अब रेल टिकट दोगुने दामों में बेचने की योजना

Thursday, July 6, 2017

नई दिल्ली। भारतीय रेल का इतिहास काफी पुराना है। दस्तावेज गवाह हैं कि रेल ने मालगाड़ियों से पैसा कमाया और यात्रियों को बेहद सस्ती रेल यात्राएं उपलब्ध कराईं परंतु अब सरकार दुकानदार हो गई है। वो मालगाड़ियों से मुनाफा तो कमाना चाहती है परंतु उसका लाभ रेल यात्रियों को देने के लिए तैयार नहीं है। मोदी सरकार ने इस दिशा में दूसरा कदम आगे बढ़ा दिया है। सबसे पहले रेल टिकट पर जनता को यह जताया गया था कि आपकी यात्रा के लिए 43 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। अब रसाई गैस की तरह 'गिव अप' स्कीम लागू कर दी। अत: यदि आप सक्षम हैं तो पूरी कीमत अदा करके टिकट लें। इस तरह रेल टिकट के दाम दोगुने हो जाएंगे। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और फीचर्स आएंगे और रेल टिकट से 43 प्रतिशत की कथित सब्सिडी बंद कर दी जाएगी। जैसा कि रसोई गैस के मामले में हो रहा है। 

रेल मंत्रालय ने इसके लिए टिकट बुकिंग फॉर्म में अलग से कॉलम बनाए जाने की मंजूरी दे दी है। इस कॉलम में यह पूछा जाएगा कि आप रेल टिकट पर सब्सिडी लेना चाहते हैं या नहीं। जो लोग इस पर सब्सिडी लेने पर टिक लगाएंगे उनको सब्सिडाइज्ड रेट पर रेल टिकट मिलेगा और जो लोग सब्सिडी नहीं लेना चाहेंगे उनको फुल रेट पर टिकट मिलेगा। इस तरीके की व्यवस्था रेल टिकट की ऑनलाइन बुकिंग के लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर भी दी जाएगी। रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सब्सिडी लेने या ना लेने के विकल्प की व्यवस्था अगले महीने से शुरू कर दी जाएगी।

दोगुना हो जाएंगे दाम
दरअसल रेलवे ने पैसेंजर किराए में घाटा दिखाया है और इस पर तकरीबन 43 फीसदी सब्सिडी दी जाने की बात की है। रेलवे का दावा है कि 100 रुपये की यात्रा पर सिर्फ 57 रुपये की कमाई होती है। सरकार ने इस अधूरे आंकड़े को पिछले 2 सालों में बार बार बताया है। ताकि आम जनता मानसिक रूप से तैयार हो जाए। 

थर्ड एसी को नहीं दी जाती सब्सिडी
रेलने ने थर्ड एसी को पहले से ही सब्सिडी बंद कर रखी है। इसके अलावा सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी भी फायदे में ही चल रहे हैं। अब केवल जनरल और स्लीपर क्लास शेष रह गए हैं जहां कथित सब्सिडी दी जा रही है। जिसे खत्म करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसका सीधा असर मिडिल क्लास पर पड़ेगा। 

सब्सिडी शब्द ही गलत है
रेल किराए में सरकार या रेल मंत्रालय बार बार सब्सिडी शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि सैद्धांतिक तौर पर यह शब्द ही गलत है। सब्सिडी तब होती जब सरकार अपने खजाने से घाटा पूरा करती परंतु यहां तो रेल मंत्रालय मालगाड़ी और दूसरे माध्यमों से मोटा माल कमा रहा है। आॅनलाइन टिकट बुकिंग के कारण कर्मचारियों की जरूरत ही नहीं रही। उनका वेतन बच रहा है। इधर कमाई बढ़ रही है। 

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें


खबरें जो आज भी सुर्खियों में हैं

Trending

Popular News This Week