POLICE की पूरी फौज तैनात, मेधा पाटकर ने किया उपवास का ऐलान

Tuesday, July 25, 2017

भोपाल। धार एवं बड़वानी की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव बीपी सिंह ने दोनों जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया था कि जितनी पुलिस चाहो ले जाओ, लेकिन आंदोलनकारियों को हटाओ। इसी के साथ कलेक्टरों ने प्रदर्शनकारियों के सामने पुलिस की पूरी फौज खड़ी कर दी। इस कदम से गुस्साईं नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने मंगलवार को मध्यप्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ऐलान किया है कि वे 27 जुलाई से सामूहिक अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठेंगीं। 

पाटकर ने पत्रकारों से चर्चा में यह आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार गुजरात को लाभ पहुंचाने के लिए बांध के डूब प्रभावित हजारों ग्रामीणों का दमन कर रही है। बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए सरकार डूब प्रभावितों को जबरन हटा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें हटाने के लिए हजारों की संख्या में पुलिस बल बुला लिया है और उन्हें टीन शेड बनाकर उसमें अस्थाई रूप से ठहराया जा रहा है।

-उन्होंने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के फैसले को आधार बताकर डूब प्रभावितों को हटाने के लिए हिंसक रुख अपना रही है और उन्हें 31 जुलाई तक हर हाल में घर खाली कराने में जुटी है। उन्होंने कहा कि बिना पुनर्वास के सरकार को घर खाली कराने का आदेश नहीं है। लेकिन, यह दमनकारी सरकार को न तो किसी कानून की परवाह है और न ही किसी आदेश की। 

पाटकर ने कहा कि सरकार के रवैये के चलते नर्मदा घाटी में पिछले 17 दिनों से 21 जगहों पर क्रमिक अनशन पर ग्रामीण बैठे हैं, लेकिन सरकार उनसे बात तक करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को सरदार सरोवर से एक बूंद पानी का लाभ न होते हुए मात्र गुजरात को पानी की जरूरत मानकर विकास की परियोजना बनाकर प्रदेश के जीते जागते गांवों की आहुति देने में सरकार जरा भी नहीं हिचकिचा रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाए कि शासकीय राजपत्र सूची में 141 गांव के 18386 परिवारों को गांव छोडऩा होगा, परन्तु इस सूची में गांव में न रहने वाले, दशकों पहले गांव छोड़कर चले गए और बैकवाटर लेवल बदलकर जिन्हें डूब से बाहर कर दिया गया है, उनके नाम सम्मिलित हैं। जबकि वर्षों से निवासरत, घोषित विस्थापितों को छोड़ दिया गया है।

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