फर्जी चेक के जरिए आपका BANK ACCOUNT भी हो सकता है ठगी का शिकार

Friday, July 21, 2017

इंदौर। हाईटेक कार्यशैली, ऑनलाइन बैकिंग का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन बैंक के ग्राहकों के साथ ठगी के नए-नए मामले भी सामने आ रहे हैं। शातिर बदमाश बैंकों का डाटा हैक कर ऐसे खातेदारों को निशाना बना रहे हैं, जिनके खातों में राशि ज्यादा है लेकिन खातों से मोबाइल नंबर लिंक नहीं है। ऐसे खातों से फर्जी चेक से आरटीजीएस कराकर राशि निकालना ठगों के लिए आसान है। हाल ही तिलक नगर क्षेत्र की एक बैंक का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी चेक का इस्तेमाल कर 9 लाख रुपए निकालने की कोशिश की गई, लेकिन बैंककर्मियों की सक्रियता से ठगी नहीं हो पाई और अब सीसीटीवी फुटेज से बदमाश की शिनाख्त की जा रही है। फिलहाल बैंक अपने स्तर पर जांच कर रही है। मामला पुलिस को सौंपा जा सकता है।

देवास निवासी प्रीति चौधरी का एक चेक सिकरने के लिए तिलक नगर स्थित बैंक शाखा में आया। राशि कोलकता निवासी राहुल डे के खाते में आरटीजीएस होना थी। महिला ने खाता देवास स्थित शाखा में ट्रांसफर करा लिया था, लेकिन चेक इंदौर की शाखा में आया तो बैंककर्मियों को भी शंका हुई।

दरअसल, यदि खाता ट्रांसफर भी हो जाए लेकिन अकाउंट नंबर नहीं बदलता तो रिकॉर्ड में भी वह पुरानी शाखा ही दर्शाता है। खाते में मोबाइल नंबर भी लिंक नहीं था। महिला की माता का खाता भी उसी बैंक में था। उनसे बातचीत कर अफसरों ने प्रीति से संपर्क किया तो उन्होंने चेक भेजने से इनकार कर दिया। अब बैंक में खंगाला जा रहा है कि कहीं अन्य ग्राहक भी इसी तरह ठगी का शिकार तो नहीं हुए।

अल्ट्रा वायलेट लाइट में भी नकली चेक पकड़ना आसान नहीं
ठगी के लिए जिस फर्जी चेक का इस्तेमाल हुआ, वह हूबहू असली जैसा है। मामला सामने आने के बाद बैंक अफसरों ने अल्ट्रा वायलेट लाइट में चेक की जांच की तो उसमें सीटीएस नंबर और बारकोड भी मिले। जांच में भी चेक को पकड़ पाना मुश्किल हो रहा था। बैंक ने महिला को जो चेक बुक दी थी, वह काफी पुरानी थी, जबकि बैंकों में नई चेक बुक सॉफ्टवेयर के हिसाब से डिजाइन की जाती है, ताकि आरटीजीएस के माध्यम से भी पैसा दूसरे खातों में जा सके। चेक पर हस्ताक्षर भी हूबहू खातेदार के जैसे थे। इस बारे में खातेदार प्रीति का कहना है कि उन्होंने किसी को भी चेक नहीं दिया। शुक्र है मेरे खाते से राशि नहीं निकली।

बड़ी राशि में कन्फर्म के बगैर RTGS नहीं
50 हजार या एक लाख रुपए से अधिक की राशि के चेक आने पर खातेदार से कन्फर्म किए बगैर राशि दूसरे खाते में आरटीजीएस नहीं की जाती है। जिस खाते से पैसे निकालने की कोशिश की गई, उसमें फोन नंबर लिंक नहीं था। संभवतः इसलिए ठग ने इस खाते को चुना, क्योंकि खाते से राशि निकलने से पहले ही एसएमएस के जरिये खातेदार को जानकारी मिल जाती है। सभी बैंक शाखाओं को हाल ही में निर्देश जारी किए गए हैं कि कि बड़ी राशि के चेक आने पर पहले खातेदार से तस्दीक करें। 
लोकरंजन, सहायक महाप्रबंधक, बैंक आंचलिक कार्यालय

इस तरह ठगी से बचें ग्राहक
मोबाइल नंबर खातों से लिंक कराएं, ताकि खाते में राशि आने और निकलने की जानकारी एसएमएस से मिल सके।
बैंकों के काम खुद ही करें, किसी को पासबुक न दें।
मोबाइल पर कॉल आने पर खाते या एटीएम से जुड़ी राशि शेयर न करें।

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