UP: आज भी हल में बैल की जगह जुत रहा है दिव्यांग किसान

Tuesday, June 20, 2017

लखनऊ। यूपी में गरीब किसानों की हालत दयनीय से भी बदतर होती जा रही है। कर्ज लेकर महंगी कारों में घूमने वाले फार्महाउस मालिकों की बात ना करें तो किसान आज भी हाड़तोड़ मेहनत ही कर रहा है। यह तस्वीर बिजनौर की है। यहां दिव्यांग किसान सीताराम कई सालों से बैल की जगह खुद जुतकर खेती कर रहा है। 8 बीघा के मालिक सीताराम के पास इतना पैसा नहीं है कि दूसरा बैल खरीद सके। यह तस्वीर आम किसान और जनता को भले ही विचलित कर दे, लेकिन सूबे के निजाम और लालफीताशाही के लिए यह कुछ खास नहीं है। यूं तो इनकी कार्यप्रणाली का यह मात्र एक नतीजा है जो इस रूप में आज हमारे सामने आ खड़ी हुई है। 

बिजनौर जिले का किसान सीताराम दिव्यांग होने बाद भी कई सालों से एक बैल के साथ खुद को जुआ में बांधकर अपना खेत जोत रहा है। गरीबी ने इतना मजबूर कर दिया है कि वह अपने आठ बीघे जमीन की जुताई के लिए न तो ट्रैक्टर का सहारा ले सकता है और न ही दूसरा बैल खिलाने की उसमें हैसियत है। लिहाजा जिले के सालमाबाद गांव का गरीब दिव्यांग किसान सीताराम कई वर्षो से 'बैल' बनकर अपना खेत जोत रहा है।

नहीं मिल रहा सरकारी लाभ
गरीब किसान के लिए सरकार द्वारा संचालित सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। अखिलेश सरकार के समय मिल रही पेंशन को भी योगी सरकार ने बंद कर दिया है। किसान सीताराम सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए कई बार अधिकारियों के पास जाकर गुहार भी लगा चुका है लेकिन लापरवाह अधिकारी सीताराम की बातों का अनसुना करके टालते आ रहे हैं। 

बैल बना सहारा
अपनी हैसियत के अनुसार मात्र एक बैल रखकर अपनी खेती कर रहा है। दूसरे बैल की कमी खुद पूरा करता हुआ हल से साथ जुत जाता है। गले में जुआ डाले एक बैल की सहायता से अपने पेट भरने भर की खेती किसी तरह से कर पा रहा है। घर में पत्नी है वह भी पति और बैल की सेवा में हमेशा साथ रहती है। कुदरत ने सीताराम से अपना ऐसा बदला चुकाया कि उसका एक हाथ खेती करते ही कट गया। बावजूद इसके सीताराम हार नहीं माना और लगातार अपना और पत्नी का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहा है।

क्या हुआ तेरा वादा
राज्य में योगी सरकार आने के बाद किसानों की कर्जमाफी का ऐलान कर भाजपा भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन किसानों को मुफलिसी से निकालने के लिए ये नाकाफी साबित हो रहे हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहा है। ग्रामीण अतुल कुमार की मानें तो सीताराम काफी समय से अपनी 8 बीघा जमीन खुद बैल बनकर हल से जोतता आ रहा है। इस गरीब दिव्यांग किसान ने कई बार सरकार के आला अफसरों से मदत के लिये गुहार भी लगाई, लेकिन इस किसानों को आज तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है।

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