शिवराज जी, संभल जाइए इनके कहने पर बयान मत दीजिये | KHULA KHAT

Wednesday, June 7, 2017

प्रवीण दुबे। शिवराज जी, बीते दस सालों में मैंने कई बार आपको खुले ख़त लिखे हैं..कुछेक बार व्यक्तिगत तौर पर भी आपको बिना मांगे सलाह दी है...फिर एक बार दे रहा हूँ आपको ब्यूरोक्रेसी छल रही है..आप अपने पुलिस मुख्यालय का इंटेलिजेंस विभाग आउटसोर्स कर दीजिए..यूँ भी तमाम विभागों में आपके पास ढेरों "नॉलेज पार्टनर कम्पनियां" हैं जिनकी आर्थिक सेहत बिना ज्यादा काम किये मज़बूत हो रही है. एक इंटेलिजेंस के लिए भी नॉलेज पार्टनर रख लीजिए..भोपाल के हमीदिया में रमज़ान के महीने में भी जो गड़बड़ी हुई उसका आकलन इंटेलिजेंस नहीं कर पाया...किसान आन्दोलन तो समझ ही नहीं पाया आपका गुप्तचर विभाग। 

उस पर सितम ये कि अधिकारी बेतुके बयान आपके मंत्रियों से दिलवाते रहे और लोगों का गुस्सा भड़कता रहा....और हाँ एक सलाह ये लोग और देते हैं कि सख्ती से पेश आओ...आपको याद होगा व्यापमं के समय इन्ही लोगों ने सलाह दी थी कि जो पत्रकार ज्यादा ख़बरें कर रहे हैं उनका सरकारी मकान छीन लो....यद्यपि मैं आपकी किसी भी प्रायोजित योजना का हितग्राही कभी नहीं रहा और इश्वर ऐसे मौके मेरे जीवन में कभी लाये भी न...लेकिन फिर भी मेरी सलाह है कि जब प्रजा में असंतोष हो तो राजा को बेहद विनम्र होना चाहिए, आपको ये लोग दमन करने के लिए उकसाते हैं...मंदसौर नीमच के एसपी और कलेक्टर को क्या अंदाजा नहीं था कि ऐसा होगा.... फिर उन्होंने क्यूँ स्थिति को नियंत्रित नहीं किया..? क्यूँ ये लोग पहले तो लोगों को भड़कने देते रहे और फिर सीधे गोलियां चलवा दीं..? 

ये आपको अँधेरे में रखते हैं...ये समझ गए हैं कि आपको जनता के बीच रहना और उत्सवधर्मिता पसंद हैं, तो ये आपको उसमें उलझाए रखकर अपना उल्लू सीधा करते हैं...अब बारी इन्हें सीधा करने की है, नहीं तो सब कुछ उल्टा-पुल्टा हो सकता है. मैंने दिग्विजय सिंह के अंतिम दौर के कार्यकाल में भी पत्रकारिता की है और देखा है कि वो कैसे कलेक्टर और एसपी के ज़रिये जिला चलवाते थे...ये रास्ता भी उसी दिशा में जा रहा है...संभल जाइए इनके कहने पर बयान मत दीजिये..एक तरफ आप कहते हैं कि कांग्रेस का एमपी में कोई वजूद नहीं है और ये कुछ हद तक सही भी था लेकिन अब आप कह रहे हैं कि ये आन्दोलन कांग्रेस प्रायोजित है....ऐसा कह कर आप ये बता रहे हैं कि एमपी में इतनी लचर और कमज़ोर सरकार है कि कांग्रेस जब चाहे उसे अस्थिर कर सकती है...

अरे कांग्रेस तो पके-पकाए फल का सिर्फ रस चूसने इकठ्ठा हुई है. दरअसल ये सारी चूक आपकी सरकार की ढीली प्रशासनिक पकड़ के कारण हुई है,,,,अब भी वक़्त है, इस "यस सर ब्रिग्रेड" की ज़द से बाहर निकलिए...इंटेलिजेंस के अधिकारियों की जमकर क्लास लीजिए...अपने मंत्रियों को जनता के बीच भेजिए....अभी तो आलम ये है कि परिवार में एक व्यक्ति मेहनत करके कमाने वाला है और बाकी के सब उसके पैसों पर ऐश कर रहे हैं....आपके मंत्रियों की ग्राह्ता लोगों के बीच होती तो हर काम आपको करने नहीं पड़ते....सलाहकार बदलिए और नौकरशाही पर न केवल अंकुश रखिये बल्कि उस पर अविश्वास करना और ठोक-बजाकर उनकी बातों पर भरोसा करना शुरू कीजिये...वरना ऐसा न हो कि कांग्रेस को तश्तरी में सत्ता की मिठाई परोस कर मिल जाए... मुझे जो कहना था कह दिया अब आगे आपकी मर्ज़ी........जय राम जी की ;)
लेखक श्री प्रवीण दुबे ईटीवी मध्यप्रदेश/छग के सीनियर एडिटर हैं। 

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