YASHODA SEEDS: बालाघाट में गुपचुप, सिवनी, मंडला और छिंदवाड़ा में खुलेआम बिक्री जारी

Tuesday, June 20, 2017

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। बालाघाट में तमाम विवादों के बाद यशोदा सीड्स के बीज की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। बावजूद इसके यशोदा के बीज खुलेआम बेचे जा रहे हैं। किसानो को गांव में जाकर सप्लाई किया जा रहा है और बिल भी नहीं दिया जा रहा। इसके अलावा पड़ौसी जिले सिवनी, मंडला और छिंदवाड़ा में भी यशोदा के बीजों की बिक्री जारी है। यहां कोई प्रतिबंध नहीं है। सवाल यह है कि यह कैसा कानून है। यदि ​बीज खराब है तो पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इस तरह कार्रवाई की खानापूर्ति करने से किसान को लाभ नहीं होने वाला। 

गत वर्ष महाराष्ट हिंगणघाट की यशोदा सीड्स कंपनी के द्वारा बेचे गये धान बीज में अंकुरण ना होने से उसकी पर सिंतबर 2016 तक रोक लगा दी गई थी। सांसद की शिकायत पर जिला मंत्रणा समिति ने इस कंपनी को कालीसूची में दर्ज कराये जाने की अनुशंसा की। इसके बावजूद संयुक्त संचालक कृषि जबलपुर के द्वारा बीज कंपनी से सांठगांठ के चलते उस पर लगी बंदिश हटा दी गई। रोक हटाते ही जिले में यशोदा सीड्स कंपनी का 100 टन धान बीज बिक्री के लिये व्यापारियों के यहां पहुच गया है। सांसद भगत की आपत्ति के चलते संयुक्त संचालक कृषि के आदेश पर पुन: रोक लगाते हुये यशोदा सीड्स की बिक्री को प्रतिबधित कर दिया गया।

चोरी छिपे इस कंपनी के बीज जिले में अभी भी बेचे जा रहे हैं। बिरसा दमोह में 40 क्विंटल बीज का स्टाक बरामद कर उसे जप्त कर लिया गया है तथा प्रशासन ने निर्देशित किया है कि जिले में जहां कही भी यशोदा कंपनी के बीज बेचे जा रहे है उसे जप्त कर विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायें। शासन की इस कार्यवाही के चलते यशोदा सीड्स कंपनी ने अपनी से जुडी अन्य कंपनीयों के नाम पर धानबीज बाजार में बेचने के लिये स्टाक कर दिया है।

कृषि विभाग ने इन कंपनीयों के धान बीज की प्रमाणिकता अकुंरण की क्षमता का परिक्षण नही किया गया ना ही मध्यप्रदेश शासन से उनकी बिक्री की अनुमति मिली है फिर भी धडल्ले से ऐसी बीज कंपनीयां अपने बीज बेचकर किसानों को लूट रही है।

बालाघाट जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां का किसान निरक्षर है। उन गांव में कंपनीयों के बीज बेचे जा रहे है जिनका व्यापारियों द्वारा बिल भी नही दिया जा रहा है। यदि उन बीजों से अंकुरण नही हुआ तो  किसान के पास आपत्ति दर्ज कराने कोई सबूत नही रहेगा। किसान को 3 महिने का इंतजार करना पडेगा तब तक किसान की किस्मत का फैसला हो जायेगा। तब उसे पता चलेगा की उसने जो बीज खरीदा था वह नकली था। बालाघाट जिला कृषि मंत्री का गृह जिला है इसके चलते नकली बीज, नकली रासयानिक खाद और नकली दवाईयां जिले में धडल्ले से बिक रही है। इसे कौन रोकगा। 

यह उल्लेखनीय है कि कलेक्टर व्ही किरण गोपाल के कार्यकाल में इसी तरह की लिखित शिकायत महाराष्ट की अमानक बीज निर्माता कंपनी के विरूद्ध की गई थी। जिसकी जांच पश्चात जिले के 50 से अधिक बीज व्यापारियों के लाईसेंस खारिज कर दिये गये थे तथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही किये जाने के निर्देश कलेक्टर द्वारा दिये गये थे लेकिन मंत्री के दबाव के कारण उन व्यापारियों के लाईसेंस सयुक्त संचालक कृषि जबलपुर के यहां अपील के माध्यम से पुन: बाहल कर दिये गये।

ये कैसा अन्धा कानून है की यशोदा सीड्स कंपनी के बीज का विक्रय बालाघाट जिले में प्रतिबंधित है लेकिन सिवनी, छिदंवाडा, मण्डला सहित प्रदेश के अन्य जिलों में धडल्ले से बेचे जा रहे है। जबकि पूरे प्रदेश में इस कंपनी के बीज बिक्री पर बंदिश लगाई जानी थी। क्या हर जिले का अपना अलग कानून है।

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