मप्र में अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाला: जरूरत 41 हजार की, नियुक्तियां 75 हजार

Sunday, July 23, 2017

भोपाल। मप्र में पिछले कुछ सालों से अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाला चल रहा है। स्थानीय नेताओं एवं पॉवरफुल अफसरों के कहने पर शासकीय स्कूलों में आवश्यकता ना होने पर भी अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई है। मप्र में कुल 41,205 पद रिक्त हैं परंतु रिकॉर्ड बताते हैं कि 75 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षकों की भर्तियां की गईं। सवाल यह है कि वो 34 हजार अतिथि शिक्षक कौन हैं, जिन्हे अनावश्यक नियुक्तियां दी गईं। क्या इसलिए ताकि संविदा शिक्षक भर्ती में उन्हे लाभ मिले या फिर गुरूजी की तरह सरकार सीधे संविदा शिक्षक बना दे। 

शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी तब लगी जब संविदा शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए फाइनली रिक्त पदों की जानकारी जुटाई गई। इसी दौरान युक्तियुक्तकरण किया गया तो सारी कुण्डली सामने आ गई। पता चला कि मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल 41,205 शिक्षकों की कमी है। इधर अतिथि शिक्षकों का भर्ती रिकॉर्ड बताता है कि 16 में 75 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई। यह अंतर लगभग दोगुने का है। इतने बड़े पैमाने पर घोटाला क्यों हुआ, कैसे हुआ, किसने किया और क्यों किया। इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाना जरूरी है। 

ऐसे हुआ भर्ती घोटाला 
जनप्रतिनिधियों के दबाव और अपनों को उपकृत करने एक विषय का शिक्षक होने के बावजूद उसी विषय का अन्य अतिथि शिक्षक रख लिया गया। जिन स्कूलों में पिछले सालों में बच्चों की दर्ज संख्या अधिक होने से 4 अतिथि शिक्षक रख लिए गए। बाद में दर्ज संख्या घटने के बाद भी अतिथियों की संख्या नहीं घटाई गई। बल्कि इस अवसर को आधार बनाकर नियुक्तियों के लिए रिश्वत वसूली की गई। स्कूलों में शिक्षक और प्राचार्य दूसरे कामों में व्यस्त रहे और पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक रख लिए। शिक्षक, अध्यापक और कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों की जगह ज्यादातर अतिथि शिक्षकों को नियुक्त किया गया है, क्योंकि पदाधिकारी संगठन का डर दिखाकर दवाब बनाते हैं एवं स्कूलों में पढ़ाने के लिए उपस्थित नहीं होते। 

35 हजार अतिथि शिक्षक ही डीएड-बीएडधारी
75 हजार अतिथि शिक्षक स्कूलों के रिकॉर्ड में दज हैं परंतु इनमें से मात्र 35 हजार अतिथि ही डीए-बीएड डिप्लोमा प्राप्त हैं। अतिथि शिक्षकों को 3500 से 4500 रुपए तक मानदेय मिलता है। बावजूद इसके भर्ती घोटाला क्यों किया गया। यह बड़ा सवाल बन गया है। 

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