रमजान के महीने में आने वाले त्यौहार हिंदुओं को भी चमत्कारी फल देते हैं

Friday, June 23, 2017

कैसी विडम्बना है की सभी को जीवन देने वाला और समय तथा त्योहार का निर्णायक एक ही है फ़िर भी लोगो मे मतभेद है। समय चक्र सूर्य और चंद्र से चलता है हिन्दू और मुस्लिम समाज मे सभी पर्व चंद्र तिथियों से ही मनाये जाते है एक तरह से दोनो समाज त्योहार के मामले मे चंद्र पर ही निर्भर है जबकि ईसाई समाज सूर्य की तारीखों तथा सौर मास को ही मानता है। समस्त संसार तथा ये पूरी हमारी आकाशगंगा सूर्य पर ही निर्भर है ऊर्जा का परम कारक नवग्रहों से अपनी परिक्रमा करवाता हुआ ब्रम्हान्ड के ऊर्जा के केन्द्र की परिक्रमा करता है इसका मतलब यह है की सूर्य की शक्ति ही संसार को चलाती है।

रमजान का महीना
रमजान का महीना हिन्दू महीनों के हिसाब से ज्येष्ठकृष्ण और आषाढशुक्ल माह के आसपास ही आता है। ज्येष्ठ का मतलब होता है बड़ा इस समय सूर्य सबसे ज्यादा गर्मी देता है। इस समय साधना करना कठिन होता है। इस माह मे हिन्दू लोग जल की आराधना करते हैं। क्योंकि इस समय पृथ्वी मे जल की कमी रहती है। इसी समय मुस्लिम रमजान तथा हिन्दू गंगादशहरा, निर्जला एकादशी जैसे पर्व जिसमे जल की महत्ता बताई गई है। कहते है एक तरह से यह समय जल और अग्नि की उपासना का है। पृथ्वी के इन दो तत्व की उपासना जातक को सभी तरह से अजेय तथा समर्थ बनाती है। 

मुस्लिमों के लिये रमजान सबसे ज्यादा पुण्यकारी है वहीं निर्जला एकादशी का फल वर्ष की सारी एकादशी के बराबर माना जाता है। एक तरह से यह मास प्रक्रति का सबसे कठिन मास है। जो सभी प्राणियों को जल और ऊर्जा का समन्वय सिखाता है। हिंदुस्तान और अरब जहां से इस्लाम आया वहां जल का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ और आषाढ़ के माह आदमी को जल का महत्व समझाता है। वैसे ही रमजान जातक को ईश्वरीय वरदान जल का महत्व समझाता है। कहते है जब जीव जल और ऊर्जा से त्रस्त होता है तो वह परेशान होकर इबादत या साधना के द्वारा ईश्वर या अल्लाह के बेहद करीब होता है क्योंकि अनुकूल मौसम मे जातक खा पी कर मस्त रहता है तथा प्रकृति भी उसे तकलीफ नही देती।

एक प्रकार से प्रकृति ही आदमी से इस समय यह इबादत करवाती है इस समय की गई पूजा साधना इतनी शक्तिशाली होती है की उसे वर्ष भर कोई साधना की आवश्यकता नही होती। हमे प्रकृति के एकमेव सर्वमान्य शक्ति तथा नियंत्रक को सभी का मालिक मानते हुए आपस मे भेद नही करते हुए सबसे प्रेम करना चाहिये तभी हमे शांति और सुकून मिलेगा और हम अल्लाह के करीब होंगे। अल्लहाद मतलब आनंद होता है।जब हम आनंद मे रहेंगे तो अल्लाह के क़रीब होंगे।
प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"
9893280184,7000460931

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें


खबरें जो आज भी सुर्खियों में हैं

Trending

Popular News This Week