MP के किसान आंदोलन की आग अब पंजाब और कर्नाटक तक

Monday, June 12, 2017

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किया गया किसानों की कर्जमाफी का वादा अब भाजपा शासित राज्यों के लिए सिरदर्द बन गया है। चुनाव जीतने के बाद केंद्र सरकार ने पीएम मोदी के कर्जमाफी के वादे से हाथ खींच लिए थे परंतु योगी सरकार ने मोदी के वादे का पालन किया और 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ कर दिया। इसके बाद यही मांग महाराष्ट्र और मप्र में भी उठी। मप्र में किसान आंदोलन उग्र हुआ तो यह मांग पूरे देश के किसानों तक पहुंच गई। आज पंजाब और कर्नाटक के किसान भी कर्जमाफी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले महाराष्ट्र किसानों के कर्ज माफ करने का ऐलान कर चुका है। 

किसानों की इस मांग ने सरकारों को संकट में डाल दिया है। अर्थशास्त्री भी समझ नहीं पा रहे कि 4 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा महाराष्ट्र किसानों का कर्ज कैसे माफ कर सकेगा। इधर एनसीपी नेता शरद पवार ने बीजेपी सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा है कि बिना देरी किए तुरंत कर्जमाफी की व्यवस्था की जानी चाहिए। 

फसल की सही कीमत न मिलने और कर्ज से परेशान हैं किसान
10 दिन से महाराष्ट्र एवं मप्र के किसान खेती बाड़ी छोड़कर सड़क पर आंदोलन कर रहा था। जिन फसलों को पसीना बहाकर खड़ा किया था उसे अपने ही हाथों से सड़क पर बर्बाद करने पर किसान मजबूर हुए। किसानों की शिकायत थी कि उन्हें एक तो फसल की सही कीमत नहीं मिलती। दूसरे कर्ज का बोझ उन्हें जीने नहीं दे रही थी।

यूपी में 36 हजार करोड़ का किसान कर्ज माफ करने का फैसला
यूपी में 36 हजार करोड़ का किसान कर्ज माफी होने के बाद महाराष्ट्र के किसानों को भी अपनी सारी मुश्किलों का हल इसी में दिखने लगा. महाराष्ट्र की सरकार को झुकना पड़ा. मुंबई में किसान संगठन और राज्य सरकार के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर की बैठक के बाद कर्ज माफी का फैसला हो गया.

मोटे तौर पर सहमति ये बनी है कि स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र में कर्ज माफी होगी. स्वामीनाथन आयोग ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की सिफारिश की थी. इस सिफारिश को लागू करने के लिए बनी समिति के मुखिया सीएम फडणवीस खुद होंगे. समिति पीएम मोदी से भी बात करके जरूरी फैसला करेगी.

पहला फैसला: जिन किसानों के पास 5 एकड़ जमीन है उनके कर्ज माफी फौरन की जाएगी.
दूसरा फैसला: जिन किसानों की जमीन 5 एकड़ से ज्यादा है, उनके कर्ज की माफी का रास्ता सुझाने के लिए समिति बनी है. समिति बताएगी कि कैसे कर्ज माफ किया जाना है.
तीसरा फैसला: इस बार की फ़सल के लिए नया कर्ज तुरंत दिया जाएगा.
चौथा फैसला: सरकार किसानों के लिए दूध के दाम बढ़ाने पर भी सहमत हुई है. इसके अलावा सरकार किसानों के दुधे के दाम बढ़ाने के लिए भी मंज़ूर हो गई है. जिस तरह शक्कर के लिए सरकार 70-30 (यानि 70% किसान को प्रोफ़िट देती है) उसी तरह का दाम बढाकर किसानों को मुनाफा देगी. सरकार 20 जुलाई तक दूध के लिए नई नीति भी लाएगी.

पांचवां फैसला: आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए मामले लिए जाएंगे. किसान संगठनों ने सरकार पर भरोसा जताते हुए फौरन आंदोलन वापस ले लिया है. इस शर्त के साथ कि कोई गड़बड़ी हुई तो 26 जुलाई से दोबारा आंदोलन शुरू हो जाएगा. किसानों ने 13 जून को बुलाए रेल रोको आंदोलन और 12 जून को होनेवाले धरना प्रदर्शन को रद्द कर दिया है.

महाराष्ट्र सरकार पर पहले से 4 लाख करोड़ रु का कर्ज है
अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, महाराष्ट्र के कुल 1 करोड़ 36 लाख किसानों पर करीब 1 लाख 14 हजार करोड़ रु का कर्ज है. इनमें से करीब 31 लाख छोटे किसानों की कर्जमाफी पर 30 हजार करोड़ रु लगेंगे. महाराष्ट्र सरकार पर पहले से 4 लाख करोड़ रु का कर्ज है. ऐसे में कर्जमाफी के पैसे कहां से आएंगे? एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस मुद्दे पर राजनीति तेज करते हुए कहा है कि अगर सरकार ने कर्जमाफी का फैसला ले लिया है तो फिर इसे बिना देरी किए तुरंत लागू कर देना चाहिए ताकि खरीफ की खेती से पहले किसान नए कर्ज के लिए अवेदन कर सके.

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