संसद में हंगामें निलम्बन और प्रणब दा की नसीहत

Wednesday, July 26, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। बड़ी विचित्र सी स्थिति है, लोकसभा में कांग्रेस के 5 सांसद सदन में हंगामा करने के कारण निलम्बित हैं। कांग्रेस की और से बार-बार अपील की जा रही है कि इन सांसदों का निलम्बन समाप्त किया जाये। इन हंगामों की कोई हद और कोई हल होना चाहिए। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नसीहत भरा अंतिम भाषण जिसकी स्याही अभी सूखी भी नहीं है, सबके लिए गौर करने लायक है। उनके इस भाषण में संसदीय प्रणाली की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ा कर उसे उसके ही मानदंडों पर विश्वसनीयता देने की एक अभिभावकीय चिंता है। प्रणब दा याद दिलाते हैं कि संसद-लोक सभा और राज्य सभा-की 788 सीटों में पूरा देश समाया हुआ है| इसलिए एक-एक सांसद अहम हैं।

सारे सांसदों को उनकी इस बात पर गौर करना चाहिए कि देश का वर्तमान और भविष्य तय करने की उनकी साझा जवाबदेही है। इसके लिए सबसे पहले तो संसद के सत्रों का चलना जरूरी है, इसे पक्ष-विपक्ष को मिल कर सुनिश्चित करना है। इसके चलते मौजूदा 16वीं लोकसभा का अब तक 20 प्रतिशत से अधिक समय हंगामे में नष्ट हो गया है। इसके पहले 15वीं लोक सभा का 40 प्रतिशत समय हंगामे और स्थगन में नष्ट हो गया था।

जन हित-देश हित के मसलों पर संवाद, मत-भेद और फिर सहमति से निर्णय तो। किसी विधेयक के कानून बनने की सामान्य प्रक्रिया है। दुर्भाग्य से यह प्रक्रिया हंगामे की भेंट हो जाती है या फिर इक्के-दुक्के सांसदों की मौजूदगी में उसको पूरा किया जाता है। संसदीय कार्यवाही देख रहे किसी भी व्यक्ति को यह मजाक लग सकता है। जटिलतम मसले पर भी बहस में गिनती के सांसद भाग लेते हैं और उनमें भी बहस का बौद्धिक स्तर औसत के पार नहीं जा पाता।

परिणाम यह होता है कि जल्दबाजी में पारित हुए विधेयक में बहुत सारी कमियां रह जाती हैं, जिनके चलते नौकरशाही और न्यायपालिका को दखल का मौका मिल जाता है। प्रणब दा बहस में भाग ले रहे सांसदों को विषय की समझदारी बढ़ाने का आग्रह करते हैं। अध्यादेश संस्कृति का विकास भी यहीं से होता है। मौद्रिक विषय पर तो बहस होनी ही चाहिए। प्रणब दा की सीख समझना चाहिए। ऐसे मसले को अध्यादेश के जरिये लाने से बचना चाहिए। यह प्रवृति लोकतंत्र के लिए घातक है।

प्रणब मुखर्जी परेशान होकर कह गये है कि अध्यादेश का इस्तेमाल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किया जाए, वह भी उस मामले की संसदीय समिति या उपसमिति को भरोसे में लेकर मान्य प्रक्रिया में उसे शामिल करते हुए। पक्ष और प्रतिपक्ष के लिए संसद का चल रहा मॉनसून सत्र, विदा होते राष्ट्रपति की सलाह पर अमल करने का बढ़िया मौका है। इस अवसर का लाभ लेने में माननीय सांसदों को चूकना नही चाहिए।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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