गोरक्षकों के हमले: अमित शाह ने दी दलील, REPORT ने बोलती बंद कर दी

Sunday, July 2, 2017

नई दिल्ली। भीड़ के खिलाफ अब तीखी प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। बीफ या गोरक्षा के नाम पर जिस तरह के हमले हो रहे हैं। देश उसे अस्वीकार करने लगा है। इसी बीच आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि इस तरह के हमले कांग्रेस के समय भी होते थे और मोदीकाल से ज्यादा हमले कांग्रेस काल में होते थे। इसी बीच एक रिपोर्ट सामने आ गई। इसके अनुसार मोदी राज में गोरक्षा के नाम पर होने वाले हमलों में 97% का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हिंदुओं में पवित्र माने जाने वाले गोवंशी पशुओं की सुरक्षा के नाम पर पिछले करीब आठ वर्षो (2010 से 2017) के दौरान स्वघोषित गो-रक्षकों द्वारा की गई हिंसा के 51 फीसदी मामलों में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया, जबकि इस तरह के 68 वारदातों में मरने वाले 28 भारतीय नागरिकों में 86 फीसदी पीड़ित मुस्लिम समुदाय के रहे।

इसी अवधि में देशभर की अंग्रेजी माध्यम की खबरों के विश्लेषण के आधार पर इंडियास्पेंड ने यह खुलासा किया है। इस तरह की हिंसा के 97 फीसदी मामले मई, 2014 में नरेंद्र मोदी के देश की केंद्रीय सत्ता में आने के बाद दर्ज किए गए हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान गो-रक्षा के नाम पर हुई 63 हिंसक वारदातों में से 32 वारदात ऐसे राज्यों में हुए, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता है।

52 फीसदी हिंसा के मामले अफवाहों पर आधारित 
बीते सात वर्षो के दौरान गो-रक्षा के नाम पर मारे गए 28 लोगों में से 24 व्यक्ति मुस्लिम समुदाय के हैं, जबकि इस दौरान 124 लोग इस तरह की हिंसा में घायल हुए। इंडियास्पेंड का विश्लेषण कहता है कि 52 फीसदी हिंसा के मामले अफवाहों पर आधारित रहे।

इंडियास्पेंड का विश्लेषण 
गौरतलब है कि हिंसा के मामलों से संबंधित राष्ट्रीय या राज्य के आंकड़ों में गो-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा या भीड़ द्वारा की गई हिंसा को अलग से वर्गीकृत नहीं किया जाता। इंडियास्पेंड का विश्लेषण देश में धर्म और गो-रक्षा के नाम पर लगातार बढ़ रही इस तरह की हिंसा के आंकड़ों का एकमात्र सांख्यिकीय दस्तावेज है।

गो-रक्षा के नाम हिंसा...साल 2017...सबसे बुरा साल 
गो-रक्षा के नाम होने वाली हिंसा के मामले में 2017 अब तक का सबसे बुरा वर्ष साबित हुआ है। मौजूदा वर्ष के शुरुआती छह महीनों में गो-रक्षा के नाम पर हिंसा के 20 मामले दर्ज किए गए हैं, जो बीते वर्ष (2016) से 75 फीसदी अधिक हैं। 2010 के बाद से इस मामले में 2017 सबसे बुरा वर्ष साबित हुआ है।

गोहत्या के मामलों में सबसे ज़्यादा केस यूपी में
देश के 19 राज्यों में अब तक गो-रक्षा के नाम पर हिंसा के वारदात दर्ज किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 10 मामले, हरियाणा में नौ मामले, गुजरात में छह मामले, कर्नाटक में छह मामले, मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में चार-चार मामले सामने आए हैं। पूर्वोत्तर के सात राज्यों में सिर्फ असम में 30 अप्रैल, 2017 को गो-रक्षा के नाम पर दो व्यक्तियों की हत्या का मामला सामने आया है।

बीते आठ वर्षो के दौरान गो-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा के 63 मामलों में से 32 मामलों में (50.8 फीसदी) में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया, जबकि पांच मामलों (7.9 फीसदी) में दलित समुदाय को निशाना बनाया गया, जबकि तीन मामलों (4.8 फीसदी) में पीड़ित सिख या हिंदू रहे।

8 फीसदी मामलों में पुलिस अधिकारी और दर्शक पीड़ित 
इतना ही नहीं इस तरह की हिंसा के आठ फीसदी मामलों में पुलिस अधिकारी और दर्शक पीड़ित रहे, वहीं 27 फीसदी मामलों में महिलाओं को निशाना बनाया गया। पांच फीसदी मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, वहीं 13 मामलों (21 फीसदी) में पुलिस ने उल्टे पीड़ितों के खिलाफ ही मामले दर्ज कर दिए।

हमलावर या तो भीड़ या हिंदू संगठनों से जुड़े लोग
बीते आठ वर्षो के दौरान इस तरह की हिंसा के 63 में से 23 हमलों में हमलावर या तो भीड़ थी या बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और स्थानीय गो-रक्षक समितियों जैसे हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों का समूह था। इस अवधि में 10 जून, 2012 को गो-रक्षा के नाम पर हिंसा का पहला मामला पंजाब के मनसा जिले में स्थित जोगा कस्बे में एक कारखाने के पास से 25 पशुओं का कंकाल मिलने के बाद दर्ज किया गया। विश्लेषित आंकड़ों के मुताबिक, गो-रक्षा के नाम पर हुई हिंसा के 52 फीसदी मामलों के पीछे मात्र अफवाह थी।

गोवा में अमित शाह ने कुछ और ही दावा किया 
गोवा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि पार्टी ऐसे शासन को लेकर प्रतिबद्ध है जिसमें सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार हो। भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि गोवा में कांग्रेस की सरकार के दौरान वर्ष 1976 में गौवध पर प्रतिबंध लगाया गया था। यहां पेशेवरों के एक समूह के साथ चर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'जहां तक बीफ पर प्रतिबंध की बात है, इसे लागू करने वाली भाजपा नहीं है। गोवा में पहले से गो हत्या बंदी है।' उन्होंने कहा, 'यह वर्ष 1976 से यहां है और यह तब हुआ था जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन किसी ने कांग्रेस से सवाल नहीं पूछा।' 

यूपीए के समय भीड़ ज्यादा हिंसक थी
दूसरी तरह देश में भीड़ के पीट-पीट कर मार डाले जाने की घटना को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सरकार का बचाव किया है। शाह ने कहा कि जब यूपीए की सरकार थी तो उस दौरान भीड़ के पीट कर मार डालने की घटनाएं ज्यादा हुई थी लेकिन तब किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया। शाह ने कहा, 'हमारे तीन साल के कार्यकाल के मुकाबले 2011-13 के बीच देश में भीड़ की तरफ से पीट कर मार डाले जाने की घटनाएं ज्यादा हुई लेकिन कभी यह सवाल नहीं उठा।'

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