है कि छह और विधायकों को वह एक्सपेल करेगी। इस तरह कुल 14 विधायकों पर कार्रवाई होगी। 

बता दें कि एक दिन पहले गुजरात की तीन सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हुआ था। कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते एक सीट पर इलेक्शन लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा दिलचस्प हो गया था। इस सीट पर सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल चुने गए। 

कांग्रेस के गुजरात प्रभारी अशोक गहलोत ने भोपाल समाचार को बताया कि आठ विधायकों को पार्टी से एक्सपेल किया जा चुका है। छह और विधायकों को एक्सपेल किया जाना है। इन सभी विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का पालन नहीं किया था। गुजरात कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी के मुताबिक, इन आठ विधायकों को छह साल के लिए पार्टी से बाहर किया गया है।

आठ विधायक ये हैं: 
शंकर सिंह वाघेला, उनके बेटे महेंद्र सिंह वाघेला, भोलाभाई गोहिल, धर्मेंन्द्र सिंह जडेजा, पीके राउलजी, अमित चौधरी और करम सिंह पटेल। बता दें कि पटेल और गोहिल वही दो सांसद हैं, जिन्होंने बीजेपी नेताओं को अपने बैलेट दिखा दिए थे। चुनाव आयोग ने इसी के चलते उनके वोट रद्द कर दिए थे। क्रॉस वोटिंग करने वाले गैर-वाघेला गुट के करम सिंह पटेल पर भी पार्टी ने कार्रवाई की। करमसिंह पटेल तो उन 44 कांग्रेस विधायकों में शामिल थे, जिन्हें खरीदफरोख्त के डर से कांग्रेस बेंगलुरू ले गई थी।

बगावत के बावजूद चुने गए अहमद पटेल
कांग्रेस के 57 में से 14 विधायकों की बगावत के बावजूद अहमद पटेल लगातार पांचवीं बार राज्यसभा के लिए चुने जाने में कामयाब रहे। पटेल को 44 और कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए बलवंत सिंह को 38 वोट मिले। इन्हीं के बीच कड़ा मुकाबला था। अहमद पटेल के लिए यह जीत इसलिए अहम थी क्योंकि 1977 में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस विरोधी लहर में भी वे भरूच से सांसद बने थे। इस बार कांग्रेस में फूट के बावजूद फिर 'चाणक्य' साबित हुए।

2 वोट रद्द हुए तभी जीते अहमद पटेल
पटेल को जीत के लिए 45 वोट चाहिए थे। पार्टी के 43 विधायकों ने उन्हें वोट दिए। जदयू और एनसीपी का भी 1-1 वोट मिलने की बात आई। यानी 45 वोट हो गए लेकिन जदयू का वोट किसे गया, इस पर संशय है। कांग्रेस ने अपने दो विधायकों के वोट रद्द करवाए, वह भाजपा को मिले थे। यह रद्द होने पर जीत के लिए 44 वोटों की जरूरत थी। इतने ही मिले।

क्यों चुनाव आयोग तक पहुंचा था वोटिंग का विवाद
गुजरात कांग्रेस के दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी। 2 सेकंड तक अमित शाह को बैलेट पेपर दिखाया। इसके बाद काउंटिंग आठ घंटे तक रुकी रही। नियम ये है कि राज्यसभा चुनाव में वोटर को बैलेट पेपर पार्टी के ऑथोाइज्ड पोलिंग एजेंट को दिखाना होता है। इसके बाद ही बैलेट बॉक्स में डालते हैं। हुअा ये कि राघवजी पटेल और भोलाभाई गोहिल ने दो सेकंड के लिए बैलेट पेपर अमित शाह की तरफ किया। कांग्रेस के पोलिंग एजेंट शक्ति सिंह ने यह देख लिया। पार्टी ने चुनाव आयोग से दोनों के वोट रद्द करने की मांग की। 

वोटिंग का वीडियाे कांग्रेस के समर्थन में था। रणदीप सुरजेवाला, पी चिदंबरम सहित 6 नेताओं ने तीन बार आयोग को दस्तावेज सौंपे। हरियाणा और राजस्थान में ऐसे ही मामलों का हवाला दिया। बीजेपी ने विरोध में पुख्ता दलीलों के बजाय सिर्फ काउंटिंग शुरू करने की मांग की। आयोग ने रात 11.40 बजे दो वोट रद्द कर गिनती शुरू करने के आदेश दिए। आठ घंटे बाद गिनती शुरू हुई। पहली बार रात 1.30 बजे तक राज्यसभा चुनाव की काउंटिंग रुकी रही। 4 घंटे में 2 दलों के 6-6 नेता और मंत्री 3-3 बार चुनाव आयाेग गए। कांग्रेस के छह नेता पहुंचे। भाजपा की ओर से छह केंद्रीय मंत्री गए। तीन सीटों पर हुए चुनाव में से बाकी दो पर अमित शाह और स्मृति ईरानी भी जीते हैं।

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