कश्मीर में भारतीयों के लिए नौकरी, जमीन और नागरिकता क्यों नहीं: सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Monday, July 17, 2017

नई दिल्ली। एनजीओ वी द सिटीजंस ने सुप्रीम कोर्ट में धारा 35ए को चुनौती दी है। इसके खिलाफ जम्मू कश्मीर सरकार ने हलफनामा पेश किया है परंतु मोदी सरकार तटस्थ हो गई है। उसने कोई हलफनामा पेश नहीं किया। बता दें कि यही वो धारा है जो भारत के नागरिकों को कश्मीर में सरकारी नौकरियां प्राप्त करने, वहां की नागरिका प्राप्त करने एवं वहां जमीन या संपत्ति खरीदने से रोकती है जबकि कश्मीर के नागरिकों को भारत के दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरियां प्राप्त करने, वहां की नागरिका प्राप्त करने एवं वहां जमीन या संपत्ति खरीदने की स्वतंत्रता देती है। 

धारा 35ए को असंवैधानिक करार देने की मांग को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख रखने से बचने की कोशिश की। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस मसले पर केंद्र सरकार कोई हलफनामा नहीं देना चाहती है।

दो सदस्यीय चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मसले को सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बेंच को रेफर कर दिया। सुनवाई के दौरान वेणुगोपाल ने कहा कि ये मामला बहुत संवेदनशील है और इस पर बड़ी बहस होनी चाहिए। इसमें संवैधानिक मसले जुड़े हुए हैं, इसलिए इसे बड़ी बेंच को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया जाना चाहिए, जिसके बाद कोर्ट ने तीन जजों की बेंच को सुनवाई के लिए रेफर कर दिया। दिल्ली के एक एनजीओ वी द सिटिजंस ने एक जनहित याचिका दायर कर धारा 35ए को असंवैधानिक करार देने की मांग की है।

यह कानून जम्मू कश्मीर के मूल निवासियों को छोड़कर अन्य भारतीयों को वहां अचल संपत्ति खरीदने, राज्य सरकार की नौकरी पाने और राज्य में बसने से रोकता है। याचिका में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर सरकार धारा 35ए और धारा 370 की आड़ में दूसरे राज्यों के लोगों को जमीन खरीदने से रोकती है। इस मामले में जम्मू-कश्मीर राज्य सरकार ने अपने हलफनामा में इन धाराओं का समर्थन किया है। हलफनामा में कहा गया है कि धारा 35ए भारतीय संविधान की एक स्थायी व्यवस्था है। भारत के राष्ट्रपति ने 1954 में अपने आदेश में इसकी पुष्टि की है। इसलिए इसे चुनौती नहीं दी जा सकती है।

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