ONDOOR के गोदाम में आग: हादसा या साजिश

Monday, June 12, 2017

भोपाल। जेके रोड भरत नगर में स्थित ऑन डोर के गोडाउन (मदर फीडर) में रविवार तड़के लगी आग का मामला अब संदिग्ध हो गया है। पहले इसे हादसा माना जा रहा था परंतु अब बीमा क्लैम वसूली के लिए एक साजिश का संदेह भी जताया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण है हादसे की टाइमिंग। ऑनडोर प्रबंधन छह बजे आग लगना बता रहा है जबकि फायरबिग्रेड टीम पांच बजे। दोनों की टाइमिंग में 1 घंटे का अंतर है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पिपलानी पुलिस के अनुसार जेके रोड भरत नगर के पास आनडोर कंपनी का मदर फीडर (गोडाउन) है। जहां से रोजाना कंपनी के 22 आउटलेट में सामान की सप्लाई की जाती है। रविवार सुबह 5ः40 बजे सुरक्षाकर्मियों ने गोडाउन से धुंआ और आग लपटों को उठते देखा और इसकी सूचना कंपनी के अफसर और अपनी सिक्योरिटी के सुरक्षा अधिकारी को दी। इसके बाद तत्काल आगजनी की सूचना फायर बिग्रेड और पुलिस को दे दी गई। आग लगने का कारण शार्टसर्किट बताया जा रहा है। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग को काबू करने में फायर कर्मचारियों को तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया।

पूरे गोडाउन में फैल गई थी आग
शिफ्ट इंचार्ज असगर अली ने बताया कि सुबह छह बजे के करीब फायर बिग्रेड मौके पर पहुंचना शुरू हो गई थी। आग पर काबू करने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन की आग लपटें बढ़ती ही जा रही थी। आग ने पूरे गोडाउन को अपनी चपेट में ले लिया था। गोविंदपुरा , पुल बोगदा, फतेहगढ़ सहित ज्यादातर फायर बिग्रेड को मौके पर बुला लिया गया था। आग की लपटों को बढने के कारण भेल के फायर अमले को भी बुलाया गया।

आधे घंटे तक आती रही धमाकों की आवाज
घटना के समय आनडोर गोडाउन की सुरक्षा में गामा सिक्योरिटी एजेंसी के चार सुरक्षा गार्ड प्रमोद मालवीय, दशरथ सिंह, एतार सिंह, इरफान खान तैनात थे। इनमें एतार और दशरथ सिंह को सबसे पहले धुआ निकलते देखा था। इन दोनों ने ही सबसे पहले आगजनी की सूचना दी। एतार सिंह का कहना था कि आधे घंटे तक गोडाउन के अंदर से धमाकों जैसी आवाज आ रही थी। उससे पहले पांच बजे सब्जी वाले आ गए थे। उन्होंने भी गोडाउन में भीषण आग लगने की जानकारी दी। खाद्य तेलों व स्प्रे ने आग को और भड़का दिया। गोदाम में किराने के सामान के साथ भारी मात्रा में खाद्य तेल, स्प्रे सहित अन्य तैलीय पदार्थ का स्टॉक था। आग ने पूरे स्टोर को अपने कब्जे में ले लिया था। तैलीय पदार्थ, स्प्रे, शैंपू, के अधिकांश स्टॉप प्लॉस्टिक के डिब्बों व बॉटलों में होने के कारण आग बहुत तेजी से फैली। आग लगने से करीब 35 हजार स्क्वॉयर फीट में बना गोडाउन पूरी तरह से जलकर खाक होकर जमीदोज हो गया।

35 कर्मचारियों के 15 फायर बिग्रेड, 60 फेरे लगाए
आग बुझाने के लिए के लिए करीब 35 फायर कर्मचारियों को लगाया गया था। इसमें 15 फायर बिग्रेड नगर निगम भोपाल की थी। इन फायर बिग्रेड आग पर पूरी तरह से काबू करने के लिए पानी लाने के लिए 60 फेरे लगाने पड़े। बीएचईएल की भी फायर बिग्रेड आग पर काबू करने के लिए मौक्े पर बुलाई गई थी। तीन घंटे में आग को काबू कर लिया गया था, लेकिन थोड़ी - थोड़ी देर बाद आग भड़क रही थी। उसके लिए दोपहर तक टैंकर से पानी डाला जाता रहा।

आगजनी का मामला संदिग्ध क्यों 
सब फायर अफसर पीके खरे ने इस आगजनी को लेकर कुछ सवाल भी उठाए हैं। आग की तीव्रता देखकर लग रहा था कि वह एक घंटे पहले लगी, जबकि सूचना सुबह छह बजे दी गई। आगजनी का नुकसान बताने में जल्दबाजी दिखाई गई, फायर अमले को नुकसान तीन करोड़ बताया गया। सुबह पांच बजे सब्जी वाले आ जाते है, तो आग की सूचना देने में देरी क्यों हुई। 35 हजार स्क्वॉयर फीट में गोडाउन आग की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे? जब आग लगी तब बारिश हो रही थी, ऐसे में आग इतनी ज्यादा कैसे भड़की?

क्लैम से क्या फायदा होगा
विशेषज्ञों के मुताबिक बड़ी कंपनियां बीमा करवाती ही हैं। ऐसे में जो नुकसान होगा उसकी भरपाई होगीं। इस तरह के हादसों में वो सामग्री भी नष्ट हो गई बता दी जाती है जो या तो गोदाम में थी ही नहीं या एक्सपायर हो चुकी थी या फिर बिक ही नहीं रही थी। 

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