सारी दुनिया देख रही है भारत और चीन के बीच क्या होगा

Saturday, July 22, 2017

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच धमकी भरे बयानों की श्रृंखला लगातार जारी है। तनाव बढ़ता जा रहा है और अब सारी दुनिया का ध्यान इस तनाव की तरफ आकर्षित हो गया है। पाकिस्तान चाहता है कि यह तनाव और ज्यादा बढ़े और युद्ध के हालात बन जाए। वो चीन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साफ जाहिर कर चुका है। इधर इसराइल समेत कुछ अन्य देशों ने भी भारत के प्रति अपनी दोस्ती जाहिर कर दी है। हाल ही में अमेरिका की तरफ से संकेत आए थे कि यदि चीन भारत पर हमला करता है तो अमेरिका भी चुप नहीं बैठेगा परंतु आज अमेरिका से शांति का संदेश आ गया है। पेंटागन ने कहा है कि भारत और चीन सीधे बातचीत के जरिये तनाव कम करें और इसमें किसी तरह की जोर-जबरदस्ती न हो। इससे पहले भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने प्रस्ताव रखा था कि दोनों देश की सेनाएं एक साथ विवादित स्थल से वापस चली जाएं। अजीब बात यह है कि इस विवाद में चीन की सरकार नहीं बल्कि चीन का अखबार भाग ले रहा है। चीन सरकार की तरफ से अधिकृत बयान नहीं आ रहे। एक अखबार धमकी भरी संपादकीय छाप रहा है जिसे चीन का अधिकृत बयान माना जा रहा है। 

इससे पहले, यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने भी इस मसले पर बयान दिया था, लेकिन पेंटागन ने दोनों देशों को जोर-जबरदस्ती से मुक्त माहौल में बातचीत की सलाह दी है। बता दें कि डोकलाम में 36 दिन से भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं। ये इलाका एक ट्राई जंक्शन (तीन देशों की सीमाएं मिलने वाली जगह) है। चीन यहां सड़क बनाना चाहता है, लेकिन भारत और भूटान इसका विरोध कर रहे हैं।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक यूएस के डिफेंस डिपार्टमेंट के स्पोक्सपर्सन गैरी रॉस ने शनिवार को कहा, "हम भारत और चीन की सरकारों को इस बात के लिए एनकरेज करते हैं कि दोनों जोर-जबरदस्ती से मुक्त माहौल में सीधी बातचीत करें और तनाव को कम करने पर फोकस करें। हम इस मामले में अटकलें नहीं लगाना चाहते।" हालांकि पेंटागन ने भारत-चीन में से किसी का पक्ष लेने से इनकार किया है।

यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने क्या कहा था?
यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की तरफ से शुक्रवार को कहा गया था कि अमेरिका, भारत-चीन के बीच बिगड़ते हालात पर करीब से और बेहद सावधानी से नजरें रख रहा है। अमेरिका चाहता है कि दोनों देश आपस में सीधे बातचीत के जरिये विवाद हल करें। स्टेट डिपार्टमेंट की स्पोक्सपर्सन हीथर नॉर्ट ने कहा था, "भारत और चीन को शांति के लिए मिलकर काम करना चाहिए।"

27-28 जुलाई की तारीख महत्वपूर्ण 
नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल जुलाई के आखिर में BRICS मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग जाएंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान डोभाल चीनी पक्ष से सिक्किम बॉर्डर विवाद पर बात कर सकते हैं। ब्रिक्स मीटिंग 27-28 जुलाई को होनी है। ये तारीख महत्वपूर्ण है। इस दिन यह विवाद एक टर्न ले सकता है। काफी संभावनाएं हैं कि दोनों देश कोई रास्ता निकाल लेंगे। 

क्या है डोकलाम विवाद?
ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का कहना है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है। भारत ने 16 जुलाई को सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि वह इस इलाके में पीछे नहीं हट सकता। डोकलाम में चीन को सड़क बनाने नहीं दिया जाएगा। भारत ने चीन की इस वॉर्निंग को नजरअंदाज कर दिया है कि भारत अपने सैनिक वहां से तुरंत वापस बुला ले, नहीं तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 

इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से कहा गया है कि जब तक चीन के सैनिक सड़क निर्माण से पीछे नहीं हटते, भारतीय सैनिक नॉन काम्बैट मोड में डोकलाम में डटे रहेंगे। उधर, चीनी मीडिया ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत की पूर्व शर्त भारतीय सैनिकों का डोकलाम से पीछे हटना है। इस मामले में मोलभाव के लिए कोई जगह नहीं है।

बॉर्डर पर दोनों देशों के सैनिक 100 मीटर पर आमने-सामने
इंडियन आर्मी के जवानों ने चीनी सैनिकों के अड़ियल रवैये को देखते हुए सिक्किम के डोकलाम इलाके में 9 जुलाई से अपने तंबू गाड़ रखे हैं। बॉर्डर पर दोनों देशों की 60-70 सैनिकों की टुकड़ी 100 मीटर की दूरी पर आमने-सामने डटी हैं। दोनों ओर की सेनाएं भी यहां से 10-15 km की दूरी पर तैनात हैं।

भारत का क्या है तर्क?
नई दिल्ली ने चीन को बताया है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा। इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।

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