अब आपके घर के पास खुलेगा PASSPORT सेवा केंद्र

Saturday, June 17, 2017

नई दिल्ली। आप भारत के किसी भी कौने में रहते हों, पासपोर्ट बनवाने के लिए आपको मीलों लंबा सफर तय नहीं करना होगा। आपके घर के आसपास अधि​कतम 50 किलोमीटर की दूरी पर आपको एक पासपोर्ट सेवा केंद्र मिल ही जाएगा। सरकार हर 5 किलोमीटर पर PSKs और POPSKs खोल रही है। लगभग हर पोस्ट आॅफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र बन जाएगा। सुषमा स्वराज ने शनिवार को 149 नए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) खोलने का एलान किया। इससे पहले 1st फेज में 86 POPSK खोले गए थे। बता दें कि ये एक्स्टर्नल अफेयर मिनिस्ट्री और पोस्ट डिपार्टमेंट का ज्वाइंट इनिशिएटिव है। 

सुषमा स्वराज ने कहा, "सत्ता में आने के बाद ही NDA ने नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स में 16 PSKs खोले हैं। अब PSKs और POPSKs की संख्या 251 हो गई है। इससे पहले पूरे देश में PSKs की संख्या केवल 77 थी। जब मैंने मिनिस्ट्री का चार्ज संभाला, तब पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने में सबसे बड़ी मुश्किल पासपोर्ट ऑफिस की दूरी थी। हमने तय किया है कि देश में किसी को भी पासपोर्ट हासिल करने के लिए 50 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।"

810 हेड पोस्ट ऑफिस की मैपिंग
सुषमा ने बताया, "विदेश मंत्रालय और पोस्ट डिपार्टमेंट मिलकर 810 हेड पोस्ट ऑफिस की मैपिंग का काम कर रहे हैं। इस स्कीम का दायरा बढ़ाने कोशिश की जा रही है। पोस्ट ऑफिस की मैपिंग के बाद 3rd फेज में और ज्यादा POPSKs खोले जाएंगे।"

Know India Programme का पोर्टल लॉन्च
सुषमा स्वराज ने Know India Programme (KIP) का पोर्टल भी लॉन्च किया। ये पोर्टल 18 से 30 साल के भारतीयों के लिए लॉन्च किया गया है। ओवरसीज इंडियन अफेयर्स की ज्वाइंट सेक्रेटरी वानी रोआ ने कहा, "KIP लॉन्च करने के पीछे मकसद ये है कि देश की यंग जेनेरेशन अपने देश की जड़ों के बारे में जानें। इस पोर्टल के जरिए इंट्रेस्टेड कैंडिडेट डायरेक्ट अप्लाई कर सकते हैं। इससे पहले प्रोग्राम में शामिल होने के लिए इंडियन हाईकमिश्नर और एम्बेसीज को ईमेल करना पड़ता था। KIP 2004 में शुरू हुआ था। 

इसके 40 एडिशन हैं और इसके तहत 1293 पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजन (PIO) ने इंडिया की विजिट की। इसके लिए गिरमिटिया कंट्रीज के PIOs को प्रेफरेंस दी जाती है। स्वराज ने कहा, "गिरमिटिया कंट्रीज का मतलब वो देश हैं, जहां ब्रिटिश लोग इंडियन लोगों को अपनी कॉलोनीज में ले गए थे। खासतौर पर अफ्रीका और कैरेबियन देशों में एग्रीमेंट के तहत इन लोगों ले जाया गया था।

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