दबंगों ने दलितों के शौचालय तोड़ दिए और खुले में भी नहीं जाने देते

Monday, July 17, 2017

भोपाल। छतरपुर में दबंगों के जुल्म का शिकार हो रहे दलितों की अजीब समस्या सामने आई है। दलितों ने कलेक्टर से शिकायत की है कि दबंगों ने उनके शौचालय तोड़ दिए और खुले में शौच के लिए भी नहीं जाने देते। दलितों का कहना है कि इस दहशत के चलते हम अपने घरों के पीछे मिट्टी के बर्तन का उपयोग कर रहे हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम गांव में पहुंच चुकी है। 

मोदी का स्वच्छ भारत अभियान
भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की। उन्होंने अपील की कि लोग खुले में शौच बंद करें। जो खुले में शौच के लिए जाते हैं, उन्हे ऐसा करने से रोकें। अपने घरों में शौचालय बनवाएं। नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों ने यह सुनिश्चित किया कि उनका क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त हो। कर्मचारियों ने लोगों को खुले में शौच करने से रोका। 

दलितों ने दबंगों को चिढ़ाया
छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बराखेरा गांव में कुछ दलितों ने इस योजना के बहाने गांव के दबंगों को चिढ़ाने की योजना बना ली। उन्होंने अपने घरों में शौचालय तो बनवाए लेकिन कुछ इस तरह से कि शौचालयों का दरवाजा दबंगों के घर की तरफ खुले। स्वभाविक है कि इस तरह के निर्माण विवाद का कारण बनने वाले थे। 

दबंगों ने तोड़ डाले दलितों के शौचालय
यह कुछ इस तरह का तनाव था कि गांव का दबंग पटेल समुदाय प्रशासन से शिकायत ही नहीं कर सकता था। अत: दबंग एकजुट हुए तो ऐसे सभी शौचालय तोड़ डाले जिनके दरवाजे दबंगों के घर की तरफ खुलते थे। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उन दलितों के यहां शौचालय अभी भी सुरक्षित हैं जिनके दरवाजे किसी दूसरे के घर की तरफ नहीं खुलते। 

ग्राम पंचायत खुले में शौच नहीं करने देती
गांव के हालात के बारे में बताते हुए चंपा कहती हैं, 'पटेल समुदाय के लोग हमें शौच के लिए बाहर जाने पर पीटने की धमकी दे रहे हैं। वे न तो हमें हमारे शौचालय में जाने दे रहे हैं और न ही खुले में जाने देते हैं। हम अब क्या कर सकते हैं?' दरअसल, वो पटेल समुदाय के लोग नहीं बल्कि ग्राम पंचायत के लोग हैं। इस गांव का सरपंच भी पटेल है। 

प्रशासनिक अधिकारी निकाल रहे हैं बीच का रास्ता
तनाव की खबर प्रशासन तक पहुंची तो शनिवार को अधिकारियों की एक टीम गांव में पहुंची ताकि शौचालयों का दोबारा निर्माण कराया जाए। इस गांव में प्रजापति समुदाय के आधा दर्जन परिवार हैं। यह मामला अत्याचार का नहीं बल्कि जातिवादी तनाव का है। अधिकारी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि शौचालय भी बन जाएं और वो पटेलों के घर की तरफ ना खुलें। 

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